
प्रतिबंधों से बचने के लिए ब्लॉकचेन का सहारा लेगा इजरायल? नेतन्याहू के बयान पर विवाद
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने संभावित आर्थिक प्रतिबंधों से निपटने के लिए ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेंसी का सुझाव दिया है। जानिए केंद्रीय बैंक और विपक्ष ने इस योजना का विरोध क्यों किया।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संभावित अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों से निपटने के लिए ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल की संभावना जताई है। उन्होंने कहा है कि अगर भविष्य में इजरायल के बैंकों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो देश को ऐसी वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था तैयार रखनी चाहिए, जो पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली पर पूरी तरह निर्भर न हो।
23 अक्टूबर को इजरायल के एक टेलीविजन चैनल को दिए साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने इस दिशा में योजना तैयार करने के लिए कहा है। उनके इस बयान ने देश में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। इजरायल के केंद्रीय बैंक ने इस विचार पर सवाल उठाए हैं, जबकि विपक्षी नेताओं और अर्थशास्त्रियों ने इसे अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरा बताया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब इजरायल को पश्चिमी देशों की ओर से बढ़ते राजनयिक और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। देश में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का अहम हिस्सा बन गया है।
नेतन्याहू ने क्यों उठाया ब्लॉकचेन का मुद्दा?
नेतन्याहू ने अपने साक्षात्कार में कहा कि इजरायल को संभावित बैंकिंग प्रतिबंधों के लिए पहले से तैयारी करनी चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन तकनीक ऐसी स्थिति में मदद कर सकती है, तो उन्होंने इस संभावना पर सहमति जताई।
उनके मुताबिक, सरकार वैकल्पिक आर्थिक व्यवस्था के विकल्पों पर विचार कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस योजना में किन क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जा सकता है, कौन-सी ब्लॉकचेन तकनीक चुनी जाएगी या इस व्यवस्था को लागू करने की समयसीमा क्या होगी।
ब्लॉकचेन एक डिजिटल तकनीक है, जिसमें लेनदेन का रिकॉर्ड नेटवर्क पर दर्ज होता है। कुछ नेटवर्क पारंपरिक बैंकिंग मध्यस्थों के बिना भी डिजिटल संपत्तियों का हस्तांतरण करने की सुविधा देते हैं। इसी वजह से सरकारें और कंपनियां इसका इस्तेमाल भुगतान तथा डेटा के प्रबंधन जैसे कामों में तलाश रही हैं।
लेकिन किसी देश की पूरी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए केवल डिजिटल लेनदेन की सुविधा पर्याप्त नहीं होती। अंतरराष्ट्रीय व्यापार, बैंकिंग सेवाओं और विदेशी निवेश के लिए व्यापक आर्थिक संबंध भी जरूरी हैं।
पश्चिमी देशों के दबाव के बीच आया बयान
नेतन्याहू का यह बयान इजरायल के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है। ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा और अन्य पश्चिमी देशों ने वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों से जुड़े सामान पर प्रतिबंध लगाने या ऐसे कदमों की घोषणा की है। इन फैसलों के पीछे बस्तियों के विस्तार और फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा को लेकर चिंताएं बताई गई हैं।
आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में प्रतिबंधों का दायरा बढ़ सकता है और इसका असर इजरायल की व्यापक अर्थव्यवस्था या बैंकिंग क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। नेतन्याहू का प्रस्ताव इसी संभावित स्थिति से निपटने की तैयारी के रूप में सामने आया है।
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हालांकि, किसी देश पर प्रतिबंध लगने के बाद क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करना उसे प्रतिबंधों के असर से पूरी तरह सुरक्षित नहीं करता। डिजिटल संपत्तियों के लेनदेन को कई ब्लॉकचेन नेटवर्क पर सार्वजनिक रूप से देखा और जांचा जा सकता है। इसके अलावा, क्रिप्टोकरेंसी को पारंपरिक मुद्रा में बदलने और अंतरराष्ट्रीय कारोबार में इस्तेमाल करने के लिए कई बार ऐसे संस्थानों की जरूरत पड़ती है, जो प्रतिबंधों के नियमों का पालन करते हैं।
केंद्रीय बैंक और विपक्ष ने जताई चिंता
बैंक ऑफ इजरायल ने नेतन्याहू के प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए कहा कि क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंधों से बचने का रास्ता नहीं हो सकती। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, देश को अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखने और ऐसे कदम उठाने पर ध्यान देना चाहिए, जिनसे प्रतिबंधों की आशंका कम हो।
विपक्षी नेताओं ने भी इस प्रस्ताव की आलोचना की है। यशार पार्टी के नेता गादी आइजेनकोट ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। आलोचकों का तर्क है कि क्रिप्टोकरेंसी पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार और विदेशी कंपनियों के साथ कारोबारी संबंधों की जगह नहीं ले सकती।
100 से अधिक अर्थशास्त्रियों ने भी नेतन्याहू के प्रस्ताव पर चिंता जताई है। इनमें पूर्व केंद्रीय बैंक अधिकारियों और नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम शामिल हैं। उनका मानना है कि प्रतिबंधों से बचने के लिए ऐसी योजना पर जोर देने से विदेशी निवेश और देश की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
क्या क्रिप्टोकरेंसी इजरायल की मदद कर पाएगी?
क्रिप्टोकरेंसी कुछ परिस्थितियों में पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से अलग भुगतान का विकल्प दे सकती है। लेकिन इससे किसी देश के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को पूरी तरह निष्प्रभावी करना आसान नहीं हो जाता। डिजिटल लेनदेन की निगरानी, संपत्तियों को फ्रीज करने की कार्रवाई और क्रिप्टो से पारंपरिक मुद्रा में बदलने के रास्तों पर नियंत्रण इसके इस्तेमाल को सीमित कर सकते हैं।
फिलहाल, नेतन्याहू ने केवल एक योजना तैयार करने की बात कही है। इसके वास्तविक स्वरूप और लागू होने की संभावना को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा इजरायल की राजनीति और आर्थिक नीति में कितनी अहम भूमिका निभाता है, इस पर बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।
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