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Pratik Bhuyan
लेखक: Pratik Bhuyanस्टाफ संपादक
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GainBitcoin घोटाले की जांच में बड़ी कार्रवाई, Darwin Labs के सह-संस्थापक गिरफ्तार

GainBitcoin क्रिप्टो घोटाले की जांच में सीबीआई ने Darwin Labs के सह-संस्थापक आयुष वर्ष्णेय को गिरफ्तार किया। मामला हजारों निवेशकों से जुड़े बहु-करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी से संबंधित है।

GainBitcoin घोटाले की जांच में बड़ी कार्रवाई, Darwin Labs के सह-संस्थापक गिरफ्तार
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भारत में लंबे समय से चल रही GainBitcoin क्रिप्टो घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक महत्वपूर्ण गिरफ्तारी की है। एजेंसी ने Darwin Labs प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक और मुख्य तकनीकी अधिकारी आयुष वर्ष्णेय को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि वह इस बहुचर्चित क्रिप्टो धोखाधड़ी मामले में अहम भूमिका निभाने वाले प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार वर्ष्णेय को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय रोका गया जब वह देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। उनके खिलाफ पहले ही लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था। आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लेकर सीबीआई को सौंप दिया, जिसके बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तारी की गई।

देश के सबसे बड़े क्रिप्टो घोटालों में से एक

GainBitcoin मामला भारत के सबसे बड़े कथित क्रिप्टो निवेश घोटालों में गिना जाता है। यह योजना वर्ष 2015 के आसपास शुरू हुई थी और निवेशकों को बिटकॉइन आधारित क्लाउड माइनिंग के नाम पर निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। योजना में निवेश करने वालों से कहा जाता था कि उन्हें हर महीने लगभग 10 प्रतिशत तक का रिटर्न मिल सकता है।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह मॉडल बाद में मल्टी लेवल मार्केटिंग संरचना में बदल गया, जिसमें पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से आने वाले धन से किया जाता था। जब नए निवेशकों की संख्या कम होने लगी तो भुगतान बिटकॉइन के बजाय एक आंतरिक टोकन में किया जाने लगा जिसकी कीमत काफी कम थी।

हजारों निवेशकों को हुआ नुकसान

सरकारी एजेंसियों के अनुसार इस योजना में हजारों निवेशक शामिल थे और कथित तौर पर बड़ी रकम का नुकसान हुआ। कुछ रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में लगभग 8,000 निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की आशंका है और कुल नुकसान करीब 6,600 करोड़ रुपये यानी लगभग 790 मिलियन डॉलर तक बताया गया है।

क्या आप जानते हैं: बिटकॉइन नेटवर्क ने बनाया 2 करोड़वां कॉइन, अब सिर्फ 10 लाख माइनिंग बाकी

जांचकर्ताओं का कहना है कि इस मामले की जड़ें भारत के शुरुआती क्रिप्टो निवेश दौर तक जाती हैं, जब डिजिटल संपत्तियों को लेकर जागरूकता कम थी और निवेशकों को बड़े रिटर्न का लालच देकर योजनाओं में शामिल किया जाता था।

तकनीकी ढांचे की भूमिका

सीबीआई का आरोप है कि Darwin Labs और उसके सह-संस्थापकों ने इस कथित योजना के तकनीकी ढांचे को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी के अनुसार कंपनी ने निवेश प्लेटफॉर्म, भुगतान प्रणाली और डिजिटल वॉलेट जैसे कई तकनीकी उपकरण तैयार किए थे जिनका उपयोग निवेशकों से धन जुटाने और प्रबंधन के लिए किया गया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि Darwin Labs ने MCAP नामक एक क्रिप्टो टोकन और उससे जुड़े स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के विकास में भी भूमिका निभाई थी। यह टोकन बाद में निवेशकों को भुगतान के लिए इस्तेमाल किया गया।

घोटाले का मुख्य चेहरा

GainBitcoin योजना को शुरू करने का श्रेय शुरुआती बिटकॉइन प्रचारक अमित भारद्वाज को दिया जाता है, जिन्होंने कथित तौर पर क्लाउड माइनिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेशकों को आकर्षित किया था। बाद में यह योजना विवादों में आ गई और कई राज्यों में इसके खिलाफ मामले दर्ज हुए।

अमित भारद्वाज की 2022 में मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके सहयोगियों और तकनीकी टीम के सदस्यों के खिलाफ जांच अभी भी जारी है।

जांच का दायरा बढ़ा

इस मामले में फरवरी 2025 में देशभर में बड़े स्तर पर छापेमारी की गई थी। जांच एजेंसियों ने कई स्थानों से डिजिटल साक्ष्य और क्रिप्टो संपत्तियां भी जब्त की थीं। इस केस में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है, जबकि मुख्य धोखाधड़ी और तकनीकी नेटवर्क की जांच सीबीआई कर रही है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि GainBitcoin जैसी घटनाएं निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी हैं। क्रिप्टो बाजार में निवेश के अवसरों के साथ जोखिम भी जुड़े होते हैं और अत्यधिक लाभ का वादा करने वाली योजनाओं से सावधान रहना जरूरी है।

सरकारी एजेंसियों का कहना है कि इस मामले की जांच जारी है और यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।

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