दुनियाभर में क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। नई रिपोर्ट्स के अनुसार भारत और अमेरिका अब वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो अपनाने की दौड़ में सबसे आगे निकल चुके हैं। मोबाइल आधारित निवेश, डिजिटल भुगतान और ब्लॉकचेन तकनीक के बढ़ते उपयोग ने इस सेक्टर को नई गति दी है।
India और United States को लेकर जारी NFT Plazas की रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों में क्रिप्टो का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट में Chainalysis Global Adoption Index 2025 का हवाला देते हुए बताया गया कि विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में डिजिटल एसेट्स अब मुख्यधारा का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे तेज बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पिछले एक साल के दौरान ऑन-चेन क्रिप्टो गतिविधियों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। जून 2025 तक के 12 महीनों में इस क्षेत्र में प्राप्त क्रिप्टो वैल्यू 69 प्रतिशत बढ़कर 2.36 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई। एक साल पहले यह आंकड़ा करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर था।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ोतरी में भारत, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे देशों की बड़ी भूमिका रही। दक्षिण एशिया जनवरी से जुलाई 2025 के बीच दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्रिप्टो क्षेत्र बनकर उभरा, जहां ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 80 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी देखी गई।
भारत में क्यों बढ़ रहा है क्रिप्टो इस्तेमाल
भारत में युवा आबादी, सस्ता इंटरनेट और तेजी से बढ़ता डिजिटल भुगतान ढांचा क्रिप्टो अपनाने के बड़े कारण माने जा रहे हैं। देश में पहले से ही UPI और फिनटेक सेवाओं का बड़ा नेटवर्क मौजूद है, जिसने डिजिटल लेनदेन को आसान बना दिया है।
क्रिप्टो एक्सचेंज और ब्लॉकचेन आधारित स्टार्टअप्स में भी निवेश बढ़ा है। कई युवा निवेशक अब बिटकॉइन, एथेरियम और दूसरे डिजिटल टोकन को निवेश के नए विकल्प के रूप में देख रहे हैं। हालांकि भारत में क्रिप्टो पर 30 प्रतिशत टैक्स और 1 प्रतिशत TDS जैसे सख्त नियम लागू हैं, इसके बावजूद निवेशकों की रुचि कम नहीं हुई है।
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विश्लेषकों का कहना है कि भारत में क्रिप्टो केवल ट्रेडिंग तक सीमित नहीं है। अब Web3, गेमिंग, डिजिटल पहचान और टोकनाइजेशन जैसे क्षेत्रों में भी ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
अमेरिका में संस्थागत निवेश का असर
दूसरी तरफ अमेरिका में बड़े निवेश संस्थानों और फाइनेंशियल कंपनियों की एंट्री ने क्रिप्टो बाजार को मजबूती दी है। हाल के वर्षों में स्पॉट बिटकॉइन ETF और डिजिटल एसेट आधारित निवेश उत्पादों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी बाजार में नियामकीय स्पष्टता आने के बाद बड़े बैंक और एसेट मैनेजमेंट कंपनियां भी डिजिटल एसेट सेक्टर में सक्रिय हो रही हैं। इससे आम निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
दूसरे देशों में भी तेजी
रिपोर्ट में फिलीपींस, नाइजीरिया और अल सल्वाडोर जैसे देशों का भी जिक्र किया गया है। फिलीपींस में रेमिटेंस यानी विदेश से आने वाले पैसों के लिए क्रिप्टो का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और वहां 2025 में करीब 1.6 करोड़ लोग क्रिप्टो का उपयोग कर रहे थे।
वहीं Nigeria में युवा आबादी क्रिप्टो अपनाने में सबसे आगे है। रिपोर्ट के मुताबिक वहां 74 प्रतिशत क्रिप्टो निवेशक 30 साल से कम उम्र के हैं।
El Salvador अब भी बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा के रूप में मान्यता देने वाला दुनिया का पहला देश बना हुआ है। वहां बड़ी संख्या में छोटे कारोबारी बिटकॉइन पेमेंट स्वीकार कर रहे हैं।
नियम और सुरक्षा अब सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि क्रिप्टो अपनाने की रफ्तार तेज है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत रेगुलेशन और साइबर सुरक्षा अब सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। कई देशों में सरकारें डिजिटल एसेट्स को लेकर नए नियम तैयार कर रही हैं ताकि निवेशकों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में डिजिटल एसेट्स और ब्लॉकचेन तकनीक वैश्विक वित्तीय व्यवस्था का अहम हिस्सा बन सकती है। ऐसे में भारत और अमेरिका की भूमिका इस बदलाव में बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।.
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