
Swift और Chainlink की बड़ी साझेदारी, अब 24/7 Tokenized Payments पर जोर
Chainlink Swift के ब्लॉकचेन लेजर से बैंकों को जोड़ने के लिए नई तकनीकी व्यवस्था तैयार कर रहा है। इससे टोकनाइज्ड डिपॉजिट और 24/7 सीमा-पार भुगतान को बढ़ावा मिल सकता है।

वैश्विक बैंकिंग और क्रिप्टो तकनीक के बीच एक और बड़ा जुड़ाव सामने आया है। Chainlink ने घोषणा की है कि वह वित्तीय संस्थानों को Swift के नए ब्लॉकचेन आधारित लेजर से जोड़ने के लिए एक तकनीकी व्यवस्था तैयार कर रहा है। इसके जरिए बैंक अपने मौजूदा सिस्टम और लेनदेन की मंजूरी देने वाली निजी कुंजियों पर नियंत्रण बनाए रखते हुए Swift के ब्लॉकचेन लेजर के साथ काम कर सकेंगे।
इस साझेदारी का सबसे बड़ा इस्तेमाल टोकनाइज्ड बैंक डिपॉजिट और 24 घंटे, सातों दिन सीमा-पार भुगतान में हो सकता है। Chainlink का कहना है कि उसकी तकनीक बैंकों के मौजूदा सिस्टम को बदले बिना नए डिजिटल भुगतान ढांचे से जोड़ने में मदद करेगी।
Chainlink की तकनीक कैसे करेगी काम?
इस पूरी व्यवस्था के केंद्र में Chainlink Runtime Environment यानी CRE है। यह एक ऐसा तकनीकी ढांचा है जो बैंक के सिस्टम और Swift के ब्लॉकचेन लेजर के बीच लेनदेन से जुड़े कामों को व्यवस्थित करेगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि बैंक अपनी लेनदेन मंजूर करने वाली निजी कुंजियां खुद अपने पास रखेंगे। यानी Chainlink को बैंक की ओर से सीधे लेनदेन मंजूर करने का अधिकार नहीं मिलेगा। बैंक अपनी सुरक्षा और मंजूरी की मौजूदा प्रक्रिया को बनाए रखते हुए CRE के जरिए Swift के लेजर से जुड़ सकेंगे।
यह व्यवस्था उन वित्तीय संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो ब्लॉकचेन आधारित भुगतान अपनाना चाहते हैं, लेकिन अपनी मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था और नियंत्रण को छोड़ना नहीं चाहते।
Chainlink के मुताबिक, CRE अलग-अलग ब्लॉकचेन और मौजूदा वित्तीय प्रणालियों के बीच काम करने वाली प्रक्रियाओं को एक साथ जोड़ सकता है। इससे हर नए नेटवर्क के लिए अलग तकनीकी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत कम हो सकती है।
Swift का Blockchain Ledger क्यों महत्वपूर्ण है?
Swift का नया लेजर सामान्य क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार के लिए नहीं बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बैंकों के बीच टोकनाइज्ड डिपॉजिट के जरिए सीमा-पार भुगतान को अधिक तेज और लगातार उपलब्ध कराना है।
टोकनाइज्ड डिपॉजिट ऐसे डिजिटल रूप हैं जो बैंक में मौजूद जमा राशि को दर्शाते हैं। ये टोकन बैंक की अपनी व्यवस्था में रहते हैं, जबकि Swift का साझा लेजर अलग-अलग बैंकों के बीच भुगतान की जानकारी और प्रक्रिया को व्यवस्थित करता है। अंतिम भुगतान मौजूदा निपटान प्रणालियों के जरिए ही हो सकता है।
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इस मॉडल का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि सीमा-पार भुगतान रात, सप्ताहांत या छुट्टी के दौरान भी लगातार चल सके। अभी पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था में अलग-अलग समय क्षेत्रों और कामकाजी घंटों के कारण भुगतान में देरी हो सकती है।
Swift का कहना है कि उसका लेजर मौजूदा वित्तीय ढांचे को पूरी तरह हटाने के बजाय उसके साथ काम करने के लिए तैयार किया गया है। यही वजह है कि बैंक इसे अपनी मौजूदा भुगतान व्यवस्था के साथ जोड़ सकते हैं।
17 बैंक कर रहे हैं शुरुआती परीक्षण
Swift का ब्लॉकचेन लेजर अब केवल प्रयोग के स्तर पर नहीं है। शुरुआती वास्तविक लेनदेन के लिए 17 बैंक छह महाद्वीपों से जुड़े हुए हैं। इनमें ANZ, BNP Paribas, BNY, Citi, DBS, HSBC, MUFG, Standard Chartered, UBS, UOB और Wells Fargo जैसे बड़े बैंक शामिल हैं।
Swift ने बताया है कि इस लेजर को 40 से ज्यादा वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर विकसित किया गया। इसका उद्देश्य बैंकों के बीच टोकनाइज्ड जमा के आधार पर 24/7 भुगतान को व्यवस्थित करना है। Swift का नेटवर्क पहले से 11,500 से अधिक वित्तीय संस्थानों और कंपनियों को 200 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में जोड़ता है।
इस वजह से ब्लॉकचेन आधारित भुगतान व्यवस्था को व्यापक बैंकिंग नेटवर्क से जोड़ने की क्षमता काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।
Tokenized Banking की ओर बढ़ रहा वित्तीय क्षेत्र
Swift और Chainlink का यह कदम ऐसे समय आया है जब बड़े बैंक टोकनाइज्ड संपत्तियों और डिजिटल भुगतान को लेकर तेजी से प्रयोग कर रहे हैं। बैंकों के लिए चुनौती यह है कि नई तकनीक अपनाते हुए वे सुरक्षा, नियमों और जोखिम नियंत्रण की मौजूदा व्यवस्था को भी बनाए रखें।
Chainlink का नया ढांचा इसी समस्या को हल करने की कोशिश करता है। बैंक अपनी कुंजियों और मंजूरी प्रक्रिया पर नियंत्रण रखते हैं, जबकि CRE उनके सिस्टम को Swift के साझा लेजर से जोड़ने का काम करता है।
अगर शुरुआती परीक्षण सफल रहते हैं, तो इस मॉडल का इस्तेमाल भविष्य में सीमा-पार भुगतान के अलावा विदेशी मुद्रा लेनदेन, कॉरपोरेट भुगतान और दूसरी वित्तीय गतिविधियों में भी बढ़ सकता है। Swift ने खुद अपने लेजर के संभावित इस्तेमाल में प्रोग्राम योग्य भुगतान, विदेशी मुद्रा और प्रतिभूति लेनदेन से जुड़े नकदी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया है।
फिलहाल यह पहल वैश्विक बैंकिंग व्यवस्था में ब्लॉकचेन के व्यावहारिक इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने बैंक इसे अपनाते हैं और शुरुआती परीक्षणों के बाद यह व्यवस्था बड़े पैमाने पर कितनी आसानी से लागू हो पाती है।
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