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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

Bitcoin Mining पर AI का बढ़ता दबाव, Vitalik ने बताया क्यों मुश्किल में आ सकते हैं माइनर्स

ताजा खबरेंप्रकाशित18 अक्टू॰ 2026

Vitalik Buterin के अनुसार Bitcoin माइनिंग में बिजली और हार्डवेयर का खर्च लगभग बराबर है, जबकि AI मॉडल चलाने में हार्डवेयर की भूमिका अधिक है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता कारोबार अब Bitcoin माइनिंग के लिए नई चुनौती बन सकता है। Ethereum के सह-संस्थापक Vitalik Buterin के मुताबिक, Bitcoin माइनिंग और AI के जरिए जानकारी तैयार करने वाली तकनीक में एक बड़ा अंतर है। Bitcoin माइनिंग में बिजली और कंप्यूटर उपकरणों पर होने वाला खर्च लगभग बराबर होता है, जबकि AI मॉडल चलाने में महंगे कंप्यूटर चिप और हार्डवेयर की लागत ज्यादा अहम होती है।

यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Bitcoin माइनिंग कंपनियां और AI कंपनियां तेजी से एक ही तरह के संसाधनों, खासकर बिजली और डेटा सेंटर की जगह, के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। अगर AI कंपनियां ज्यादा बिजली की कीमत चुकाने में सक्षम रहीं, तो महंगे बिजली क्षेत्रों में Bitcoin माइनर्स के लिए कारोबार करना मुश्किल हो सकता है।

Bitcoin माइनिंग में कहां होता है सबसे ज्यादा खर्च?

Bitcoin माइनिंग में शक्तिशाली कंप्यूटर लगातार जटिल गणनाएं करते हैं। इसके जरिए लेनदेन की पुष्टि होती है और नए Bitcoin पाने का मौका मिलता है। इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। साथ ही, माइनिंग के लिए खास तरह के कंप्यूटर, कूलिंग सिस्टम और बिजली से जुड़े उपकरण भी लगाने पड़ते हैं।

Buterin ने सोशल मीडिया मंच X पर साझा किए गए आंकड़ों के जरिए बताया कि एक Bitcoin के उत्पादन की अनुमानित लागत करीब $93,700 बैठती है। इस गणना में मशीनों को चलाने के लिए सीधे इस्तेमाल होने वाली बिजली की लागत करीब $40,600 है, जबकि अन्य बिजली खर्च लगभग $2,400 है।

इसके अलावा कंप्यूटर उपकरण, कूलिंग और बिजली व्यवस्था पर पूंजीगत खर्च करीब $37,600 बताया गया है। बाकी रकम कर्मचारियों, जगह के किराए, रखरखाव, बीमा, कर और इंटरनेट जैसी जरूरतों पर खर्च होती है।

इस अनुमान के अनुसार, बिजली और कंप्यूटर उपकरण मिलकर Bitcoin माइनिंग की कुल लागत का बड़ा हिस्सा बनाते हैं। हालांकि, वास्तविक लागत हर कंपनी के लिए अलग हो सकती है। बिजली की दर, मशीनों की क्षमता, वित्तपोषण और माइनिंग की कठिनाई इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।

AI कंपनियों को मिल सकता है बिजली की कीमत का फायदा

Buterin के अनुसार, AI मॉडल से जवाब तैयार करने की प्रक्रिया, जिसे AI इन्फरेंस कहा जाता है, में खर्च का बड़ा हिस्सा कंप्यूटर हार्डवेयर पर आता है। इसके मुकाबले बिजली की लागत का अनुपात Bitcoin माइनिंग से कम हो सकता है।

इसका मतलब है कि AI कंपनियां कुछ परिस्थितियों में महंगी बिजली का खर्च भी सहन कर सकती हैं, जबकि माइनर्स के मुनाफे पर बिजली की कीमत बढ़ने का सीधा असर पड़ सकता है।

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यही वजह है कि AI कंपनियां बड़े डेटा सेंटर बनाने और बिजली की उपलब्धता सुरक्षित करने के लिए तेजी से निवेश कर रही हैं। दूसरी ओर, कुछ Bitcoin माइनिंग कंपनियों के पास पहले से बिजली की मंजूरी, ग्रिड से जुड़ाव और डेटा सेंटर चलाने के लिए जरूरी जगह मौजूद है। AI उद्योग की बढ़ती मांग इन संसाधनों को और मूल्यवान बना सकती है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर AI कंपनी माइनर्स से बेहतर स्थिति में होगी। AI हार्डवेयर महंगा है और उसकी उपलब्धता भी चुनौती बन सकती है। माइनिंग कंपनियों को भी सस्ती बिजली और कुशल मशीनों के जरिए प्रतिस्पर्धी बने रहने का मौका मिलता है।

क्या AI के कारण Bitcoin माइनिंग बंद हो सकती है?

AI और Bitcoin माइनिंग के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से यह सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ माइनिंग कंपनियां अपने डेटा सेंटर AI कंपनियों को किराए पर देने या अपना कारोबार बदलने का फैसला कर सकती हैं।

यदि किसी स्थान पर बिजली महंगी है और AI कंपनियां वहां ज्यादा भुगतान करने को तैयार हैं, तो माइनिंग की तुलना में डेटा सेंटर को AI के लिए इस्तेमाल करना अधिक लाभदायक हो सकता है। इससे कुछ क्षेत्रों में Bitcoin माइनिंग की क्षमता घट सकती है।

दूसरी ओर, कुछ कंपनियां दोनों क्षेत्रों को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। क्रिप्टो उद्योग के कुछ कारोबारी ऐसे मॉडल विकसित करना चाहते हैं जिनमें कंप्यूटर की गणना करने की क्षमता का इस्तेमाल AI सेवाओं के लिए भी किया जा सके। इससे मशीनों और बिजली के उपयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

Bitcoin की कीमत और माइनर्स के मुनाफे पर क्या असर पड़ेगा?

Buterin के साझा किए गए लागत अनुमान में एक Bitcoin के उत्पादन का कुल खर्च करीब $93,700 था। यह अनुमान उस समय Bitcoin की बाजार कीमत से अधिक था, जिससे संकेत मिलता है कि औसत माइनर के लिए सभी खर्च निकालना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, यह एक अनुमानित लागत मॉडल है और हर माइनिंग कंपनी की स्थिति एक जैसी नहीं होती।

अगर Bitcoin की कीमत बढ़ती है या माइनर्स को सस्ती बिजली मिलती है, तो उनकी वित्तीय स्थिति सुधर सकती है। इसके विपरीत, बिजली महंगी होने और माइनिंग से मिलने वाले पुरस्कार का मूल्य घटने पर कंपनियों का मुनाफा दबाव में आ सकता है।

फिलहाल AI और Bitcoin माइनिंग के बीच प्रतिस्पर्धा का परिणाम तय नहीं है। लेकिन बिजली, कंप्यूटर उपकरण और पूंजी जुटाने की क्षमता आने वाले समय में दोनों उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण होगी। माइनर्स के लिए सस्ती ऊर्जा उनकी बड़ी ताकत बनी रह सकती है, जबकि AI कंपनियों को महंगे हार्डवेयर में निवेश से लाभ मिल सकता है।

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