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Rajeev Ranjan Roy द्वारा लिखितstaff writerPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितstaff editor

2025 में AI आधारित क्रिप्टो घोटाले 500 प्रतिशत से अधिक बढ़े

ताजा खबरेंप्रकाशितJan 30, 2026

2025 में क्रिप्टोकुरेंसी धोखाधड़ी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग पाँच गुना बढ़ गया, जिससे घोटालों की संख्या और पैमाना दोनों विस्तृत हुए।

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वर्ष 2025 में क्रिप्टोकुरेंसी क्षेत्र में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित धोखाधड़ी के मामलों में एक चौंका देने वाली वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 500 प्रतिशत अधिक थी। यह जानकारी टीआरएम लैब्स के 2026 क्रिप्टो क्राइम रिपोर्ट में सामने आई है, जिसमें विश्लेषण किया गया है कि किस प्रकार धोखेबाजों ने तकनीक का उपयोग कर लोगों को गुमराह किया।

रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष लगभग 35 अरब डॉलर की क्रिप्टो संपत्ति धोखेबाजों के पते पर भेजी गई थी। हालांकि यह संख्या 2024 के 38 अरब डॉलर की तुलना में थोड़ी कम थी, पर एआई आधारित धोखाधड़ी की तीव्रता और जटिलता दोनों में भारी वृद्धि देखी गई है।

एआई तकनीक

विशेषज्ञों ने बताया है कि एआई तकनीक जैसे कि बड़े भाषा मॉडल, डीपफेक वीडियो, ध्वनि नकल (वॉइस क्लोनिंग) और स्वचालित संदेश प्रणालियाँ का इस्तेमाल धोखाधड़ी को और अधिक विश्वसनीय तथा प्रभावी बनाने में किया जा रहा है। इन तकनीकों की मदद से धोखेबाज अलग-अलग भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों में आसानी से फंसाने वाली चालें चला रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि धोखाधड़ी अब केवल एक साधारण झांसा नहीं रह गई है, बल्कि यह एक औद्योगिक रूप से संगठित अभियान जैसा बन गया है। धोखेबाज अब कई चरणों वाली योजनाएं अपनाते हैं, जिनमें शुरू में वे किसी व्यक्ति से विश्वास स्थापित करते हैं, फिर नकली निवेश योजनाओं के जाल में फँसाते हैं और अंत में विभिन्न प्रकार के झूठे शुल्क या कर भुगतान मांगते हैं।

प्रशिक्षण जैसी सेवाओं की आपूर्ति

विश्लेषकों का कहना है कि धोखाधड़ी नेटवर्क में तकनीकी सहायता, उपकरण और प्रशिक्षण जैसी सेवाओं की आपूर्ति भी हो रही है, जो अपराधियों को कम लागत में अधिक लोगों को निशाना बनाने में सक्षम बनाती हैं। इस प्रकार की सेवाएँ, जिसे कभी डार्क वेब पर उपलब्ध कराई जाती हैं, धोखेबाज़ों के लिए “एआई-एज़-ए-सर्विस” उपकरणों तक पहुँच प्रदान करती है।

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विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि एआई तकनीक का इस्तेमाल अब सिर्फ सोशल इंजीनियरिंग या सामान्य फिशिंग तक सीमित नहीं है। यह आज रोमांस स्कैम, नकली निवेश योजनाएँ और झूठे कर भुगतान की माँग जैसे कई चरणों वाली धोखाधड़ी रणनीतियों में गहराई से सम्मिलित हो चुकी है, जिससे निवेशकों के लिए पैसों को सुरक्षित रखना कठिन होता जा रहा है।

डीपफेक वीडियो कॉल

कई मामलों में धोखेबाज़ों ने वीडियो कॉल, संदेश, और नकली प्रोफाइल का उपयोग यह दिखाने के लिए किया है कि वे वास्तविक व्यक्ति या प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े हुए हैं। उदाहरण के लिए, कुछ हैकिंग समूहों ने डीपफेक वीडियो कॉल के जरिये क्रिप्टो उद्योग के विशेषज्ञों के संवेदनशील डेटा चुराने का भी प्रयास किया है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मानें तो एआई तकनीक के आधुनिकीकरण के साथ, धोखाधड़ी के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। पुराने तरीके जैसे सामान्य फिशिंग या नकली वेबसाइटों पर आधारित हैकिंग की जगह अब ऐसे ज्यादातर अभियान हो रहे हैं जो उपयोगकर्ताओं को भावनात्मक रूप से और तकनीकी रूप से गुमराह करते हैं।

निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि नकली पहचान, छवि और ध्वनि की मदद से फँसाने वाले मामलों का स्तर और भी अधिक बढ़ा है, जिससे शिकार होने वाले निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस खतरे से निपटने के लिए तकनीकी उपायों के साथ-साथ जागरूकता और सतर्कता बेहद आवश्यक है।

निष्कर्ष

क्रिप्टोकुरेंसी दुनिया में एआई आधारित धोखाधड़ी का बढ़ता हुआ चलन एक गंभीर चेतावनी है। तेज़ी से विकसित होने वाली तकनीक के कारण धोखेबाज़ अब और अधिक विश्वसनीय, व्यापक और रणनीतिक रूप से तैयार अभियान चला रहे हैं। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे सतर्क रहें, किसी भी निवेश से पहले पूर्ण जांच करें और हमेशा सुरक्षित संचार तथा लेन-देनों के तरीकों को अपनाएँ। ऐसी परिस्थितियों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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