
91% भारतीय क्रिप्टो निवेशक नहीं करते घबराहट में ट्रेडिंग: रिपोर्ट
मड्रेक्स की नई रिपोर्ट के अनुसार, 91% भारतीय क्रिप्टो निवेशक बाजार में उतार चढ़ाव के दौरान घबराकर खरीदारी या बिक्री नहीं करते।

क्रिप्टो बाजार को अक्सर तेज उतार चढ़ाव और भावनात्मक निवेश फैसलों से जोड़ा जाता है। लेकिन भारत से सामने आई एक नई रिपोर्ट इस धारणा को चुनौती देती है। क्रिप्टो निवेश मंच मड्रेक्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के 91 प्रतिशत क्रिप्टो निवेशक बाजार में तेज गिरावट या अचानक बढ़त के दौरान घबराहट में फैसले लेने से बचते हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अधिकांश भारतीय निवेशक अब क्रिप्टो परिसंपत्तियों को सट्टेबाजी के बजाय एक दीर्घकालिक निवेश विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। सर्वेक्षण में शामिल निवेशकों में केवल 9 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि वे बाजार में बड़ी हलचल के दौरान घबराकर बिक्री करते हैं या तेजी के माहौल में जल्दबाजी में निवेश करते हैं। जबकि बाकी निवेशक सोच समझकर निर्णय लेते हैं या कुछ समय तक स्थिति का आकलन करते हैं।
यह निष्कर्ष ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक क्रिप्टो बाजार लगातार आर्थिक अनिश्चितताओं, ब्याज दरों और नियामकीय बदलावों से प्रभावित हो रहा है।
भारतीय निवेशकों की सोच में आया बड़ा बदलाव
मड्रेक्स की "हाउ इंडिया ट्रेड्स क्रिप्टो 2026" रिपोर्ट के लिए 22 राज्यों के 6,000 से अधिक सक्रिय निवेशकों और ट्रेडर्स से बातचीत की गई। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय निवेशकों का व्यवहार पहले की तुलना में अधिक परिपक्व दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती वर्षों में क्रिप्टो निवेशकों को केवल तेजी से मुनाफा कमाने वाले निवेशक के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। निवेशक बाजार के जोखिमों को बेहतर तरीके से समझ रहे हैं और किसी भी बड़े उतार चढ़ाव के दौरान जल्दबाजी में कदम उठाने से बच रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों में घबराहट में ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों की संख्या राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। इन राज्यों में बहुत कम निवेशकों ने बाजार की अस्थिरता के दौरान भावनात्मक फैसले लेने की बात स्वीकार की।
सीमित निवेश और जोखिम प्रबंधन पर जोर
रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि भारतीय निवेशक क्रिप्टो में अपनी पूरी पूंजी नहीं लगा रहे हैं। लगभग 48 प्रतिशत निवेशक अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का 10 प्रतिशत से कम हिस्सा ही डिजिटल परिसंपत्तियों में रखते हैं। वहीं 70 प्रतिशत से अधिक निवेशकों का क्रिप्टो आवंटन 25 प्रतिशत से कम है।
यह संकेत देता है कि अधिकांश निवेशक क्रिप्टो को अपने निवेश पोर्टफोलियो का केवल एक हिस्सा मानते हैं, न कि एकमात्र निवेश विकल्प।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यह रणनीति जोखिम प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। क्रिप्टो बाजार में तेजी और गिरावट दोनों बहुत तेज हो सकती हैं। ऐसे में विविध निवेश पोर्टफोलियो निवेशकों को संभावित नुकसान से बचाने में मदद करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय निवेशकों के बीच यह समझ तेजी से बढ़ रही है कि दीर्घकालिक निवेश और संतुलित आवंटन, अल्पकालिक सट्टेबाजी की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकता है।
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व्यवस्थित निवेश की बढ़ती लोकप्रियता
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि व्यवस्थित निवेश योजनाओं की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। मड्रेक्स के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के दौरान क्रिप्टो एसआईपी खातों में 220 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। मासिक निवेश राशि भी लगातार बढ़ती दिखाई दी।
इससे पता चलता है कि निवेशक एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय नियमित अंतराल पर छोटी राशि निवेश करना पसंद कर रहे हैं। यह तरीका बाजार की अस्थिरता के प्रभाव को कम करने में मदद करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 41 प्रतिशत से अधिक निवेशक खुद को दीर्घकालिक निवेशक मानते हैं। यह सर्वेक्षण में सबसे बड़ा समूह था। कई निवेशकों ने कहा कि उनका उद्देश्य अल्पकालिक लाभ कमाने के बजाय कई वर्षों तक परिसंपत्तियां होल्ड करना है।
क्रिप्टो बाजार के लिए क्या संकेत हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट भारतीय क्रिप्टो बाजार के परिपक्व होने का संकेत देती है। भारत पहले ही दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो उपयोगकर्ता बाजारों में शामिल है और निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
हालांकि नियामकीय स्पष्टता अभी भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है, लेकिन निवेशकों का व्यवहार यह दर्शाता है कि वे केवल बाजार की चर्चा या सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर फैसले नहीं ले रहे हैं।
बाजार जानकारों का कहना है कि यदि यही प्रवृत्ति जारी रहती है, तो भारतीय क्रिप्टो बाजार आने वाले वर्षों में अधिक स्थिर और संस्थागत निवेशकों के लिए आकर्षक बन सकता है।
फिलहाल रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारतीय क्रिप्टो निवेशक पहले की तुलना में अधिक धैर्यवान, अनुशासित और रणनीतिक हो चुके हैं। तेज गिरावट या अचानक उछाल के बावजूद अधिकांश निवेशक अब भावनाओं के बजाय सोच समझकर निर्णय लेना पसंद कर रहे हैं।
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