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Jai Singla द्वारा लिखितstaff editorPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितstaff editor

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नाम पर क्रिप्टो ठगी का जाल, नकली टिकट और फर्जी सट्टेबाजी से सावधान

ताजा खबरेंप्रकाशितJun 14, 2026

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के साथ क्रिप्टो ठगी के मामले बढ़ने लगे हैं। TRM Labs ने नकली टिकट वेबसाइटों, फर्जी सट्टेबाजी योजनाओं और धोखाधड़ी वाले भुगतान नेटवर्क को लेकर चेतावनी जारी की है।

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फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) की शुरुआत के साथ ही दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों के लिए एक नई चेतावनी सामने आई है। ब्लॉकचेन खुफिया कंपनी TRM Labs ने कहा है कि टूर्नामेंट के नाम पर कई तरह की क्रिप्टो आधारित धोखाधड़ी योजनाएं सक्रिय हो चुकी हैं। इनमें नकली टिकट बेचने वाली वेबसाइटें, फर्जी सट्टेबाजी योजनाएं और क्रिप्टो भुगतान के जरिए पैसा ऐंठने वाले नेटवर्क शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े खेल आयोजनों के दौरान साइबर अपराधी हमेशा सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन इस बार क्रिप्टो भुगतान प्रणालियों के इस्तेमाल ने ठगी के तरीकों को और जटिल बना दिया है। TRM Labs ने कई संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया है, जिनका संबंध कम से कम चार क्रिप्टो वॉलेट पतों से जोड़ा गया है।

फीफा के अनुमान के अनुसार, इस बार टूर्नामेंट को करीब 65 लाख दर्शक प्रत्यक्ष रूप से देख सकते हैं और इससे अरबों डॉलर की आर्थिक गतिविधि पैदा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में टिकट खरीद, यात्रा बुकिंग और सट्टेबाजी गतिविधियां धोखेबाजों के लिए बड़ा अवसर बन जाती हैं।

नकली टिकट वेबसाइटों का जाल

TRM Labs की रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं ने कम से कम दो ऐसी वेबसाइटों की पहचान की है जो खुद को आधिकारिक टिकट मंच जैसा दिखाकर लोगों को धोखा देने की कोशिश कर रही थीं। इन वेबसाइटों पर टिकट उपलब्ध होने का दावा किया जाता है और भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी मांगी जाती है। भुगतान होने के बाद या तो टिकट नहीं मिलते या फिर पूरी वेबसाइट गायब हो जाती है।

साइबर सुरक्षा एजेंसियों और अमेरिकी अधिकारियों ने भी पहले ही प्रशंसकों को चेतावनी दी थी कि वे केवल आधिकारिक माध्यमों से ही टिकट खरीदें। जांच एजेंसियों के अनुसार, अपराधी नकली टिकट, आतिथ्य पैकेज, स्मृति चिह्न और स्ट्रीमिंग सेवाओं के नाम पर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई नकली वेबसाइटें इतनी पेशेवर दिखती हैं कि आम उपयोगकर्ता के लिए असली और नकली में अंतर करना मुश्किल हो जाता है।

फिक्स्ड मैच और सट्टेबाजी के नाम पर धोखाधड़ी

रिपोर्ट में एक कथित "फिक्स्ड मैच" योजना का भी जिक्र किया गया है। इसमें लोगों को यह भरोसा दिलाया जाता है कि उनके पास किसी मैच के परिणाम की गोपनीय जानकारी है। इसके बदले निवेशकों से क्रिप्टो में भुगतान मांगा जाता है और बड़े मुनाफे का वादा किया जाता है।

विश्लेषकों के अनुसार, खेल सट्टेबाजी से जुड़े ऐसे घोटाले नए नहीं हैं, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी के कारण इनकी पहचान और धन की वापसी पहले से अधिक कठिन हो जाती है। कई मामलों में अपराधी ऐसे भुगतान माध्यम चुनते हैं जिन्हें वापस लेना लगभग असंभव होता है।

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सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति मैच परिणाम की गारंटी या तय जीत का दावा करता है, तो उसे संदेह की नजर से देखना चाहिए क्योंकि वैध सट्टेबाजी मंच कभी ऐसी गारंटी नहीं देते।

फर्जी क्रिप्टो टोकन भी बने खतरा

वर्ल्ड कप के नाम पर कई संदिग्ध क्रिप्टो टोकन भी इंटरनेट पर दिखाई देने लगे हैं। कुछ परियोजनाएं खुद को टूर्नामेंट से जुड़ा बताती हैं, जबकि उनका फीफा या किसी आधिकारिक साझेदार से कोई संबंध नहीं होता। इन टोकनों को तेज मुनाफे का लालच देकर प्रचारित किया जाता है।

साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि ऐसे टोकनों में निवेश करने वाले लोग अक्सर भारी नुकसान उठाते हैं। कई परियोजनाएं शुरुआती प्रचार के बाद गायब हो जाती हैं या निवेशकों का धन निकालकर बंद कर दी जाती हैं।

प्रशंसकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ल्ड कप से जुड़ी किसी भी सेवा का उपयोग करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है। टिकट खरीदते समय वेबसाइट का पता ध्यान से जांचना चाहिए और सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले आकर्षक प्रस्तावों से सावधान रहना चाहिए।

इसके अलावा, किसी भी अज्ञात व्यक्ति या मंच को क्रिप्टो भुगतान करने से पहले पूरी जांच करनी चाहिए। सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निजी वॉलेट की जानकारी, सुरक्षा कुंजी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधियों की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। ऐसे में प्रशंसकों के लिए उत्साह के साथ सतर्कता बनाए रखना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

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