
82% भारतीयों को Cryptocurrency पर भरोसा नहीं, 59% ने की पूरी तरह बैन करने की मांग
LocalCircles के सर्वे में 82% भारतीयों ने क्रिप्टोकरेंसी पर कम या शून्य भरोसा जताया। 59% लोग पूरी तरह प्रतिबंध चाहते हैं, जबकि 56% RBI के डिजिटल रुपये का इस्तेमाल करने को तैयार हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लोगों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। LocalCircles के एक नए सर्वे में सामने आया है कि 82% भारतीयों को निजी क्रिप्टोकरेंसी पर बहुत कम या बिल्कुल भरोसा नहीं है। इनमें 66% लोगों ने कहा कि उन्हें Bitcoin और दूसरी डिजिटल मुद्राओं पर बिल्कुल भरोसा नहीं है, जबकि 16% ने अपना भरोसा कम बताया।
31 अक्टूबर 2026 को जारी इस सर्वे के नतीजे ऐसे समय आए हैं, जब दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज Binance में हुई बड़ी सुरक्षा सेंधमारी ने डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सर्वे में शामिल 59% लोगों ने भारत सरकार से क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग की है। वहीं, 19% लोग चाहते हैं कि सरकार इन्हें कानूनी मान्यता देकर इन पर टैक्स लगाए।
LocalCircles के अनुसार, इस सर्वे में देश के 311 जिलों के नागरिकों से 43,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं मिलीं। हालांकि, अलग-अलग सवालों के जवाब देने वाले लोगों की संख्या अलग थी। इसलिए हर नतीजे को पूरे सर्वे के कुल प्रतिभागियों की राय नहीं माना जाना चाहिए।
पांच साल में क्रिप्टो पर भरोसा और घटा
सर्वे का एक अहम पहलू यह है कि 2021 के मुकाबले 2026 में क्रिप्टोकरेंसी पर लोगों का भरोसा और कम हुआ है। पांच साल पहले 49% लोगों ने कहा था कि उन्हें डिजिटल मुद्राओं पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 66% हो गया।
इसी तरह, क्रिप्टो पर कम भरोसा जताने वाले लोगों की हिस्सेदारी 2021 में 27% थी, जो अब घटकर 16% रह गई है। औसत भरोसा रखने वाले लोगों की संख्या भी 12% से घटकर 6% हो गई। दूसरी ओर, क्रिप्टो में अधिक भरोसा रखने वालों की हिस्सेदारी 2021 के 1% से बढ़कर 2026 में 4% हुई है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि क्रिप्टो में दिलचस्पी रखने वाले कुछ लोग अब भी मौजूद हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग इससे दूरी बना रहे हैं। कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव, एक्सचेंजों की सुरक्षा संबंधी घटनाएं और निवेश से जुड़े जोखिम इस बदलती धारणा के पीछे अहम कारण हो सकते हैं।
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59% लोग चाहते हैं क्रिप्टो पर पूरी तरह प्रतिबंध
सर्वे में लोगों से पूछा गया कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार की नीति क्या होनी चाहिए। इसके जवाब में 59% लोगों ने कहा कि सरकार को निजी क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
इसके अलावा, 16% लोगों का मानना है कि क्रिप्टो को कानूनी मान्यता नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन विदेश में रखी डिजिटल संपत्ति की तरह इस पर टैक्स लगाया जा सकता है। वहीं, 19% लोगों ने क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मान्यता देने और भारत में ही उस पर टैक्स लगाने का समर्थन किया। बाकी 6% लोगों ने इस सवाल पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी।
यह नतीजा भारत में क्रिप्टो को लेकर जारी नीतिगत बहस के बीच महत्वपूर्ण है। फिलहाल भारत में क्रिप्टोकरेंसी को रखना या खरीदना-बेचना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन इसे रुपये की तरह कानूनी मुद्रा का दर्जा नहीं मिला है। इस क्षेत्र पर टैक्स और धनशोधन रोकने से जुड़े नियम लागू हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) निजी क्रिप्टोकरेंसी के वित्तीय स्थिरता और निवेशकों की सुरक्षा पर पड़ने वाले जोखिमों को लेकर लगातार चिंता जताता रहा है।
76% परिवारों में कोई क्रिप्टो निवेशक नहीं
सर्वे में यह भी जानने की कोशिश की गई कि भारतीय परिवारों में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कितना आम है। इसके जवाब में 76% लोगों ने बताया कि उनके परिवार में कोई भी सदस्य क्रिप्टोकरेंसी में निवेश या कारोबार नहीं करता।
वहीं, 16% लोगों ने कहा कि उनके परिवार का एक सदस्य क्रिप्टो में सक्रिय है, जबकि 5% ने बताया कि उनके परिवार के कई सदस्य डिजिटल मुद्राओं में निवेश करते हैं। इस सवाल पर 3% लोगों ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
यह आंकड़ा दिखाता है कि भारत में क्रिप्टो को लेकर चर्चा और लोकप्रियता के बावजूद बड़ी संख्या में परिवार अभी इससे दूर हैं। हालांकि, सर्वे के नतीजों को देश के सभी परिवारों की वास्तविक निवेश स्थिति का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
RBI की डिजिटल करेंसी को लेकर ज्यादा उत्साह
निजी क्रिप्टोकरेंसी के प्रति कम भरोसे के बीच RBI की डिजिटल करेंसी को लेकर लोगों की राय अपेक्षाकृत सकारात्मक नजर आई। सर्वे में 56% लोगों ने कहा कि बैंक जब कारोबारियों और आम नागरिकों के बीच भुगतान के लिए डिजिटल रुपये की सुविधा व्यापक रूप से उपलब्ध कराएंगे, तो वे इसका इस्तेमाल करना चाहेंगे।
इसके विपरीत, 21% लोगों ने डिजिटल रुपये का इस्तेमाल करने से इनकार किया, जबकि 23% अभी इस बारे में अनिश्चित हैं।
डिजिटल रुपया RBI की ओर से जारी की जाने वाली आधिकारिक डिजिटल मुद्रा है। Bitcoin जैसी निजी क्रिप्टोकरेंसी से इसका बड़ा अंतर यह है कि इसे केंद्रीय बैंक जारी और नियंत्रित करता है। इसकी कीमत भारतीय रुपये के बराबर रहती है।
कुल मिलाकर, LocalCircles का सर्वे भारत में निजी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर बढ़ती सावधानी और सरकारी डिजिटल मुद्रा में संभावित रुचि के बीच अंतर दिखाता है। Binance, Bitget और CoinDCX जैसी कंपनियों से जुड़ी सुरक्षा घटनाओं ने निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ाया है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि सरकार भविष्य में निजी डिजिटल संपत्तियों के लिए किस तरह का नियामकीय ढांचा तैयार करती है।
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