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Rajeev Ranjan Roy द्वारा लिखितस्टाफ लेखकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

Meta 2026 में शुरू करेगा स्टेबलकॉइन पेमेंट

ताजा खबरेंप्रकाशित28 फ़र॰ 2026

Meta 2026 की दूसरी छमाही में स्टेबलकॉइन आधारित भुगतान सेवा लॉन्च करने की तैयारी में है। कंपनी इस बार खुद की डिजिटल मुद्रा जारी नहीं करेगी।

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विश्व की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा एक बार फिर डिजिटल वित्तीय प्रणाली में बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में स्थिर मूल्य वाली डिजिटल मुद्रा आधारित भुगतान सेवा शुरू करने की योजना पर कार्य कर रही है। यह कदम मेटा की पूर्व असफल डिजिटल मुद्रा परियोजना के बाद नई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, मेटा इस बार अपनी स्वयं की डिजिटल मुद्रा जारी नहीं करेगी, बल्कि पहले से मौजूद स्थिर मुद्राओं को अपने मंचों पर भुगतान माध्यम के रूप में जोड़ने की योजना बना रही है। कंपनी का उद्देश्य अपने विशाल उपयोगकर्ता आधार को सुरक्षित तथा तेज डिजिटल भुगतान सुविधा उपलब्ध कराना है।

तीन अरब से अधिक का उपयोगकर्ता आधार

मेटा के स्वामित्व वाले सामाजिक मंचों – फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप – का संयुक्त उपयोगकर्ता आधार तीन अरब से अधिक माना जाता है। ऐसे में स्थिर मुद्रा भुगतान प्रणाली लागू होने पर वैश्विक स्तर पर सीमा-पार लेनदेन, सामग्री निर्माताओं को भुगतान तथा ऑनलाइन व्यापार में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी ने अपनी पिछली गलती से सबक लिया है। वर्ष 2019 में मेटा ने वैश्विक डिजिटल मुद्रा परियोजना शुरू की थी, जिसे बाद में नियामकीय दबाव के कारण बंद करना पड़ा। उस समय विभिन्न देशों की सरकारों और केंद्रीय बैंकों ने निजी कंपनी द्वारा वैश्विक मुद्रा नियंत्रण को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई थीं। अंततः वर्ष 2022 में उस परियोजना को समाप्त करना पड़ा।

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प्रत्यक्ष रूप से वित्तीय संचालन नहीं

नई योजना में मेटा प्रत्यक्ष रूप से वित्तीय संचालन नहीं संभालेगी। इसके बजाय तीसरे पक्ष की कंपनियां भुगतान संरचना, डिजिटल बटुआ और आरक्षित संपत्तियों का प्रबंधन करेंगी। इस रणनीति को नियामकीय जोखिम कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, भुगतान अवसंरचना उपलब्ध कराने वाली वैश्विक कंपनियों के साथ प्रारंभिक स्तर पर बातचीत चल रही है। यह मॉडल मेटा को तकनीकी मंच प्रदाता की भूमिका में रखेगा, जबकि वित्तीय जिम्मेदारी साझेदार संस्थाओं के पास रहेगी।

डिजिटल मुद्रा बाजार पहले से अधिक परिपक्व

डिजिटल मुद्रा बाजार भी अब पहले की तुलना में कहीं अधिक परिपक्व हो चुका है। कुछ वर्ष पहले जहां स्थिर मुद्राओं का कुल बाजार आकार अत्यंत सीमित था, वहीं वर्तमान में यह सैकड़ों अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है। साथ ही कई देशों में स्पष्ट नियम बनने से बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों की भागीदारी आसान हुई है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि मेटा की योजना सफल रहती है तो सामाजिक माध्यम मंच केवल संवाद का माध्यम नहीं रहेंगे, बल्कि वैश्विक डिजिटल व्यापार और भुगतान के प्रमुख केंद्र बन सकते हैं। विशेष रूप से छोटे व्यापारियों और स्वतंत्र सामग्री निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्राप्त करने में सुविधा मिल सकती है।

निष्कर्ष

मेटा की स्थिर मुद्रा आधारित वापसी केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने वाला कदम साबित हो सकती है। पिछली असफलता से सीख लेते हुए कंपनी इस बार नियंत्रित, साझेदारी आधारित और नियामक अनुकूल मॉडल अपना रही है। यदि यह प्रयास सफल हुआ, तो सामाजिक माध्यम और वित्तीय सेवाओं का संगम वैश्विक भुगतान प्रणाली को नई परिभाषा दे सकता है।

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