
भारत का बॉन्ड बाजार ब्लॉकचेन की ओर, SEBI ला सकता है टोकनाइज्ड बॉन्ड पायलट
SEBI भारत में tokenised corporate bonds के लिए blockchain आधारित पायलट शुरू करने की तैयारी कर रहा है। जानिए इससे बॉन्ड बाजार, निवेशकों और blockchain adoption पर क्या असर पड़ सकता है।

भारत का वित्तीय बाजार अब तेजी से ब्लॉकचेन तकनीक की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में टोकनाइजेशन को लेकर बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक SEBI आने वाले छह से नौ महीनों के भीतर tokenised corporate bonds के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है। यह कदम भारत के बॉन्ड बाजार में बड़ा तकनीकी बदलाव ला सकता है।
क्या होते हैं टोकनाइज्ड बॉन्ड?
टोकनाइज्ड बॉन्ड ऐसे डिजिटल बॉन्ड होते हैं जिन्हें blockchain या distributed ledger technology यानी DLT पर जारी और ट्रैक किया जाता है। पारंपरिक बॉन्ड सिस्टम में लेनदेन और settlement के लिए कई मध्यस्थ संस्थाओं की जरूरत पड़ती है, जिससे प्रक्रिया धीमी और महंगी हो जाती है।
लेकिन tokenisation के जरिए बॉन्ड को डिजिटल टोकन में बदलकर blockchain नेटवर्क पर ट्रांसफर किया जा सकता है। इससे settlement का समय काफी कम हो सकता है और लेनदेन लगभग तुरंत पूरा किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे transparency बढ़ेगी, लागत कम होगी और बॉन्ड बाजार में liquidity बेहतर हो सकती है।
SEBI क्यों कर रहा है यह प्रयोग?
भारत का कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार फिलहाल लगभग 0.56 ट्रिलियन डॉलर का माना जाता है, लेकिन इसकी तुलना में शेयर बाजार ज्यादा सक्रिय और पारदर्शी है। बॉन्ड बाजार में कम liquidity, धीमी settlement प्रक्रिया और जटिल ट्रैकिंग जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं।
SEBI चेयरमैन Tuhin Kanta Pandey ने हाल ही में मुंबई में आयोजित एक डेट मार्केट सम्मेलन में कहा कि regulator नई तकनीकों का इस्तेमाल कर बॉन्ड बाजार को आधुनिक बनाना चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इतनी बड़ी वित्तीय प्रणाली में blockchain लागू करना आसान नहीं होगा और इसके साथ कई operational तथा technological risks जुड़े हैं।
बॉन्ड नियमों में भी होगा बड़ा बदलाव
Tokenised bond pilot के साथ साथ SEBI बॉन्ड बाजार के disclosure rules में भी बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक regulator अब debt securities के लिए disclosure standards को equity market के बराबर लाना चाहता है।
अगर यह लागू होता है, तो बॉन्ड जारी करने वाली कंपनियों को ज्यादा विस्तृत वित्तीय जानकारी और नियमित अपडेट निवेशकों को देने होंगे। इसका मकसद निवेशकों का भरोसा बढ़ाना और corporate debt market को ज्यादा पारदर्शी बनाना है।
क्या आप जानते हैं: क्वांटम खतरे से निपटने की तैयारी में Ethereum, नई तकनीक पर तेज हुआ काम
SEBI debt brokers के लिए अलग regulatory category बनाने पर भी विचार कर रहा है। इसके अलावा Reserve Bank of India और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर market-making framework तैयार करने की दिशा में भी काम चल रहा है।
भारत में blockchain adoption को मिल सकता है बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर tokenised bond pilot सफल रहता है, तो यह भारत में blockchain technology के institutional adoption को काफी बढ़ा सकता है। अब तक blockchain का इस्तेमाल मुख्य रूप से crypto और Web3 projects तक सीमित माना जाता रहा है, लेकिन अब traditional finance sector भी इस तकनीक की ओर बढ़ रहा है।
दुनिया के कई बड़े वित्तीय संस्थान पहले ही tokenized assets पर काम कर रहे हैं। Mastercard जैसी कंपनियां blockchain security standards और digital asset infrastructure से जुड़ी पहल में हिस्सा ले रही हैं।
भारत में भी NITI Aayog ने दिसंबर 2025 की एक रिपोर्ट में regulators को tokenised bonds जैसे प्रयोग शुरू करने की सलाह दी थी। SEBI का नया कदम उसी दिशा में अगला बड़ा चरण माना जा रहा है।
निवेशकों और कंपनियों पर क्या होगा असर?
अगर tokenisation सफल रहती है, तो भविष्य में बॉन्ड खरीदना और बेचना काफी आसान हो सकता है। छोटे निवेशकों को भी corporate bonds तक ज्यादा पहुंच मिल सकती है। इसके अलावा settlement तेज होने से कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना भी आसान हो सकता है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है that blockchain आधारित सिस्टम में cyber security और data protection सबसे बड़ी चुनौती रहेंगे। इसी वजह से regulator फिलहाल सीधे बड़े स्तर पर rollout करने के बजाय पहले सीमित पायलट प्रोजेक्ट के जरिए तकनीक को परखना चाहता है।
आगे क्या हो सकता है?
SEBI का यह कदम संकेत देता है कि भारत अब blockchain को सिर्फ crypto से जोड़कर नहीं देख रहा, बल्कि उसे वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर के हिस्से के रूप में अपनाने की तैयारी कर रहा है।
अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में सिर्फ bonds ही नहीं बल्कि दूसरे financial assets भी tokenized form में देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि SEBI का पायलट कितना बड़ा होगा और इसमें किन संस्थानों को शामिल किया जाएगा।
ऐसी ही और ख़बरों और क्रिप्टो विश्लेषण के लिए हमें X और LinkedIn पर फ़ॉलो करें, ताकि कोई भी अपडेट आपसे न छूटे!
इस विषय पर अधिक

