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Rajeev Ranjan Roy द्वारा लिखितस्टाफ लेखकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

RBI का बड़ा संकेत, स्टेबलकॉइन के मुकाबले CBDC को प्राथमिकता

ताजा खबरेंप्रकाशित2 जन॰ 2026

RBI ने अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में CBDC को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है। केंद्रीय बैंक ने स्टेबलकॉइन से मौद्रिक नियंत्रण और वित्तीय स्थिरता पर खतरे की चेतावनी दी है।

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भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने दिसंबर 2025 में प्रकाशित अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में डिजिटल मुद्राओं पर एक निर्णायक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। केंद्रीय बैंक ने केन्द्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) को प्राथमिकता में रखने की स्पष्ट अपील करते हुए स्टेबलकॉइन के संभावित खतरों पर गंभीर चेतावनी दी है।

रिज़र्व बैंक के अनुसार, CBDC मौद्रिक प्रणाली में धन की एकता और वित्तीय प्रणाली की अखंडता को संरक्षित रखने में सहायक हो सकती है। यह सीधा सरकारी समर्थन वाला डिजिटल रूप है, जो बैंकिंग तंत्र के भीतर पारंपरिक मुद्रा की तुलना में अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित माना जाता है।

स्टेबलकॉइन पर गंभीर चिंता जताई है

वहीं, निजी कंपनियों द्वारा जारी की जाने वाली स्टेबलकॉइन पर RBI ने गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी डिजिटल संपत्तियाँ वित्तीय प्रणाली के लिए नए जोखिम पैदा कर सकती हैं, विशेष रूप से जब बाजार में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो। स्टेबलकॉइन के व्यापक उपयोग से मौद्रिक नीति का नियंत्रण कमजोर हो सकता है और भारत की मौद्रिक संप्रभुता पर असर पड़ सकता है।

RBI की चिंता है कि स्टेबलकॉइन मौद्रिक नियंत्रण के पारंपरिक साधनों को चुनौती दे सकते हैं। विदेशी मुद्रा आधारित स्टेबलकॉइन का उपयोग मुद्रा प्रतिस्थापन या डॉलरीकरण की स्थिति पैदा कर सकता है; वित्तीय स्थिरता को जोखिम में डाल सकते हैं, खासकर संकट के समय और पूंजी प्रवाह नियंत्रण और घरेलू मौद्रिक नीतियों को कठिन बना सकते है।

वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार स्टेबलकॉइन का वैश्विक बाजार 2025 में तेजी से बढ़ा है और इसका आकार अरबों डॉलर तक पहुँच चुका है। इसने वैश्विक स्तर पर तेज़, कम लागत वाले भुगतान समाधान और सीमापार लेनदेन को संभव बनाया है, परन्तु इसके साथ ही नियमन और सुरक्षा की चुनौतियाँ भी बढ़ी है।

RBI का मानना है कि CBDC स्टेबलकॉइन की सभी तकनीकी खूबियों जैसे त्वरित निपटान, प्रभावशीलता और प्रोग्रामेबिलिटी प्रदान कर सकता है, परन्तु वह केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता और सुरक्षा के साथ आता है। इस कारण ही आरबीआई ने दुनिया भर के नीति निर्माताओं से सीबीडीसी को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।

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भारत सरकार स्टेबलकॉइन नियमों पर विचार कर रही है

भारत सरकार भी स्टेबलकॉइन पर नियमों पर विचार कर रही है। 2025-26 की आर्थिक सर्वे में स्टेबलकॉइन पर संभावित नियमों का संकेत मिला, हालांकि आरबीआई की ओर से अधिक संयम और सतर्कता का रुख अपनाया गया है।

RBI के अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि CBDC स्टेबलकॉइन की तुलना में उन सभी गुणों से युक्त है जो एक मौद्रिक प्रणाली में अपेक्षित होते हैं, जैसे कि एकता, भरोसा और मौद्रिक नियंत्रण, जिनमें स्टेबलकॉइन कहीं पीछे है।

वैश्विक संदर्भ में भी यह विषय महत्वपूर्ण बन गया है। कई देशों में स्टेबलकॉइन और CBDC पर चर्चा जारी है, और कुछ देशों ने उनके नियमन को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। भारत की नीति, जो वित्तीय स्थिरता और मौद्रिक नियंत्रण को सर्वोपरि मानती है, उन देशों की दिशा में एक सख्त उदाहरण स्थापित करती है जहाँ स्थानीय मुद्रा और नियंत्रण की संप्रभुता को प्राथमिकता दी जाती है।

निष्कर्ष

RBI का दृष्टिकोण स्पष्ट है: स्टेबलकॉइन जोखिम भरे हो सकते हैं और इनसे सावधानीपूर्वक निपटना आवश्यक है। वहीं CBDC को प्राथमिकता देना न केवल मौद्रिक नियंत्रण और वित्तीय स्थिरता के लिए बेहतर है, बल्कि यह डिजिटल मुद्रा के भविष्य के लिए अधिक भरोसेमंद ढांचा प्रस्तुत करता है। भारतीय नीति निर्माताओं के लिए यह संतुलन बनाना आवश्यक होगा कि कैसे नवाचार को बढ़ावा दिया जाए और साथ ही देश की मौद्रिक संप्रभुता और आर्थिक सुरक्षा को भी सुदृढ रखा जाए।

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