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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

Tether ने बढ़ाया सोने का भंडार, केंद्रीय बैंकों जैसी रणनीति के पीछे क्या है वजह?

ताजा खबरेंप्रकाशित15 अग॰ 2026

Tether ने 2026 की पहली छमाही में 27 टन से ज्यादा सोना खरीदा है। जानिए USDT जारी करने वाली कंपनी केंद्रीय बैंकों की तरह सोने का भंडार क्यों बढ़ा रही है।

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दुनिया की सबसे बड़ी स्टेबलकॉइन कंपनी Tether अब केवल क्रिप्टो बाजार तक सीमित नहीं रह गई है। कंपनी तेजी से सोना खरीद रही है और उसकी यह रणनीति अब केंद्रीय बैंकों के कदमों जैसी दिखाई देने लगी है। 2026 की पहली छमाही में Tether ने 27 टन से अधिक सोना खरीदा है। यह खरीदारी ऐसे समय हुई है जब दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर से जुड़े जोखिमों के बीच अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहे हैं।

Tether की सोने में बढ़ती दिलचस्पी का सीधा संबंध उसकी सबसे बड़ी डिजिटल मुद्रा USDT से भी है। कंपनी अपने भंडार में अलग-अलग परिसंपत्तियां रखती है और सोना उसके लिए डॉलर आधारित व्यवस्था से जुड़े जोखिमों को कम करने का एक अतिरिक्त साधन बनता जा रहा है।

केंद्रीय बैंक क्यों खरीद रहे हैं सोना?

सोने की मांग में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव, व्यापार विवाद, कमजोर डॉलर और अमेरिकी सरकारी ऋण को लेकर चिंता ने कई देशों को अपने विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव पर विचार करने के लिए मजबूर किया है।

विश्व स्वर्ण परिषद के 2026 के सर्वेक्षण में 89 प्रतिशत केंद्रीय बैंक अधिकारियों ने कहा कि अगले 12 महीनों में वैश्विक केंद्रीय बैंक सोने का भंडार बढ़ाएंगे। वहीं 45 प्रतिशत अधिकारियों ने कहा कि उनका अपना केंद्रीय बैंक भी सोने की हिस्सेदारी बढ़ा सकता है। सर्वेक्षण में सोने को संकट के समय सुरक्षा देने, पोर्टफोलियो में विविधता लाने और महंगाई से बचाव के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

2026 की पहली तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने करीब 244 टन सोना खरीदा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले अधिक था। पोलैंड, उज्बेकिस्तान और चीन प्रमुख खरीदारों में शामिल रहे।

Tether की खरीदारी क्यों बढ़ी?

Tether की रणनीति भी इसी वैश्विक बदलाव से जुड़ी दिखाई देती है। कंपनी ने 2026 की पहली छमाही में 27 टन से ज्यादा सोना खरीदा। यह मात्रा इतनी बड़ी है कि Tether दुनिया के प्रमुख आधिकारिक सोना खरीदारों के करीब पहुंच गई है। Barron's के अनुसार, खरीदारी की मात्रा के आधार पर कंपनी इस अवधि में कजाकिस्तान जैसे देशों के बराबर रही और केवल कुछ बड़े खरीदारों से पीछे थी।

इसका एक कारण USDT के भंडार को अधिक विविध बनाना है। USDT की कीमत अमेरिकी डॉलर से जुड़ी है, इसलिए Tether के लिए ऐसे भंडार रखना महत्वपूर्ण है जो बाजार में बड़े बदलाव के दौरान सुरक्षा प्रदान कर सकें।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी Paolo Ardoino पहले भी कह चुके हैं कि Tether भविष्य में दुनिया के बड़े निजी सोना भंडार रखने वालों में शामिल होना चाहता है। कंपनी के पास स्विट्जरलैंड में भौतिक सोना रखने की व्यवस्था है और उसने अपने टोकन आधारित सोना उत्पाद Tether Gold का भी विस्तार किया है।

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क्या Tether अब केंद्रीय बैंक जैसा व्यवहार कर रहा है?

Tether और केंद्रीय बैंकों के बीच तुलना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों ही आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सोने को सुरक्षा वाली परिसंपत्ति के रूप में देख रहे हैं। हालांकि दोनों की भूमिका पूरी तरह अलग है।

केंद्रीय बैंक देश के विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन करते हैं, जबकि Tether एक निजी कंपनी है और USDT जारी करती है। फिर भी Tether का आकार इतना बड़ा हो चुका है कि उसकी भंडार रणनीति का असर व्यापक वित्तीय बाजार पर पड़ सकता है।

यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण केंद्रीय बैंकों की सोने में रुचि मजबूत बनी हुई है। 2025 के अंत तक आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी मूल्य बढ़ने के कारण 27 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।

क्रिप्टो बाजार के लिए क्या है इसका मतलब?

Tether की सोने में बढ़ती खरीदारी क्रिप्टो और पारंपरिक वित्त के बीच बढ़ते संबंध का एक और उदाहरण है। पहले क्रिप्टो कंपनियां मुख्य रूप से डिजिटल टोकन और ब्लॉकचेन परियोजनाओं पर केंद्रित थीं। अब बड़ी कंपनियां सोना, सरकारी प्रतिभूतियां और दूसरी वास्तविक परिसंपत्तियां भी अपनी रणनीति में शामिल कर रही हैं।

अगर केंद्रीय बैंकों और Tether जैसी बड़ी कंपनियों की सोने की मांग आगे भी मजबूत रहती है, तो इससे सोने की कीमत और वैश्विक मांग को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है। हालांकि सोने की कीमत भी अस्थिर हो सकती है और इसे पूरी तरह जोखिम-मुक्त परिसंपत्ति नहीं माना जा सकता।

फिलहाल Tether का सोना खरीदना एक बड़े बदलाव का संकेत है। USDT जैसी डिजिटल मुद्रा जारी करने वाली कंपनी अब अपने भंडार को केवल डॉलर आधारित परिसंपत्तियों तक सीमित नहीं रखना चाहती। दूसरी ओर केंद्रीय बैंक भी लगातार सोने की ओर लौट रहे हैं। इससे साफ है कि भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर को लेकर अनिश्चितता और आर्थिक जोखिम के दौर में सोना एक बार फिर वैश्विक वित्तीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

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