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Rajeev Ranjan Roy द्वारा लिखितstaff writerPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितstaff editor

अमेरिका ने सर्कल, रिपल समेत प्रमुख क्रिप्टो कंपनियों को ट्रस्ट बैंक की मंजूरी दी

ताजा खबरेंप्रकाशितDec 15, 2025

यह फैसला पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था और क्रिप्टो दुनिया के बीच एक महत्वपूर्ण पुल जैसा है, जो डिजिटल एसेट्स के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलता है।

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अमेरिका के शीर्ष बैंकिंग नियामक मुद्रा नियंत्रक का कार्यालय (OCC) ने 12 दिसंबर 2025 को डिजिटल संपत्ति कंपनियों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ओसीसी ने सर्कल, रिपल, बिटगो, फिडेलिटी डिजिटल एसेट्स और पैक्सोस (Circle, Ripple, BitGo, Fidelity Digital Assets, Paxos) को सशर्त रूप से राष्ट्रीय ट्रस्ट बैंक के रूप में कार्य करने की मंज़ूरी दी है। यह फैसला पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था और क्रिप्टो दुनिया के बीच एक महत्वपूर्ण पुल जैसा है, जो डिजिटल एसेट्स के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलता है।

OCC का राष्ट्रीय ट्रस्ट बैंक क्या है?

राष्ट्रीय ट्रस्ट बैंक एक विशेष प्रकार का बैंक है जो परंपरागत बैंकिंग की तरह खुद से जमा राशि नहीं लेता और न ही ऋण प्रदान करता है, लेकिन यह एसेट कस्टडी, भुगतान निपटान और ट्रस्ट सेवाएँ प्रदान करता है। यह संरचना क्रिप्टो कंपनियों को मजबूत नियामक नियंत्रण के तहत काम करने और ग्राहकों के डिजिटल एसेट्स को सुरक्षित रखने के लिए उपयुक्त मंच देती है।

विशेष रूप से, OCC का यह कदम क्रिप्टो उद्योग को राष्ट्रव्यापी क्रेडिट संस्था के रूप में काम करने का अधिकार देता है, जिससे कंपनियाँ अपने डिजिटल एसेट कस्टडी और भुगतान प्लेटफॉर्म को एक ही संघीय ढांचे के तहत विकसित कर सकती है।

क्या मंज़ूरी मिली और क्यों महत्वपूर्ण है?

ओसीसी (OCC) ने पांच प्रमुख फर्मों के आवेदन पर सशर्त मंज़ूरी दी है। Circle और Ripple को नई राष्ट्रीय ट्रस्ट बैंक तैयार करने की मंज़ूरी मिली है। BitGo, Fidelity Digital Assets और Paxos को उनके मौजूदा राज्य ट्रस्ट लाइसेंस से राष्ट्रीय ट्रस्ट बैंक में परिवर्तित करने की मंज़ूरी दी गई है।

यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे क्रिप्टो कंपनियाँ संघीय स्तर पर नियामक मानकों के तहत काम कर सकती है, न कि अलग-अलग राज्य नियमों के अधीन। यानी एक ही लाइसेंस के साथ पूरे अमेरिका में सेवाएँ प्रदान करना आसान होगा।

क्रिप्टो और बैंकिंग के बीच का पुल

ओसीसी की सशर्त मंज़ूरी का मतलब यह है कि ये कंपनियाँ अभी पूर्ण अनुमोदन पूरा नहीं कर पाई है। उन्हें पूंजी, संचालन और अनुपालन से जुड़े कठोर मानदंडों को पूरा करना होगा। जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तो ये कंपनियाँ राष्ट्रीय ट्रस्ट बैंक की तरह पूरी तरह संचालित हो सकेंगी।

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एक्सपर्ट्स की राय है कि यह एक बड़े बदलाव की शुरुआत है, क्योंकि इससे क्रिप्टो कंपनियों का परंपरागत बैंक व्यवस्था के अंदर सम्मानजनक और सुरक्षित प्लेसमेंट होगा।

नियामकीय स्पष्टता बढ़ेगी, जिससे बड़ी संस्थागत निवेश और पारंपरिक वित्तीय संस्थाएँ भी डिजिटल एसेट्स से जुड़ सकती हैं। ग्राहकों को भरोसेमंद प्लेटफॉर्म मिलेगा जो संघीय सुरक्षा मानकों से नियंत्रित होगा।

किस प्रकार का मॉडल लागू होगा?

OCC राष्ट्रीय ट्रस्ट बैंक मॉडल को पारंपरिक बैंकिंग से अलग रखता है। इसके तहत ये संस्थाएँ डेपॉज़िट स्वीकार नहीं कर सकती और न ही ऋण जारी कर सकती हैं। इनका मुख्य काम एसेट्स का कस्टडी, भुगतान निपटान और ट्रस्ट सेवाएँ प्रदान करना है। ये फर्में संघीय संगठनों के साथ टोकनाइज्ड भुगतान और डिजिटल एसेट सेवाओं में गहन भागीदारी कर सकती है।

व्यापक प्रभाव

यह कदम क्रिप्टो उद्योग के लिए एक नियमित आर्थिक ढांचे की नींव है। स्टेबलकॉइन्स जैसे USDC, RLUSD आदि का कुल बाजार लगभग $313 बिलियन तक पहुंच चुका है और ये अब संघीय निगरानी में आ रहे हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

राष्ट्रीय ट्रस्ट बैंक का ढांचा कस्टडी और भुगतान की सुरक्षा मानकों को बढ़ाता है। धन प्रबंधक और बैंक अब डिजिटल एसेट्स को कानूनी रूप से अपने साधनों का हिस्सा बना सकते हैं। पारंपरिक बैंकिंग और क्रिप्टो कंपनियों की प्रतिस्पर्धा नवाचार को बढ़ावा दे सकती है।

हालांकि परंपरागत बैंकिंग समूहों ने नियमों और जोखिमों को लेकर चिंता जताई है कि क्या ऐसे ढांचे में पर्याप्त सुरक्षा और स्थिरता बनी रहेगी या नहीं।

निष्कर्ष

OCC का कदम यह संकेत देता है कि क्रिप्टो और पारंपरिक वित्त के बीच का फासला तेजी से घट रहा है। राष्ट्रीय ट्रस्ट बैंक के रूप में सशर्त मंज़ूरी न केवल नियामक स्वीकृति का प्रतीक है, बल्कि यह भविष्य में डिजिटल वित्तीय सेवाओं के लिए व्यापक अवसर प्रदान कर सकता है।

यह ऐतिहासिक बदलाव क्रिप्टो उद्योग को वैश्विक वित्त में और अधिक मान्यता, सुरक्षा और पारदर्शिता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

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