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Rajeev Ranjan Roy द्वारा लिखित ⁠, Staff Writer.Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षित ⁠, Staff Editor.

अगले वित्तीय वर्ष में भारत की वृद्धि 7% के आसपास रहने का अनुमान

ताजा खबरप्रकाशितFeb 27, 2026

EY रिपोर्ट के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में भारत की GDP वृद्धि 6.8–7.2% रह सकती है। कर सुधार और मजबूत घरेलू मांग आर्थिक विस्तार के प्रमुख आधार बनेंगे।

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भारत की अर्थव्यवस्था आगामी वित्तीय वर्ष में मजबूत गति बनाए रख सकती है और देश का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 6.8 से 7.2 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान व्यक्त किया गया है। ईवाई इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत मध्यम अवधि में स्थिर और संतुलित आर्थिक विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कर संग्रह और 2047 लक्ष्य

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को कर संग्रह अनुपात में उल्लेखनीय सुधार करना होगा।

बड़े कर सुधार लागू हो चुके हैं, इसलिए अब ध्यान कर अनुपालन बढ़ाने और कर आधार का विस्तार करने पर केंद्रित किया जाना आवश्यक है।

आयकर और GST में बदलाव का असर

वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान व्यक्तिगत आयकर तथा वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य आम नागरिकों की उपलब्ध आय में वृद्धि करना तथा निजी उपभोग को प्रोत्साहित करना रहा है। इससे घरेलू मांग मजबूत होने की संभावना व्यक्त की गई है, जो आर्थिक वृद्धि का प्रमुख चालक मानी जाती है।

हालांकि इन कर सुधारों के कारण केंद्र सरकार को कर राजस्व में कुछ त्याग भी करना पड़ा है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि सकल कर प्राप्तियां बजट अनुमान से कुछ कम रह सकती हैं। इसके बावजूद यह अपेक्षा जताई गई है कि सरकार निर्धारित राजकोषीय घाटा लक्ष्य को बनाए रखने में सफल रहेगी, जिससे वित्तीय अनुशासन कायम रहेगा।

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व्यापार समझौते और निवेश माहौल

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत ने प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं तथा क्षेत्रीय व्यापार समूहों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों का विस्तार किया है। इससे निर्यात अवसरों में वृद्धि होने के साथ निवेश वातावरण भी मजबूत हुआ है। इन कारकों ने देश की मध्यम अवधि की आर्थिक संभावनाओं को अधिक सकारात्मक बनाया है।

एक अन्य वैश्विक निवेश संस्था की संयुक्त आर्थिक सूचकांक रिपोर्ट में भी संकेत मिला है कि पिछले वर्ष की अंतिम तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार में क्रमिक सुधार देखा गया। त्योहारी मौसम के दौरान बढ़ी उपभोक्ता मांग तथा कर दरों में राहत का प्रभाव आर्थिक गतिविधियों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

सकारात्मक प्रवृत्ति के जारी रहने की संकेत

जनवरी 2026 से संबंधित प्रारंभिक आंकड़े भी इस सकारात्मक प्रवृत्ति के जारी रहने की ओर संकेत करते हैं। विश्लेषण के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू खपत, नियंत्रित महंगाई जोखिम और संतुलित व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के कारण स्थिर आधार पर खड़ी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचा निवेश, डिजिटल सेवाओं का विस्तार, विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन तथा ग्रामीण आय में सुधार जैसे तत्व आने वाले वर्षों में आर्थिक वृद्धि को अतिरिक्त समर्थन प्रदान करेंगे। साथ ही, वित्तीय क्षेत्र की मजबूती और सार्वजनिक निवेश कार्यक्रम भी विकास गति को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होंगे।

निष्कर्ष

समग्र रूप से आकलन यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी स्थिर वृद्धि की राह पर अग्रसर है। कर सुधारों, मजबूत घरेलू मांग, वित्तीय अनुशासन और निवेश विस्तार के संयुक्त प्रभाव से देश की अर्थव्यवस्था आगामी वित्तीय वर्ष में संतुलित और टिकाऊ विकास दर्ज कर सकती है।

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