
भारत में क्रिप्टो कारोबार पर टैक्स का असर, 95% ट्रेडिंग विदेशी प्लेटफॉर्म पर पहुंची
भारत में क्रिप्टो ट्रेडिंग का करीब 95% हिस्सा विदेशी प्लेटफॉर्म पर पहुंचने का अनुमान है। जानें 1% TDS, 30% टैक्स और संभावित ₹57,147 करोड़ के कर नुकसान से जुड़ी रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कर नियमों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय निवेशकों की क्रिप्टो ट्रेडिंग का करीब 95% हिस्सा विदेशी प्लेटफॉर्म पर हुआ। इसके चलते घरेलू क्रिप्टो एक्सचेंजों की बाजार में हिस्सेदारी काफी कम रह गई है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि मौजूदा कर व्यवस्था के कारण सरकार को संभावित कर राजस्व का नुकसान हो सकता है।
TIOL Knowledge Foundation की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में क्रिप्टो कारोबार पर लगने वाला 1% TDS और मुनाफे पर 30% टैक्स निवेशकों को घरेलू प्लेटफॉर्म से दूर कर सकता है। रिपोर्ट में कर नियमों में बदलाव करने की सिफारिश भी की गई है, ताकि कारोबार को भारत के भीतर बढ़ावा दिया जा सके।
विदेशी प्लेटफॉर्म पर बढ़ा क्रिप्टो कारोबार
रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर करीब ₹9 लाख करोड़ का कारोबार हुआ। इसके मुकाबले भारतीय नियमों का पालन करने वाले घरेलू एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग का कुल मूल्य ₹51,446 करोड़ रहा। इससे पता चलता है कि भारतीय क्रिप्टो बाजार का बड़ा हिस्सा अब विदेशी प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ चुका है।
इस बदलाव के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें हर लेनदेन पर TDS की कटौती, क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर भारी टैक्स और नुकसान को मुनाफे के साथ समायोजित करने पर लगी पाबंदी शामिल हैं।
मौजूदा व्यवस्था के तहत, निर्धारित क्रिप्टो लेनदेन पर 1% TDS काटा जाता है। इसके अलावा, क्रिप्टो संपत्तियों के हस्तांतरण से होने वाली कर योग्य कमाई पर 30% टैक्स लगता है। इसका असर खास तौर पर उन कारोबारियों पर पड़ता है, जो एक दिन में कई बार खरीद-बिक्री करते हैं।
1% TDS से कारोबारियों की लागत बढ़ी
क्रिप्टो बाजार में TDS को लेकर लंबे समय से सवाल उठाए जाते रहे हैं। इसकी वजह यह है कि TDS की गणना लागू नियमों के तहत लेनदेन की पूरी राशि पर होती है, न कि केवल उससे होने वाले मुनाफे पर। ऐसे में बार-बार ट्रेडिंग करने वाले कारोबारियों की रकम का एक हिस्सा हर बार टैक्स के रूप में कट जाता है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई निवेशक ₹1 लाख का ऐसा क्रिप्टो लेनदेन करता है जिस पर 1% TDS लागू होता है, तो ₹1,000 की कटौती होगी। यह कटौती केवल मुनाफा होने की स्थिति तक सीमित नहीं है। हालांकि, TDS अंतिम टैक्स देनदारी से अलग है और लागू नियमों के अनुसार इसका क्रेडिट लिया जा सकता है।
इसके साथ ही, क्रिप्टो में हुए नुकसान को दूसरे क्रिप्टो लेनदेन के मुनाफे के साथ समायोजित करने पर भी पाबंदी है। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि इन नियमों के कारण घरेलू एक्सचेंजों पर कारोबार करना कम आकर्षक हो गया है।
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सरकार के सामने संभावित राजस्व नुकसान की चुनौती
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि जुलाई 2022 से क्रिप्टो लेनदेन पर लागू TDS व्यवस्था के तहत करीब ₹19,049 करोड़ की राशि संभावित रूप से नहीं वसूली जा सकी। इसमें विदेशी प्लेटफॉर्म पर हुए कारोबार से जुड़ी अनुमानित राशि भी शामिल हो सकती है। रिपोर्ट ने कुल संभावित कर नुकसान का आंकड़ा ₹57,147 करोड़ बताया है।
हालांकि, इन आंकड़ों को सरकार की ओर से पुष्टि किए गए बकाया टैक्स के रूप में नहीं देखना चाहिए। ये रिपोर्ट के अनुमान हैं। वास्तविक कर देनदारी इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन से लेनदेन कर के दायरे में आते हैं और संबंधित निवेशकों की वास्तविक आय कितनी है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में क्रिप्टो और अन्य आभासी डिजिटल संपत्तियों से जुड़े लेनदेन पर ₹511.83 करोड़ का TDS संग्रह दर्ज किया था। इससे स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र से कर संग्रह हो रहा है, लेकिन कारोबार का बड़ा हिस्सा विदेशी मंचों पर जाने से निगरानी और कर अनुपालन की चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
कर नियमों में बदलाव की सिफारिश
रिपोर्ट में क्रिप्टो लेनदेन पर TDS की दर को 1% से घटाकर 0.01% करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, निवेशकों को क्रिप्टो में हुए नुकसान को मुनाफे के साथ समायोजित करने और पात्र नुकसान को आगे के वर्षों में ले जाने की अनुमति देने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट का मानना है कि इन बदलावों से घरेलू एक्सचेंजों पर कारोबार बढ़ सकता है और लेनदेन पर निगरानी बनाए रखते हुए निवेशकों को राहत मिल सकती है। अनुमान है कि मौजूदा रुझान जारी रहने पर वित्त वर्ष 2030-31 तक विदेशी प्लेटफॉर्म पर क्रिप्टो कारोबार ₹15.27 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
फिलहाल, सरकार ने 2026 के बजट में क्रिप्टो टैक्स व्यवस्था में कोई बड़ी राहत नहीं दी थी। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार कारोबार को घरेलू प्लेटफॉर्म पर वापस लाने के लिए कर नियमों में बदलाव करती है या मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखती है।
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