
RBI ने फिर उठाई क्रिप्टो बैन की मांग, बैंकों को डिजिटल संपत्तियों से दूर रहने की सलाह
RBI ने कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी पर रोक और बैंकों को डिजिटल संपत्तियों से दूर रखने की मांग दोहराई है। जानिए भारत में क्रिप्टो निवेश, टैक्स अनुपालन और पूंजी बाहर जाने की चिंताओं से जुड़ी पूरी खबर।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर नियामकीय अनिश्चितता एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही है। भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी पर रोक लगाने और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों को डिजिटल संपत्तियों से पूरी तरह दूर रखने की मांग दोहराई है। दूसरी ओर, आयकर विभाग के आंकड़ों में क्रिप्टो लेनदेन की जानकारी छिपाने और कर नियमों का पालन नहीं करने के मामले सामने आए हैं।
CoinMarketCap की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 तक भारत में करीब 3.9 करोड़ क्रिप्टो निवेशक थे। इन निवेशकों के पास लगभग $2.1 बिलियन मूल्य की डिजिटल संपत्तियां होने का अनुमान है। यह आंकड़ा बताता है कि स्पष्ट नियमों की कमी के बावजूद देश में क्रिप्टो का इस्तेमाल बड़े स्तर पर जारी है।
RBI चाहता है बैंकों से पूरी दूरी
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI से जुड़े दस्तावेजों में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को क्रिप्टोकरेंसी रखने, खरीदने-बेचने या किसी भी तरह का संपर्क रखने से रोकने की बात कही गई है। केंद्रीय बैंक की चिंता यह है कि डिजिटल संपत्तियों में अचानक गिरावट आने पर उसका असर पारंपरिक वित्तीय व्यवस्था पर पड़ सकता है।
RBI का मानना है कि क्रिप्टो बाजार और बैंकिंग व्यवस्था के बीच स्पष्ट दूरी बनाए रखना जरूरी है। इससे क्रिप्टो में होने वाले नुकसान का असर बैंकों, जमाकर्ताओं और वित्तीय स्थिरता तक पहुंचने से रोका जा सकता है।
केंद्रीय बैंक ने स्थिर मुद्रा यानी स्टेबलकॉइन को लेकर भी चिंता जताई है। अमेरिकी मुद्रा से जुड़ी स्टेबलकॉइन के बढ़ते इस्तेमाल से लोगों के पास विदेशी मुद्रा आधारित संपत्तियां बढ़ सकती हैं। इससे देश की मौद्रिक व्यवस्था पर दबाव पड़ने की आशंका है। वहीं, रुपये से जुड़ी स्टेबलकॉइन को लेकर RBI का कहना है कि इससे सरकार को मुद्रा जारी करने से मिलने वाली आय प्रभावित हो सकती है।
टैक्स नियमों के पालन में बड़ी कमी
क्रिप्टो पर सख्त रुख का एक बड़ा कारण कर अनुपालन में सामने आई कमी भी है। रिपोर्ट में Reuters के हवाले से बताया गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 में क्रिप्टो लेनदेन करने वाले 6.45 लाख लोगों में से 25% से भी कम ने अपनी आयकर रिटर्न में इससे होने वाले लाभ की जानकारी दी।
आयकर विभाग को कुछ मामलों में ऐसी जानकारी भी मिली जिसमें लोगों ने अपनी क्रिप्टो होल्डिंग या लेनदेन का गलत विवरण दिया था। विदेशी एक्सचेंजों, निजी वॉलेट और रुपये आधारित सीधे लेनदेन के जरिए होने वाली गतिविधियों को ट्रैक करना विभाग के लिए मुश्किल बना हुआ है।
भारत में क्रिप्टो से होने वाले लाभ पर 30% कर और लेनदेन पर 1% स्रोत पर कर कटौती का प्रावधान है। हालांकि, उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इन नियमों के कारण छोटे निवेशकों और घरेलू कारोबारियों के लिए काम करना कठिन हो गया है।
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पूंजी बाहर जाने का भी डर
RBI और सरकार की चिंता केवल कर चोरी तक सीमित नहीं है। भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर है और देश के चालू खाते पर भी दबाव बना रहता है। ऐसे समय में क्रिप्टो के जरिए देश से पूंजी बाहर जाने की आशंका बढ़ सकती है।
पीयर-टू-पीयर लेनदेन और विदेशी मंचों के माध्यम से होने वाली क्रिप्टो खरीद-बिक्री पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से बाहर रह सकती है। इससे अधिकारियों के लिए यह पता लगाना कठिन हो जाता है कि कितना पैसा देश से बाहर जा रहा है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से हो रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान से जुड़े तनाव और तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये पर दबाव बढ़ने के दौरान भी पूंजी प्रवाह को लेकर चिंता सामने आई थी। ऐसे माहौल में RBI क्रिप्टो को संभावित पूंजी निकासी के एक अतिरिक्त रास्ते के रूप में देख रहा है।
सरकार का रुख अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं
भारत सरकार ने अब तक क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण रोक लगाने का कोई नया कानून संसद में पारित नहीं किया है। 2021 में निजी क्रिप्टोकरेंसी पर रोक लगाने से जुड़ा एक मसौदा सामने आया था, लेकिन उसे आगे नहीं बढ़ाया गया। इसके बाद से सरकार का रुख समय-समय पर बदलता रहा है।
एक ओर सरकार क्रिप्टो लेनदेन पर कर वसूल रही है और डिजिटल संपत्तियों से जुड़े कारोबार पर धनशोधन रोधी नियम लागू कर चुकी है। दूसरी ओर, RBI अब भी क्रिप्टो को वित्तीय स्थिरता, मौद्रिक नियंत्रण और पूंजी प्रवाह के लिए जोखिम मानता है।
इस स्थिति में भारत का क्रिप्टो बाजार एक ऐसे क्षेत्र में काम कर रहा है जहां निवेश पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन स्पष्ट कानूनी सुरक्षा भी उपलब्ध नहीं है। आने वाले समय में सरकार को यह तय करना होगा कि वह क्रिप्टो पर पूर्ण रोक लगाती है, कड़े नियम बनाती है या नियंत्रित व्यवस्था के तहत इसके कारोबार की अनुमति देती है।
फिलहाल RBI का रुख बताता है कि भारत में क्रिप्टो को लेकर सख्ती कम नहीं हुई है। वहीं, करोड़ों निवेशकों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि केवल रोक या कड़े कर नियमों से इस बाजार को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होगा।
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