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Jai Singla द्वारा लिखितstaff editorPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितstaff editor

₹500 करोड़ क्रिप्टो घोटाला: ईडी ने मासूम जुनेजा को दबोचा

ताजा खबरेंप्रकाशितJun 16, 2026

हिमाचल प्रदेश के ₹500 करोड़ क्रिप्टो घोटाले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर छापेमारी की और मुख्य आरोपी मासूम जुनेजा को गिरफ्तार किया।

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हिमाचल प्रदेश में सामने आए कथित ₹500 करोड़ के क्रिप्टो घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर छापेमारी की और मुख्य आरोपी मासूम जुनेजा को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में फर्जी क्रिप्टो निवेश योजनाओं के जरिए लोगों से बड़ी रकम जुटाई गई और बाद में उसे विभिन्न माध्यमों से इधर-उधर किया गया।

यह मामला पिछले कुछ समय से हिमाचल प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें ऊंचे रिटर्न का लालच देकर डिजिटल परिसंपत्तियों में निवेश करवाया गया, लेकिन बाद में पैसे वापस नहीं मिले। ईडी अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि निवेशकों की रकम कहां और कैसे इस्तेमाल की गई।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्टों के अनुसार, यह कथित घोटाला क्रिप्टो निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर चलाया जा रहा था। आरोप है कि निवेशकों को कम समय में कई गुना रिटर्न का वादा किया जाता था। शुरुआत में कुछ लोगों को भुगतान भी किया गया, जिससे भरोसा बढ़ा और अधिक लोग इसमें जुड़ते गए। बाद में भुगतान रुक गया और निवेशकों ने शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दीं।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला हो सकता है, जिसमें बड़ी संख्या में निवेशकों को निशाना बनाया गया। ईडी की कार्रवाई से पहले स्थानीय पुलिस और अन्य एजेंसियां भी मामले की जांच कर रही थीं।

सूत्रों के मुताबिक, जांच में कई बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि क्या इस नेटवर्क के तार राज्य से बाहर या विदेशों तक जुड़े हुए हैं।

ईडी की छापेमारी और गिरफ्तारी

प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश और अन्य स्थानों पर कई परिसरों में तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान मासूम जुनेजा को गिरफ्तार किया गया, जिसे इस मामले का प्रमुख आरोपी बताया जा रहा है। ईडी का कहना है कि उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने कथित तौर पर कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल परिसंपत्तियों से जुड़े साक्ष्य जब्त किए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों से निवेशकों से जुटाई गई रकम के प्रवाह का पता लगाने में मदद मिलेगी।

ईडी की कार्रवाई के बाद मामले में और गिरफ्तारियों की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। एजेंसी अब उन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है जो इस नेटवर्क के संचालन, प्रचार या निवेश जुटाने में शामिल हो सकते हैं।

निवेशकों को कैसे बनाया गया शिकार?

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे घोटालों में अक्सर सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और रेफरल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है। लोगों को बताया जाता है कि क्रिप्टो निवेश से तेजी से मुनाफा कमाया जा सकता है और यदि वे नए निवेशक जोड़ेंगे तो उन्हें अतिरिक्त लाभ मिलेगा। यह मॉडल कई बार पोंजी या मल्टी लेवल मार्केटिंग जैसी संरचना का रूप ले लेता है।

क्रिप्टो परिसंपत्तियों की तकनीकी जटिलता का फायदा उठाकर निवेशकों को भ्रमित करना भी ऐसे मामलों की सामान्य रणनीति मानी जाती है। कई लोग बिना पूरी जानकारी के निवेश कर बैठते हैं और बाद में उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।

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वित्तीय विशेषज्ञ लगातार सलाह देते रहे हैं कि किसी भी निवेश योजना में अत्यधिक रिटर्न का वादा किया जाए तो सतर्क हो जाना चाहिए। खासकर जब योजना पारदर्शी न हो और कंपनी या मंच का नियामकीय दर्जा स्पष्ट न हो।

भारत में बढ़ रही है क्रिप्टो निगरानी

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत में क्रिप्टो लेनदेन और डिजिटल परिसंपत्तियों पर निगरानी लगातार बढ़ रही है। हाल ही में आयकर विभाग ने भी क्रिप्टो से जुड़ी अघोषित आय के मामलों में हजारों निवेशकों को नोटिस भेजे थे। सरकार और जांच एजेंसियां अब इस क्षेत्र में वित्तीय पारदर्शिता और अनुपालन पर ज्यादा जोर दे रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टो बाजार में बढ़ती भागीदारी के साथ धोखाधड़ी के मामले भी बढ़े हैं। इसलिए निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे केवल विश्वसनीय और पंजीकृत मंचों का उपयोग करें, निवेश से पहले पूरी जांच करें और किसी भी अनियमित योजना से दूरी बनाए रखें।

आगे क्या होगा?

ईडी की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कुल कितनी राशि जुटाई गई, कितने निवेशक प्रभावित हुए और धन को किन माध्यमों से स्थानांतरित किया गया।

फिलहाल मासूम जुनेजा की गिरफ्तारी को इस मामले में बड़ी प्रगति माना जा रहा है। लेकिन निवेशकों के लिए असली सवाल अब भी यही है कि उनकी फंसी हुई रकम वापस मिल पाएगी या नहीं। जांच के अगले चरण में संपत्तियों की पहचान और जब्ती की कार्रवाई भी अहम भूमिका निभा सकती है।

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