भारत में क्रिप्टो और डिजिटल करेंसी को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। Zerodha के सह-संस्थापक Nikhil Kamath ने डॉलर आधारित स्टेबलकॉइन को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर भारत भविष्य में अमेरिकी डॉलर से जुड़े डिजिटल टोकन पर ज्यादा निर्भर हो जाता है, तो इससे देश की वित्तीय स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने गोल्ड-बैक्ड स्टेबलकॉइन को भारत के लिए बेहतर विकल्प बताया है।
डॉलर आधारित स्टेबलकॉइन पर जताई चिंता
Nikhil Kamath ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दुनिया धीरे-धीरे डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है। कई देश अब वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं और अमेरिकी वित्तीय प्रभाव से बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहे हैं।
उनका कहना था कि डॉलर आधारित स्टेबलकॉइन डिजिटल दुनिया में अमेरिकी मुद्रा की पकड़ को और मजबूत कर सकते हैं। ऐसे में भारत जैसे बड़े देश को इस दिशा में बहुत सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए।
दुनिया में बढ़ रही वैकल्पिक वित्तीय सिस्टम की मांग
कमाथ ने कहा कि कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर के बजाय दूसरी मुद्राओं का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।
उन्होंने SWIFT जैसे वैश्विक पेमेंट नेटवर्क के विकल्पों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक आने वाले समय में कई देश अपने स्वतंत्र डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत करने पर ध्यान देंगे।
UPI मॉडल को बताया भारत की ताकत
Nikhil Kamath ने भारत के Unified Payments Interface यानी UPI की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत पहले ही दुनिया के सबसे सफल डिजिटल पेमेंट सिस्टम में से एक तैयार कर चुका है।
उनके अनुसार UPI यह साबित करता है that भारत बिना विदेशी सिस्टम पर निर्भर हुए अपना मजबूत वित्तीय ढांचा खड़ा कर सकता है। यही वजह है कि भारत को डिजिटल करेंसी के मामले में भी अपना अलग मॉडल तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए।
गोल्ड-बैक्ड स्टेबलकॉइन का दिया सुझाव
कमाथ ने कहा कि वह स्टेबलकॉइन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि भारत के लिए गोल्ड-बैक्ड स्टेबलकॉइन ज्यादा उपयुक्त हो सकता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय परिवारों के पास बड़ी मात्रा में सोना मौजूद है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा आर्थिक गतिविधियों में इस्तेमाल नहीं होता। अगर उस सोने को डिजिटल टोकन से जोड़ा जाए, तो इससे लोगों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिल सकता है और देश डॉलर आधारित सिस्टम पर कम निर्भर रहेगा।
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सरकार के रुख की तारीफ
Nikhil Kamath ने केंद्र सरकार और भारतीय रेगुलेटर्स की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि अब तक भारत ने क्रिप्टो और स्टेबलकॉइन के मामले में संतुलित रुख अपनाया है।
उनके मुताबिक सरकार ने बिना जल्दबाजी किए इस सेक्टर को समझने की कोशिश की है, जो लंबी अवधि के लिए बेहतर रणनीति साबित हो सकती है।
भारत में बढ़ सकती है नई बहस
फिलहाल भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन को लेकर स्पष्ट नीति नहीं आई है। हालांकि डिजिटल एसेट और ब्लॉकचेन तकनीक को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है।
ऐसे समय में Nikhil Kamath का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर तब, जब दुनिया के कई देश डिजिटल करेंसी और वैकल्पिक फाइनेंशियल सिस्टम पर तेजी से काम कर रहे हैं। आने वाले समय में भारत भी अपनी डिजिटल करेंसी रणनीति को लेकर बड़ा फैसला ले सकता है।
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