
Tokenization से DeFi को बूस्ट, 2030 तक $2.7 ट्रिलियन का अनुमान
स्टैंडर्ड चार्टर्ड की नई रिपोर्ट के अनुसार, टोकनाइजेशन की बढ़ती रफ्तार के चलते 2030 तक डीफाई बाजार में लॉक परिसंपत्तियों का मूल्य $2.7 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है।

क्रिप्टो बाजार में लंबे समय से चर्चा का विषय रही tokenization तकनीक अब मुख्यधारा के वित्तीय क्षेत्र में भी तेजी से जगह बना रही है। इसी बीच वैश्विक बैंकिंग समूह स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने एक नई रिपोर्ट में दावा किया है कि tokenization की बढ़ती मांग आने वाले वर्षों में विकेंद्रीकृत वित्त यानी DeFi क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। बैंक का अनुमान है कि 2030 तक DeFi मंचों में लॉक कुल परिसंपत्तियों का मूल्य बढ़कर करीब 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान स्तर की तुलना में यह लगभग 37 गुना वृद्धि होगी। बैंक का मानना है कि इस विस्तार के पीछे सबसे बड़ा कारण वास्तविक दुनिया की संपत्तियों का डिजिटल टोकनों में बदलना और उनका ब्लॉकचेन आधारित वित्तीय प्रणालियों में उपयोग होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो DeFi केवल क्रिप्टो निवेशकों तक सीमित क्षेत्र नहीं रहेगा, बल्कि पारंपरिक वित्तीय बाजारों का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
क्या है tokenization और क्यों बढ़ रही इसकी मांग?
Tokenization वह प्रक्रिया है जिसमें किसी वास्तविक संपत्ति को डिजिटल टोकन के रूप में ब्लॉकचेन पर दर्ज किया जाता है। इसमें शेयर, बॉन्ड, मनी मार्केट फंड, रियल एस्टेट और अन्य वित्तीय संपत्तियां शामिल हो सकती हैं। इसके जरिए इन परिसंपत्तियों की खरीद, बिक्री और हस्तांतरण अधिक तेज और पारदर्शी तरीके से किया जा सकता है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड के अनुसार, अभी टोकनाइज्ड परिसंपत्तियों का केवल छोटा हिस्सा ही DeFi मंचों में इस्तेमाल हो रहा है। फिलहाल लगभग 3.5 प्रतिशत टोकनाइज्ड परिसंपत्तियां DeFi प्रणाली में सक्रिय हैं, लेकिन 2030 तक यह हिस्सा बढ़कर करीब 30 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
यही बदलाव DeFi बाजार में बड़े पैमाने पर नई पूंजी ला सकता है। बैंक का मानना है कि जैसे-जैसे अधिक वित्तीय संस्थान अपनी परिसंपत्तियों को ब्लॉकचेन पर लाएंगे, DeFi मंचों की उपयोगिता और मांग दोनों बढ़ेंगी।
वास्तविक दुनिया की संपत्तियां बन सकती हैं वृद्धि का आधार
रिपोर्ट में विशेष रूप से वास्तविक दुनिया की संपत्तियों को DeFi के अगले विकास चरण का प्रमुख चालक बताया गया है। इसमें सरकारी प्रतिभूतियां, शेयर, निवेश फंड और अन्य वित्तीय उत्पाद शामिल हैं जिन्हें डिजिटल टोकनों में बदला जा सकता है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड पहले भी अनुमान लगा चुका है कि 2028 तक टोकनाइज्ड परिसंपत्तियों का कुल मूल्य 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। बैंक का मानना है कि इन परिसंपत्तियों का बड़ा हिस्सा अंततः DeFi मंचों में उपयोग होगा, जिससे ऋण, व्यापार और अन्य वित्तीय सेवाओं का विस्तार होगा।
हाल के महीनों में कई बड़े वित्तीय संस्थान भी इस क्षेत्र में सक्रिय हुए हैं। ब्लैकरॉक, ओकेएक्स और स्टैंडर्ड चार्टर्ड जैसे संस्थानों ने टोकनाइज्ड परिसंपत्तियों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नई पहल शुरू की हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि पारंपरिक वित्तीय जगत अब इस तकनीक को केवल प्रयोग के रूप में नहीं बल्कि भविष्य के बुनियादी ढांचे के रूप में देखने लगा है।
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DeFi को कैसे मिलेगा फायदा?
DeFi मंचों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां लेनदेन और वित्तीय सेवाएं बिना पारंपरिक मध्यस्थों के संचालित की जा सकती हैं। इससे लागत कम हो सकती है और प्रक्रियाएं अधिक तेज हो सकती हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि जब टोकनाइज्ड परिसंपत्तियां DeFi मंचों पर आएंगी, तब निवेशकों के लिए नई संभावनाएं खुलेंगी। एक ही डिजिटल परिसंपत्ति को निवेश, ऋण और अन्य वित्तीय गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यही विशेषता DeFi को पारंपरिक वित्तीय प्रणालियों से अलग बनाती है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि केवल tokenization से सफलता की गारंटी नहीं मिलती। इसके लिए बेहतर नियामकीय ढांचा, सुरक्षित तकनीकी व्यवस्था और पर्याप्त बाजार तरलता भी जरूरी होगी।
आने वाले वर्षों में क्या बदल सकता है?
स्टैंडर्ड चार्टर्ड की रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब दुनिया भर में डिजिटल परिसंपत्तियों को लेकर रुचि बढ़ रही है। कई देशों में नियामकीय स्पष्टता बढ़ रही है और बड़े वित्तीय संस्थान ब्लॉकचेन आधारित सेवाओं में निवेश कर रहे हैं।
यदि tokenization का विस्तार मौजूदा रफ्तार से जारी रहता है, तो 2030 तक DeFi बाजार आज की तुलना में पूरी तरह अलग दिखाई दे सकता है। उस समय यह केवल क्रिप्टो परिसंपत्तियों का मंच नहीं होगा, बल्कि वास्तविक दुनिया की संपत्तियों और पारंपरिक वित्तीय उत्पादों के लिए भी एक महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचा बन सकता है।
फिलहाल निवेशकों और उद्योग जगत की नजर इस बात पर है कि क्या tokenization वास्तव में वित्तीय बाजारों को बदलने में सफल होता है। लेकिन इतना तय है कि यह तकनीक अब प्रयोग के दौर से आगे बढ़कर वैश्विक वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है।
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