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लेखक: Pratik Bhuyanस्टाफ संपादक
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ITR Filing 2026: क्रिप्टो और विदेशी शेयरों से कमाई पर कैसे लगेगा टैक्स?

ITR Filing 2026 में क्रिप्टोकरेंसी और विदेशी शेयरों से हुई कमाई पर टैक्स कैसे लगेगा? जानिए Schedule VDA, विदेशी आय रिपोर्टिंग, DTAA और नए ITR नियमों की पूरी जानकारी।

ITR Filing 2026: क्रिप्टो और विदेशी शेयरों से कमाई पर कैसे लगेगा टैक्स?
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भारत में क्रिप्टोकरेंसी और विदेशी शेयरों में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। अब बड़ी संख्या में युवा निवेशक अमेरिकी कंपनियों के शेयर, ग्लोबल ETF और बिटकॉइन जैसी डिजिटल एसेट्स में पैसा लगा रहे हैं। लेकिन इन निवेशों से हुई कमाई को इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR में सही तरीके से दिखाना काफी जरूरी हो गया है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि गलत जानकारी देने या विदेशी आय छिपाने पर आयकर विभाग नोटिस भेज सकता है।

आकलन वर्ष 2026-27 के लिए जारी नए ITR फॉर्म्स में विदेशी संपत्तियों, कैपिटल गेन और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग को लेकर ज्यादा पारदर्शिता लाई गई है। सरकार अब AIS, Form 26AS और विदेशी टैक्स डेटा के जरिए निवेशकों की जानकारी मिलान कर रही है।

क्रिप्टो पर कैसे लगता है टैक्स

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को Virtual Digital Asset यानी VDA माना जाता है। मौजूदा नियमों के अनुसार, क्रिप्टो बेचने से हुए मुनाफे पर 30 प्रतिशत टैक्स लगता है। इसके अलावा 4 प्रतिशत सेस भी देना पड़ता है। खास बात यह है कि क्रिप्टो लॉस को दूसरी आय से सेट ऑफ नहीं किया जा सकता।

अगर किसी निवेशक ने बिटकॉइन, एथेरियम या दूसरे टोकन बेचकर लाभ कमाया है, तो उसे ITR में Schedule VDA में रिपोर्ट करना होगा। हर ट्रांजैक्शन की जानकारी अलग-अलग देनी पड़ सकती है। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, कई निवेशक केवल एक्सचेंज स्टेटमेंट डाउनलोड करके छोड़ देते हैं, जबकि विभाग अब विस्तृत रिपोर्टिंग चाहता है।

क्रिप्टो से जुड़े दूसरे प्रकार की कमाई जैसे स्टेकिंग रिवॉर्ड, एयरड्रॉप या गिफ्ट में मिले टोकन को “Income from Other Sources” के तहत दिखाया जाता है। बाद में इन्हें बेचने पर फिर से टैक्स लागू होता है।

विदेशी शेयरों से कमाई पर क्या नियम हैं

विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों को भी अपनी आय ITR में बतानी जरूरी है। इसमें अमेरिकी शेयरों से मिला डिविडेंड, शेयर बेचने से हुआ कैपिटल गेन और विदेशी ब्रोकरेज अकाउंट की जानकारी शामिल है।

विदेशी शेयरों से मिला डिविडेंड भारत में टैक्सेबल होता है। अगर विदेश में पहले से टैक्स कट चुका है, तो Double Taxation Avoidance Agreement यानी DTAA के तहत टैक्स क्रेडिट का दावा किया जा सकता है। इसके लिए सही दस्तावेज और टैक्स रिकॉर्ड रखना जरूरी है।

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टैक्स नियमों के अनुसार, विदेशी संपत्तियों और विदेशी आय की जानकारी Schedule FA और FSI में भरनी होती है। यह सुविधा केवल ITR-2 और ITR-3 जैसे फॉर्म्स में उपलब्ध होती है। जिन लोगों के पास विदेशी शेयर या विदेशी बैंक अकाउंट हैं, वे ITR-1 का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

गलत जानकारी देने पर बढ़ सकती है परेशानी

हाल के महीनों में कई टैक्सपेयर्स को विदेशी संपत्तियों की जानकारी न देने पर आयकर विभाग की ओर से ईमेल और नोटिस मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विभाग अब अंतरराष्ट्रीय डेटा शेयरिंग सिस्टम और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए विदेशी निवेशों पर नजर रख रहा है।

इसके अलावा क्रिप्टो ट्रेडिंग में कटे 1 प्रतिशत TDS की जानकारी भी विभाग के पास पहुंचती है। ऐसे में अगर किसी ने ITR में क्रिप्टो आय नहीं दिखाई, तो उसका मामला जांच में आ सकता है।

टैक्स सलाहकारों का कहना है कि निवेशकों को समय रहते सही ITR फॉर्म चुनना चाहिए और सभी विदेशी व डिजिटल एसेट्स की जानकारी स्पष्ट रूप से भरनी चाहिए। इससे नोटिस और पेनाल्टी के जोखिम से बचा जा सकता है।

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