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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत में क्रिप्टो का बड़ा दांव, CEX Inflows में Singapore और Australia को पीछे छोड़ा

बाजारप्रकाशित2 अक्टू॰ 2026

भारत ने केंद्रीकृत क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए $88.4 बिलियन की गतिविधि के साथ Singapore और Australia को पीछे छोड़ा। जानिए भारतीय क्रिप्टो बाजार में विदेशी एक्सचेंजों की हिस्सेदारी क्यों ज्यादा है।

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भारत में क्रिप्टो बाजार को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। देश की कुल क्रिप्टो गतिविधि में गिरावट के बावजूद भारतीय यूजर्स केंद्रीकृत क्रिप्टो एक्सचेंजों पर लगातार सक्रिय हैं। Chainalysis के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच भारत में केंद्रीकृत एक्सचेंजों के जरिए $88.4 बिलियन की क्रिप्टो गतिविधि दर्ज हुई।

इस आंकड़े के साथ भारत Central and Southeast Asia and Oceania यानी CSAO क्षेत्र में केंद्रीकृत एक्सचेंजों के जरिए सबसे ज्यादा क्रिप्टो गतिविधि वाला बाजार बन गया है। Singapore $82.3 बिलियन के साथ दूसरे और Australia $79.3 बिलियन के साथ तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि, कुल क्रिप्टो अर्थव्यवस्था के मामले में तस्वीर अलग है।

कुल क्रिप्टो बाजार में भारत की गतिविधि घटी

Chainalysis के अनुसार, जुलाई 2025 से जून 2026 के दौरान भारत में कुल क्रिप्टो गतिविधि करीब $135 बिलियन रही। यह पिछले साल की तुलना में 14.7% कम है। इस गिरावट के बावजूद भारत CSAO क्षेत्र की तीसरी सबसे बड़ी क्रिप्टो अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

कुल गतिविधि के मामले में Singapore सबसे आगे रहा, जहां करीब $284 बिलियन की क्रिप्टो गतिविधि दर्ज हुई। Australia $173.1 बिलियन के साथ दूसरे स्थान पर रहा। भारत की कुल गतिविधि इन दोनों से कम रही, लेकिन केंद्रीकृत एक्सचेंजों पर भारतीय यूजर्स की सक्रियता दोनों देशों से आगे निकल गई।

यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि भारत में क्रिप्टो का इस्तेमाल मुख्य रूप से निवेश के लिए किया जा रहा है। CoinSwitch के सह-संस्थापक Ashish Singhal के मुताबिक, भारतीय यूजर्स मुख्य तौर पर डिजिटल संपत्तियों को खरीदने, रखने और बेचने के लिए क्रिप्टो बाजार में आते हैं।

भारतीय निवेशकों का रुख बदल रहा है

भारत के क्रिप्टो बाजार में सिर्फ युवा निवेशक ही नहीं हैं। Chainalysis के मुताबिक, 35 साल से ज्यादा उम्र के निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ रही है। इनमें कुछ ऐसे निवेशक शामिल हैं जिनके पास पहले से बड़े निवेश पोर्टफोलियो हैं।

Mudrex के CEO Edul Patel ने भी निवेशकों के व्यवहार में बदलाव की ओर इशारा किया है। उनके मुताबिक, कुछ निवेशक पहले की तरह तेजी से खरीद-बिक्री करने के बजाय क्रिप्टो को लंबे समय तक रखने पर ध्यान दे रहे हैं। यानी निवेश का नजरिया छोटी अवधि के मुनाफे से बढ़कर पोर्टफोलियो में डिजिटल संपत्तियों को शामिल करने की तरफ जा रहा है।

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यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारतीय निवेशक पहले से ही शेयर, सोना और म्यूचुअल फंड जैसे पारंपरिक विकल्पों में पैसा लगाते हैं। क्रिप्टो अब कुछ निवेशकों के लिए इसी पोर्टफोलियो का एक अतिरिक्त हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।

भारत में Local Exchanges की हिस्सेदारी बेहद कम

आंकड़ों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतना बड़ा क्रिप्टो कारोबार भारतीय एक्सचेंजों के बजाय विदेशी प्लेटफॉर्म पर क्यों हो रहा है। Chainalysis के अनुसार, ताजा अवधि में भारत के घरेलू एक्सचेंजों की हिस्सेदारी कुल केंद्रीकृत एक्सचेंज गतिविधि में सिर्फ 0.7% रही। CSAO के बाकी बाजारों में घरेलू एक्सचेंजों की औसत हिस्सेदारी करीब 7% थी।

इसका एक बड़ा कारण भारत की कर व्यवस्था माना जाता है। देश में क्रिप्टो से होने वाले लाभ पर 30% टैक्स और पात्र लेनदेन पर 1% TDS लागू है। उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि घरेलू एक्सचेंजों पर नियमों का पूरी तरह पालन करने के कारण विदेशी प्लेटफॉर्म की तुलना में भारतीय निवेशकों की लागत बढ़ सकती है।

हालांकि, सरकार और नियामक संस्थाएं विदेशी प्लेटफॉर्म और क्रिप्टो लेनदेन पर निगरानी बढ़ा रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में घरेलू और विदेशी एक्सचेंजों के बीच प्रतिस्पर्धा पर नियमों का असर महत्वपूर्ण हो सकता है।

भारत के क्रिप्टो बाजार के लिए आगे की चुनौती

भारत में $88.4 बिलियन का CEX inflow बताता है कि ऊंचे टैक्स और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद डिजिटल संपत्तियों में घरेलू रुचि बनी हुई है। लेकिन घरेलू एक्सचेंजों की सिर्फ 0.7% हिस्सेदारी यह भी दिखाती है कि इस गतिविधि का बड़ा हिस्सा देश के बाहर के प्लेटफॉर्म पर हो रहा है।

यही भारत के क्रिप्टो बाजार की सबसे बड़ी चुनौती है। बाजार में मांग मौजूद है, लेकिन उसका कितना हिस्सा विनियमित घरेलू व्यवस्था के भीतर आता है, यह अभी बड़ा सवाल है। अगर भारतीय निवेशकों की बढ़ती क्रिप्टो गतिविधि घरेलू प्लेटफॉर्म और स्पष्ट नियामकीय ढांचे की ओर आती है, तो इससे देश के डिजिटल एसेट उद्योग को भी बड़ा आधार मिल सकता है।

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यह लेख Cointelegraph की Editorial Policy के अनुसार तैयार किया गया है और केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह निवेश सलाह या अनुशंसाएं नहीं है। सभी निवेश और व्यापार में जोखिम होता है; पाठकों को स्वतंत्र शोध करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

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