
भारत में 2025 में आया $340 अरब का क्रिप्टो प्रवाह, जीडीपी के 9% के बराबर पहुंचा बाजार
OECD की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत में करीब $340 अरब का क्रिप्टो निवेश प्रवाह दर्ज किया गया, जो देश की जीडीपी के लगभग 9% के बराबर है।

भारत का क्रिप्टो बाजार एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) से जुड़े हालिया आंकड़ों के अनुसार, जून 2024 से जून 2025 के बीच भारत में लगभग 340 अरब डॉलर का क्रिप्टो पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया। यह राशि देश की कुल जीडीपी के करीब 9% के बराबर मानी जा रही है। आंकड़े यह संकेत देते हैं कि कड़े कर नियमों और नियामकीय अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में डिजिटल परिसंपत्तियों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, एशिया में सबसे अधिक कुल क्रिप्टो प्रवाह भारत और दक्षिण कोरिया में दर्ज किया गया। हालांकि जीडीपी के अनुपात में कुछ अन्य देशों का हिस्सा अधिक रहा, लेकिन कुल मूल्य के आधार पर भारत सबसे बड़े बाजारों में शामिल रहा।
कड़े नियमों के बावजूद क्यों बढ़ रहा है क्रिप्टो निवेश?
भारत में क्रिप्टो लेनदेन पर 30% कर और स्रोत पर कर कटौती (TDS) जैसे नियम लागू हैं। इसके बावजूद निवेशकों की रुचि कम नहीं हुई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि युवा आबादी, बढ़ती डिजिटल पहुंच और वैकल्पिक निवेश साधनों की तलाश ने क्रिप्टो को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत लगातार दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो अपनाने वाले देशों में शामिल रहा है। ब्लॉकचेन विश्लेषण कंपनी Chainalysis की रिपोर्ट में भी भारत को वैश्विक क्रिप्टो अपनाने के मामले में शीर्ष देशों में रखा गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों और कस्बों में भी क्रिप्टो निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। मोबाइल इंटरनेट और डिजिटल भुगतान प्रणाली की पहुंच ने इस विस्तार को और गति दी है।
संस्थागत निवेश और वैश्विक रुझानों का असर
2025 क्रिप्टो उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साल माना गया। बिटकॉइन में रिकॉर्ड तेजी, संस्थागत निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और वैश्विक स्तर पर डिजिटल परिसंपत्तियों को मिल रही स्वीकार्यता ने बाजार को मजबूती दी। कई बड़े निवेशकों ने पारंपरिक निवेश विकल्पों के साथ क्रिप्टो को भी अपने पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाना शुरू किया।
विश्लेषकों के अनुसार, भारत में भी इस वैश्विक रुझान का प्रभाव देखने को मिला। बड़ी संख्या में निवेशकों ने बिटकॉइन, Ethereum और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ाया। इसके अलावा Web3, ब्लॉकचेन और विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) से जुड़ी परियोजनाओं ने भी निवेशकों को आकर्षित किया।
हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा, लेकिन कुल पूंजी प्रवाह यह दर्शाता है कि निवेशकों का भरोसा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है।
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OECD ने किन जोखिमों की ओर किया इशारा?
OECD की रिपोर्ट केवल तेजी की कहानी नहीं बताती, बल्कि कुछ महत्वपूर्ण जोखिमों की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है। रिपोर्ट के अनुसार, क्रिप्टो परिसंपत्तियों में बढ़ती भागीदारी के साथ नियामकीय निगरानी और निवेशक सुरक्षा की आवश्यकता भी बढ़ जाती है।
भारत पहले ही OECD के Crypto-Asset Reporting Framework (CARF) को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इसके तहत भविष्य में विभिन्न देशों के बीच क्रिप्टो लेनदेन से जुड़ी जानकारी का आदान-प्रदान किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य कर चोरी और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे बाजार का आकार बढ़ेगा, वैसे-वैसे स्पष्ट नियमों और मजबूत निगरानी व्यवस्था की जरूरत भी बढ़ेगी। यही वजह है कि भारत में क्रिप्टो नियमन को लेकर चर्चाएं तेज हो रही हैं।
आगे क्या है तस्वीर?
340 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह यह दिखाता है कि भारत वैश्विक क्रिप्टो अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुका है। दुनिया भर में नियामकीय ढांचे विकसित हो रहे हैं और भारत भी धीरे-धीरे इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि सरकार स्पष्ट नीति और संतुलित नियामकीय ढांचा तैयार करती है, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक क्रिप्टो और Web3 नवाचार का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
फिलहाल OECD के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि कर नियमों और अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय निवेशकों का क्रिप्टो बाजार पर भरोसा बना हुआ है। यही वजह है कि देश में डिजिटल परिसंपत्तियों का विस्तार अपेक्षा से कहीं अधिक तेज गति से हो रहा है।
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