
Trump के Crypto दांव के बाद भारत में नीति बदलाव की मांग तेज
CoinDCX CEO Sumit Gupta ने Donald Trump के crypto समर्थक बयानों के बाद भारत से crypto policy पर दोबारा विचार करने की अपील की है। जानिए भारत की मौजूदा नीति और Web3 इंडस्ट्री की चिंताओं पर पूरी रिपोर्ट।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया क्रिप्टो समर्थक बयानों के बाद भारत में भी डिजिटल एसेट्स को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। भारत के बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज CoinDCX के CEO Sumit Gupta ने सरकार से क्रिप्टो नीति पर दोबारा विचार करने की अपील की है। उनका कहना है कि दुनिया तेजी से pro-crypto रुख अपना रही है, जबकि भारत अब भी भारी टैक्स और अनिश्चित नियमों के बीच फंसा हुआ है।
Gupta ने चेतावनी दी कि अगर भारत ने जल्द स्पष्ट और प्रतिस्पर्धी नीति नहीं बनाई, तो देश Web3 और blockchain innovation की वैश्विक दौड़ में पीछे छूट सकता है।
Trump के बयान से क्यों बढ़ी चर्चा?
हाल के महीनों में Donald Trump ने खुलकर Bitcoin और क्रिप्टो उद्योग के समर्थन में बयान दिए हैं। उन्होंने अमेरिका को “crypto capital” बनाने की बात कही है और कई मौकों पर डिजिटल एसेट्स को भविष्य की वित्तीय तकनीक बताया है।
Trump के इस रुख को अमेरिकी चुनावी राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। अमेरिका में Spot Bitcoin ETF की मंजूरी और संस्थागत निवेश बढ़ने के बाद वहां का क्रिप्टो सेक्टर तेजी से मुख्यधारा में आ रहा है।
इसी संदर्भ में CoinDCX CEO Sumit Gupta ने कहा कि भारत को भी अपने रुख पर दोबारा विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक दुनिया के बड़े देश blockchain और digital assets को रणनीतिक अवसर के रूप में देख रहे हैं, जबकि भारत अब भी अत्यधिक सतर्क रवैया अपनाए हुए है।
भारत की मौजूदा क्रिप्टो नीति पर सवाल
भारत में 2022 से क्रिप्टो लेनदेन पर 30 प्रतिशत टैक्स और हर ट्रांजैक्शन पर 1 प्रतिशत TDS लागू है। इंडस्ट्री लंबे समय से कह रही है कि इन नियमों ने घरेलू ट्रेडिंग वॉल्यूम को काफी प्रभावित किया है।
कई भारतीय ट्रेडर्स अब विदेशी प्लेटफॉर्म्स की तरफ बढ़ चुके हैं। वहीं कुछ Web3 स्टार्टअप्स ने regulatory uncertainty के कारण अपना मुख्य ऑपरेशन दुबई, सिंगापुर और दूसरे देशों में शिफ्ट कर दिया है।
Sumit Gupta का कहना है कि भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा डेवलपर बेस और युवा डिजिटल आबादी है। अगर सरकार संतुलित नियम बनाती है, तो भारत Web3 innovation का वैश्विक केंद्र बन सकता है।
संसद और एजेंसियों की बढ़ती सख्ती
CoinDCX CEO की यह अपील ऐसे समय आई है जब भारत में क्रिप्टो सेक्टर पर निगरानी और सख्त होती दिखाई दे रही है। हाल ही में संसद से जुड़ी एक रिपोर्ट में Virtual Digital Assets सेक्टर को “हाई रिस्क” बताया गया था। रिपोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और अवैध विदेशी लेनदेन को लेकर चिंता जताई गई थी।
इसके अलावा Financial Intelligence Unit यानी FIU-IND ने कई विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई भी की है। सरकार VPN और ऑफशोर एक्सचेंजों के जरिए होने वाले लेनदेन पर भी नजर रख रही है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि भारत फिलहाल “regulated but restrictive” मॉडल की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। यानी पूरी तरह बैन नहीं, लेकिन कड़ी निगरानी और सीमित अनुमति वाला ढांचा।
Web3 इंडस्ट्री को क्या डर सता रहा?
भारतीय Web3 कंपनियों का मानना है कि अगर नीति में बदलाव नहीं हुआ, तो innovation और निवेश दोनों पर असर पड़ सकता है। कई स्टार्टअप्स का कहना है कि विदेशी निवेशक भारत के regulatory environment को लेकर स्पष्टता चाहते हैं।
CoinDCX सहित कई उद्योग संगठनों ने सरकार से कम टैक्स, स्पष्ट licensing framework और stable policy environment की मांग की है। उनका तर्क है कि अत्यधिक सख्ती से क्रिप्टो गतिविधियां खत्म नहीं होंगी, बल्कि वे विदेशी और अनियमित प्लेटफॉर्म्स की तरफ चली जाएंगी।
क्या भारत बदल सकता है अपना रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पूरी तरह pro-crypto मॉडल अपनाने की संभावना फिलहाल कम है। RBI लंबे समय से निजी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर चिंता जताता रहा है और वित्तीय स्थिरता को बड़ा मुद्दा मानता है।
हालांकि दुनिया भर में बदलते माहौल का असर भारत की नीति पर भी पड़ सकता है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों में अब crypto regulation को innovation और compliance के संतुलन के साथ देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत आने वाले समय में चरणबद्ध regulatory framework ला सकता है, जिसमें licensing, KYC और tax compliance पर ज्यादा जोर होगा।
आगे किस पर रहेगी नजर?
फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि भारत सरकार आने वाले महीनों में crypto taxation और regulation को लेकर कोई नया संकेत देती है या नहीं। CoinDCX और दूसरी भारतीय कंपनियां लगातार सरकार के साथ बातचीत कर रही हैं।
Trump के बयानों ने भले ही वैश्विक crypto narrative को नई ऊर्जा दी हो, लेकिन भारत का रास्ता अभी भी सतर्क और नियंत्रित दिखाई देता है। आने वाले समय में यह तय होगा कि देश blockchain innovation को अवसर के रूप में देखता है या जोखिम के रूप में।
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