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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

विदेशी प्लेटफार्म पर छिपे लेनदेन भी अब आयकर विभाग की नजर में

भारत ने वैश्विक सूचना साझाकरण व्यवस्था से जुड़कर क्रिप्टो संपत्तियों पर निगरानी तेज कर दी है।

विदेशी प्लेटफार्म पर छिपे लेनदेन भी अब आयकर विभाग की नजर में
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भारत में क्रिप्टो संपत्तियों को लेकर कर पारदर्शिता का नया दौर शुरू हो गया है। हाल के विधायी बदलावों के माध्यम से सरकार ने ऐसी व्यवस्था लागू की है जिसके तहत डिजिटल संपत्तियों से जुड़े लेनदेन धीरे-धीरे वैश्विक कर सूचना प्रणाली का हिस्सा बन जाएंगे। इसका मतलब है कि विदेशी मंचों पर किए गए निवेश और व्यापार की जानकारी भी कर अधिकारियों तक पहुंच सकेगी।

अब तक क्रिप्टो बाजार को एक तरह से ‘नियामकीय धुंधला क्षेत्र’ माना जाता था। निवेशक अक्सर विदेश स्थित मंचों पर खाता खोलकर व्यापार करते थे और कई मामलों में ये लेनदेन भारतीय कर अधिकारियों की निगरानी से बाहर रहते थे। नई रिपोर्टिंग व्यवस्था का उद्देश्य इसी अपारदर्शिता को खत्म करना है।

वैश्विक ढांचे से जुड़ने की तैयारी

सरकार ने यह कदम आर्थिक सहयोग और विकास संगठन द्वारा विकसित वैश्विक क्रिप्टो संपत्ति रिपोर्टिंग ढांचे के अनुरूप उठाया है। इस ढांचे के तहत क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं को उपयोगकर्ताओं की कर निवास जानकारी, पहचान विवरण और लेनदेन का रिकॉर्ड जुटाकर संबंधित देश के कर प्राधिकरण को देना होगा। बाद में यह जानकारी विभिन्न देशों के बीच स्वचालित रूप से साझा की जाएगी।

इस व्यवस्था के लागू होने के बाद किसी भी देश के कर प्राधिकरण को अपने नागरिकों के विदेशी क्रिप्टो खातों और लेनदेन की जानकारी मिल सकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार इससे कर चोरी के जोखिम में कमी आएगी और डिजिटल संपत्तियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में शामिल करना आसान होगा।

आयकर नियमों में बड़े बदलाव

हाल ही में अधिसूचित आयकर संशोधन नियमों ने रिपोर्टिंग के दायरे को काफी बढ़ा दिया है। अब वित्तीय संस्थानों को पारंपरिक बैंक खातों के साथ-साथ क्रिप्टो संपत्तियों, केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा और कुछ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान उत्पादों से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी।

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इन संशोधनों के तहत ‘प्रासंगिक क्रिप्टो संपत्ति’ की परिभाषा भी स्पष्ट की गई है, जिसमें वे सभी डिजिटल टोकन शामिल हैं जिनका उपयोग निवेश या भुगतान के रूप में किया जा सकता है। साथ ही संस्थानों को खाते के प्रकार, स्थिति और स्व-प्रमाणीकरण जैसी अतिरिक्त सूचनाएं भी देनी होंगी।

विदेशी मंचों पर निवेश अब छिपाना मुश्किल

विश्लेषकों का मानना है कि इन नियमों के बाद विदेशी क्रिप्टो मंचों का उपयोग करके कर से बचने की संभावना कम हो जाएगी। पहले निवेशक ऐसे देशों के मंचों का उपयोग करते थे जहां कर नियम अपेक्षाकृत ढीले थे। लेकिन वैश्विक सूचना साझाकरण प्रणाली लागू होने के बाद यह डेटा संबंधित देशों के कर विभागों तक स्वतः पहुंच जाएगा।

भारत सरकार ने संकेत दिया है कि सीमा-पार क्रिप्टो लेनदेन की जानकारी साझा करने की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू होगी और आने वाले वर्षों में यह पूरी तरह सक्रिय हो सकती है। इस व्यवस्था के तहत विभिन्न देशों के कर विभाग नियमित रूप से डेटा का आदान-प्रदान करेंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर निगरानी मजबूत होगी।

निवेशकों के लिए क्या बदल सकता है

नए नियमों का असर सीधे तौर पर उन निवेशकों पर पड़ेगा जो डिजिटल संपत्तियों में सक्रिय हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अब लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड रखना और आयकर विवरण में सही जानकारी देना पहले से अधिक जरूरी हो जाएगा। भारत में पहले ही डिजिटल संपत्तियों से आय पर उच्च कर दर लागू है और लेनदेन पर स्रोत पर कर कटौती की व्यवस्था भी लागू की जा चुकी है। ऐसे में नई रिपोर्टिंग व्यवस्था कर अनुपालन को और कठोर बना सकती है।

निष्कर्ष

डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ क्रिप्टो संपत्तियों को पूरी तरह अनियंत्रित छोड़ना अब संभव नहीं रहा। वैश्विक सूचना साझाकरण ढांचा और नए आयकर नियम इस क्षेत्र को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

आने वाले वर्षों में यह व्यवस्था न केवल कर चोरी को सीमित करेगी, बल्कि क्रिप्टो बाजार को औपचारिक वित्तीय प्रणाली के अधिक करीब भी ले आएगी। हालांकि इसके साथ निवेशकों को अधिक जवाबदेही और नियमों के अनुपालन की नई चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा।

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