हैदराबाद में एक बड़े क्रिप्टो साइबर हमले का मामला सामने आया है। ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत एक टेक कंपनी ने साइबराबाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उसके डिजिटल वॉलेट में सेंध लगाकर हैकर्स ने लाखों रुपये के टोकन चुरा लिए। शुरुआती जांच के मुताबिक, कुल ₹38 लाख के टोकन निशाने पर थे, जिनमें से करीब ₹9 लाख के टोकन पहले ही बेचे जा चुके हैं।
कंपनी का प्रतिनिधि, जो हैदराबाद के गाचीबौली इलाके में रहता है, कंपनी के क्रिप्टो वॉलेट और उसके निजी एक्सेस को संभालता था। उसने सबसे पहले वॉलेट से हो रहे संदिग्ध लेनदेन को देखा। इसके बाद पता चला कि कंपनी के पास मौजूद 4.48 लाख यूटिलिटी टोकन को किसी अज्ञात व्यक्ति ने दूसरे वॉलेट में भेज दिया है।
जांच में सामने आया कि हैकर्स ने टोकन ट्रांसफर करने के बाद उन्हें एक क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए डाल दिया। इनमें से कुछ टोकन बिक भी गए, जिससे कंपनी को करीब ₹9 लाख का नुकसान हुआ। बाकी लगभग ₹29 लाख के टोकन समय रहते अस्थायी रूप से रोक दिए गए। हालांकि बाद में हमलावरों ने उन्हें कई अलग-अलग वॉलेट में भेज दिया, जिससे उन्हें ट्रैक करना और मुश्किल हो गया।
कैसे हुआ हमला? निजी कुंजी पर है शक
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला ब्लॉकचेन की तकनीकी कमजोरी की वजह से नहीं, बल्कि वॉलेट तक पहुंच रखने वाले निजी सिस्टम में सेंध लगने से हुआ। शुरुआती जांच में तीन संभावनाएं सामने आई हैं।
पहली, किसी तरह वॉलेट की निजी कुंजी यानी प्राइवेट की हैकर्स के हाथ लग गई। दूसरी, प्रतिनिधि को किसी फिशिंग लिंक या नकली वेबसाइट के जरिए फंसाया गया। तीसरी, किसी संदिग्ध स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट को अनुमति दे दी गई, जिससे वॉलेट पर नियंत्रण बाहर चला गया।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ निखिल तेजा गुर्रम ने कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि ब्लॉकचेन तकनीक कमजोर है, जबकि असली समस्या वॉलेट और एक्सेस कंट्रोल में होती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपनी निजी कुंजी, पासवर्ड या स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट की अनुमति सुरक्षित नहीं रखता, तो वॉलेट आसानी से हैक हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर क्रिप्टो हमले सीधे नेटवर्क पर नहीं होते, बल्कि किसी कर्मचारी, ईमेल, लिंक या नकली ऐप के जरिए किए जाते हैं। इसी वजह से ऐसे हमलों को रोकना मुश्किल होता जा रहा है।
भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं क्रिप्टो साइबर अपराध
यह अकेला मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों में भारत में क्रिप्टो से जुड़े कई बड़े साइबर अपराध सामने आए हैं। फरवरी 2026 में हैदराबाद पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने एक कारोबारी को नकली वेबसाइट के जरिए लगभग ₹19 करोड़ के USDT से ठग लिया था। आरोपी खुद को क्रिप्टो खरीदार बता रहे थे और उन्होंने पीड़ित को नकली KYC लिंक भेजा था। जैसे ही उसने लिंक खोला, उसके वॉलेट से पूरा पैसा दूसरे खाते में चला गया।
इसी तरह, तेलंगाना में हाल ही में ₹547 करोड़ के एक बड़े क्रिप्टो नेटवर्क का भी खुलासा हुआ था। जांच में पाया गया कि अपराधी गरीब लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर पैसे को USDT में बदलते थे और फिर उसे विदेशों तक पहुंचाते थे। इस पूरे नेटवर्क के तार कंबोडिया से जुड़े होने की बात सामने आई।
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विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में क्रिप्टो का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर ऐसे लोग ज्यादा निशाने पर हैं, जो बड़ी रकम को निजी वॉलेट में रखते हैं और सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन नहीं करते।
निवेशक कैसे बच सकते हैं?
इस घटना के बाद साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने निवेशकों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है। सबसे पहले, किसी भी क्रिप्टो वॉलेट की निजी कुंजी या रिकवरी शब्द कभी भी ऑनलाइन नहीं रखने चाहिए। इन्हें केवल ऑफलाइन और सुरक्षित जगह पर ही रखना चाहिए।
दूसरी बात, बड़े निवेश वाले वॉलेट में मल्टी-सिग्नेचर सुरक्षा और हार्डवेयर डिवाइस का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे कोई एक व्यक्ति अकेले वॉलेट से पैसा नहीं निकाल सकता। साइबर विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि किसी भी लिंक, ऐप या स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी देने से पहले उसकी पूरी जांच करनी चाहिए।
पुलिस अब इस मामले में इस्तेमाल हुए वॉलेट, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और आईपी पते की जांच कर रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि ब्लॉकचेन रिकॉर्ड की मदद से कुछ टोकन वापस लाए जा सकते हैं। लेकिन अब तक यह साफ हो चुका है कि क्रिप्टो निवेश में सिर्फ बाजार का जोखिम नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।
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