
विदेशी शेयर या क्रिप्टो, 2026 में कहां पैसा लगा रहे हैं भारतीय निवेशक?
2026 में भारतीय निवेशक विदेशी शेयरों और क्रिप्टो दोनों की ओर बढ़ रहे हैं। LRS निवेश और क्रिप्टो लेनदेन के आंकड़े इस बदलती निवेश प्रवृत्ति की तस्वीर दिखाते हैं।

भारतीय निवेशकों की निवेश आदतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब निवेश का दायरा केवल घरेलू शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और बैंक जमा तक सीमित नहीं रह गया है। 2026 में विदेशी शेयरों और क्रिप्टो परिसंपत्तियों में भारतीय भागीदारी दोनों बढ़ी है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों से यह कहना मुश्किल है कि निवेशक एक विकल्प छोड़कर दूसरे की ओर जा रहे हैं। बल्कि तस्वीर यह दिखाती है कि भारतीय निवेशक अपने पैसे को अलग-अलग बाजारों और परिसंपत्ति वर्गों में फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारतीयों द्वारा विदेश में निवेश के लिए भेजी गई रकम में तेज बढ़ोतरी हुई है। वहीं क्रिप्टो बाजार में भी खुदरा गतिविधि मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव वैश्विक निवेश के प्रति बढ़ती दिलचस्पी और जोखिम को अलग-अलग जगह बांटने की कोशिश का संकेत है।
विदेश में निवेश के लिए बढ़ी रकम
भारतीय रिजर्व बैंक की उदारीकृत प्रेषण योजना यानी LRS के तहत मई 2026 में विदेश भेजी गई कुल रकम बढ़कर करीब 2.39 अरब डॉलर पहुंच गई। इसमें शेयर और ऋण निवेश के लिए भेजी गई राशि सालाना आधार पर दोगुनी से ज्यादा बढ़कर करीब 36.36 करोड़ डॉलर हो गई।
अप्रैल और मई को मिलाकर विदेशी शेयर और ऋण निवेश के लिए भारतीयों द्वारा भेजी गई रकम करीब 60.33 करोड़ डॉलर रही, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग 96 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय निवेशक अब वैश्विक बाजारों में अवसर तलाशने के लिए पहले से अधिक सक्रिय हो रहे हैं।
विदेशी शेयरों में निवेश का एक फायदा यह है कि भारतीय निवेशकों को उन कंपनियों और क्षेत्रों तक पहुंच मिलती है जिनकी घरेलू बाजार में सीमित मौजूदगी है। अमेरिका की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां इसका प्रमुख उदाहरण हैं। इसके अलावा जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजार भी भारतीय निवेशकों के लिए नए अवसर पेश कर रहे हैं। हालांकि मुद्रा में उतार-चढ़ाव, विदेशी बाजारों की अस्थिरता, कर और नियामकीय नियमों को समझना जरूरी है।
क्रिप्टो में भी कायम है मजबूत गतिविधि
दूसरी तरफ क्रिप्टो बाजार में भारतीय निवेशकों की दिलचस्पी कम होती नहीं दिख रही। TRM Labs के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 की पहली तिमाही में भारत में खुदरा क्रिप्टो लेनदेन का कुल कारोबार करीब 46 अरब डॉलर रहा।
खास बात यह है कि यह गतिविधि ऐसे समय में बनी रही जब वैश्विक खुदरा क्रिप्टो कारोबार में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट आई थी। भारत में कर और नियामकीय चुनौतियों के बावजूद क्रिप्टो बाजार में गतिविधि का इतना ऊंचा स्तर बताता है कि डिजिटल परिसंपत्तियों में निवेशकों की रुचि अब भी मजबूत है।
हालांकि क्रिप्टो में निवेश और विदेश में शेयर खरीदने के आंकड़े एक जैसे नहीं हैं। विदेशी निवेश के आंकड़े LRS के तहत बाहर भेजी गई रकम को दिखाते हैं, जबकि क्रिप्टो के आंकड़े डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में हुए लेनदेन की गतिविधि बताते हैं। इसलिए इन दोनों को सीधे एक-दूसरे से तुलना करना सही नहीं होगा।
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क्या निवेशक विदेशी शेयरों को क्रिप्टो पर तरजीह दे रहे हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। BitDelta India के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विकास एम. सचदेवा ने भी संकेत दिया है कि उपलब्ध आंकड़े यह नहीं बताते कि कोई व्यक्तिगत निवेशक अपने कुल पैसे का कितना हिस्सा विदेशी शेयरों या क्रिप्टो में लगा रहा है।
इसके बजाय बड़ा बदलाव निवेश के नजरिए में दिखाई देता है। भारतीय निवेशक अब एक ही बाजार पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। विदेशी शेयर उन्हें वैश्विक कंपनियों और डॉलर आधारित परिसंपत्तियों तक पहुंच देते हैं, जबकि क्रिप्टो एक अलग तरह की डिजिटल परिसंपत्ति के रूप में निवेश का विकल्प देता है।
यह बदलाव ऐसे समय में भी महत्वपूर्ण है जब रुपये की कमजोरी ने विदेशी परिसंपत्तियों में निवेश को लेकर चर्चा बढ़ाई है। हालांकि विदेशी बाजारों में निवेश करने का मतलब केवल अधिक रिटर्न की संभावना नहीं है। इसमें मुद्रा जोखिम और अलग कर नियम भी शामिल होते हैं। LRS के तहत भारतीय निवासी हर वित्त वर्ष में निर्धारित सीमा तक विदेश में निवेश कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है बड़ा संकेत?
2026 के आंकड़ों से सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आती है कि भारतीय निवेशक अब निवेश के लिए ज्यादा व्यापक नजरिया अपना रहे हैं। विदेशी शेयरों में बढ़ती रकम और क्रिप्टो में मजबूत लेनदेन गतिविधि दोनों यह दिखाते हैं कि वैकल्पिक और वैश्विक परिसंपत्तियों की मांग बढ़ रही है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बाजार की लोकप्रियता देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। विदेशी शेयरों में निवेश से पहले मुद्रा, कर और नियामकीय नियम समझना जरूरी है। इसी तरह क्रिप्टो में अत्यधिक उतार-चढ़ाव और इससे जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फिलहाल उपलब्ध आंकड़े किसी एक विकल्प की जीत नहीं दिखाते। वे भारतीय निवेशक की बदलती सोच दिखाते हैं, जहां घरेलू बाजार के साथ वैश्विक शेयर और डिजिटल परिसंपत्तियां भी निवेश की रणनीति का हिस्सा बन रही हैं।
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