मध्य पूर्व के सबसे अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को लेकर एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक कदम सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों से 1 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से शुल्क लेने की तैयारी कर रहा है। खास बात यह है कि यह भुगतान पारंपरिक मुद्रा में नहीं बल्कि क्रिप्टोकरेंसी में करने की बात कही गई है।
इसका मतलब यह है कि अगर कोई बड़ा टैंकर करीब 20 लाख बैरल तेल लेकर गुजरता है, तो उसे लगभग 20 लाख डॉलर तक का भुगतान करना पड़ सकता है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में हालिया संघर्ष के बाद सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हुई है।
क्यों उठाया गया यह कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह फैसला केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि वैश्विक वित्तीय सिस्टम को दरकिनार करने की रणनीति भी हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते ईरान के लिए पारंपरिक बैंकिंग चैनलों का उपयोग सीमित है, ऐसे में क्रिप्टो भुगतान एक विकल्प के रूप में सामने आ रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, टैंकरों को पहले अपने कार्गो की जानकारी ईमेल के जरिए देनी होगी। इसके बाद ईरानी अधिकारी शुल्क तय करेंगे और भुगतान के निर्देश देंगे। भुगतान होने के बाद ही जहाज को आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी।
यह मॉडल एक तरह से डिजिटल भुगतान आधारित टोल सिस्टम है, जो पारंपरिक डॉलर आधारित व्यापार से अलग दिशा दिखाता है।
वैश्विक व्यापार और तेल कीमतों पर असर
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का शुल्क या बाधा सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार को प्रभावित कर सकती है।
हालिया घटनाओं के कारण पहले ही इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या काफी कम हो गई है। कई बड़ी शिपिंग कंपनियां जोखिम के कारण इस रास्ते से बच रही हैं।
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अगर यह टोल सिस्टम पूरी तरह लागू होता है, तो तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे शिपिंग लागत, बीमा प्रीमियम और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय नियमों पर उठे सवाल
ईरान के इस प्रस्ताव पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल भी उठ रहे हैं। समुद्री कानून के अनुसार, ऐसे महत्वपूर्ण जलमार्गों से गुजरने पर शुल्क लगाना विवादास्पद माना जाता है। कई देश इसे वैश्विक व्यापार के नियमों के खिलाफ मानते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मॉडल स्वीकार कर लिया जाता है, तो अन्य देश भी इसी तरह के कदम उठा सकते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है
फिलहाल यह योजना पूरी तरह लागू नहीं हुई है, लेकिन इसके संकेत ही बाजार में अनिश्चितता बढ़ाने के लिए काफी हैं। अगर ईरान इस टोल सिस्टम को सख्ती से लागू करता है, तो इसका असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
क्रिप्टो को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इस तरह इस्तेमाल करना एक नया प्रयोग माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अन्य देश और कंपनियां इस व्यवस्था को स्वीकार करती हैं या इसका विरोध बढ़ता है।
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