
पाकिस्तान ने स्टेबलकॉइन भुगतान समझौते के लिए ट्रंप से जुड़ी क्रिप्टो कंपनी से हाथ मिलाया
इस्लामाबाद में पाकिस्तान सरकार ने अमेरिका स्थित वित्तीय फर्म ‘वर्ल्ड लिबर्टी’ से स्टेबलकॉइन भुगतान समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य सीमा पार भुगतान को सरल और सुरक्षित बनाना है।

पाकिस्तान ने डिजिटल वित्त के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए एससी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज नामक कंपनी के साथ मेमोरैंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर सहमति जताई है, जो अमेरिकी वित्तीय समूह वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल से जुड़ी है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य यूएस डॉलर से जुड़ी स्टेबलकॉइन का उपयोग सीमा पार भुगतान प्रणाली (क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट) को आसान और सस्ता बनाने के लिए करना है।
पाकिस्तान वर्चुअल एसेट रेगुलेटरी अथॉरिटी
पाकिस्तान वर्चुअल एसेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (PVARA) ने जारी बयान में कहा कि यह समझौता दुनिया भर में डिजिटल भुगतान संरचनाओं को विकसित करने के लिए तकनीकी वार्ता और समझ विकसित करने का एक प्रारंभिक चरण है। इस पहल के तहत USD1 नामक स्टेबलकॉइन को पायलट परियोजना के रूप में पाकिस्तान की विकासशील डिजिटल भुगतान प्रणाली के साथ जोड़ा जा सकता है।
पाकिस्तानी वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब और एससी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज़ैक विटकॉफ ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह MoU एक गैर-बाध्यकारी समझौता है, जिसका मतलब है कि यह सहज ज्ञान और तकनीकी परीक्षण के उद्देश्य से है, न कि तुरंत लागू होने वाला कानूनी अनुबंध।
सरकारी बयान के अनुसार, इस समझौते को मौजूदा डिजिटल मुद्रा अवसंरचना के साथ जोड़ा जा सकता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या स्टेबलकॉइन को पाकिस्तानी वित्तीय ढांचे में सुरक्षित तरीके से शामिल किया जा सकता है और यह सीमा पार भुगतान के समय पारंपरिक तरीकों की तुलना में कितनी तेजी और सस्ते में काम कर सकता है।
पाकिस्तान में डिजिटल मुद्रा परीक्षण
यह कदम ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान केंद्रीय बैंक के माध्यम से डिजिटल मुद्रा परीक्षणों और आभासी संपत्ति के लिए नियमों को अंतिम रूप देने पर काम कर रहा है। स्टेबलकॉइन की अवधारणा डिजिटल रूप से डॉलर-पेग्ड मुद्रा होने के कारण पारंपरिक भुगतान प्रणालियों की तुलना में अधिक स्थिरता और पारदर्शिता प्रदान करती है।
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इस समझौते की घोषणा के समय प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ, चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनिर, उप प्रधानमंत्री इशाक दार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे, जो इसे पाकिस्तान की डिजिटल वित्त रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल पाकिस्तान को वैश्विक वित्तीय नेटवर्क के साथ बेहतर ढंग से जोड़ सकती है, खासकर प्रेषण (रेमिटेंस) और व्यापार लेन-देन के संदर्भ में। इससे न केवल भुगतान की लागत कम हो सकती है, बल्कि वित्तीय समावेशन और नवाचार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि इस परियोजना के कुछ पहलू अभी भी परीक्षण और मूल्यांकन के अधीन हैं। सरकार और नियामक प्राधिकरण स्पष्ट कर चुके हैं कि किसी भी पूर्ण-आकार लागू व्यवस्था से पहले नियम, निगरानी और सुरक्षा मानकों को मजबूत करना जरूरी है।
निष्कर्ष
पाकिस्तान द्वारा वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर का निर्णय व्यापक डिजिटल वित्तीय रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य सीमा पार भुगतान को सरल, किफायती और अधिक पारदर्शी बनाना है। यह पहल डिजिटल मुद्रा और ब्लॉकचैन आधारित समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम साबित हो सकती है, यदि इसे राष्ट्रीय हित, सुरक्षा और नियमन मानदंडों के साथ सही तरीके से जोड़ा जाए।
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