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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत में Crypto Cards पर RBI-FIU की नजर, RedotPay की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

ताजा खबरेंप्रकाशित3 नव॰ 2026

RBI और FIU-IND विदेशी क्रिप्टो कार्ड की जांच कर रहे हैं। RedotPay समेत इन कार्ड के जरिए भारतीय ग्राहक क्रिप्टो से रुपये में भुगतान करते हैं। जानिए FEMA और भुगतान नियमों को लेकर क्या चिंताएं हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रोजमर्रा के भुगतान करने वाले लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) विदेशों में जारी होने वाले क्रिप्टो प्रीपेड कार्ड की जांच कर रहे हैं। इन कार्ड के जरिए भारतीय ग्राहक अपने विदेशी क्रिप्टो वॉलेट में रखी डिजिटल संपत्तियों को रुपये में बदलकर देश के भीतर खरीदारी और नकद निकासी कर सकते हैं।

The Economic Times की 2 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, दो लोगों ने बताया कि नियामक इन कार्ड के काम करने के तरीके और भारतीय भुगतान व्यवस्था में उनकी भूमिका की जांच कर रहे हैं। RedotPay जैसी विदेशी कंपनियों के कार्ड भी इस मामले में चर्चा में हैं। इस बीच, कई भारतीय उपयोगकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर शिकायत की है कि उनके कार्ड काम करना बंद कर चुके हैं और कुछ सेवा प्रदाताओं की वेबसाइट तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।

हालांकि, RBI या FIU-IND ने अब तक किसी आधिकारिक बयान में जांच की पुष्टि नहीं की है। न ही RedotPay के खिलाफ किसी औपचारिक कार्रवाई या देशव्यापी प्रतिबंध की घोषणा हुई है।

कैसे काम करते हैं विदेशी क्रिप्टो कार्ड?

RedotPay जैसे विदेशी वित्तीय सेवा प्रदाता ऐसे प्रीपेड कार्ड उपलब्ध कराते हैं, जिनमें ग्राहक अपने क्रिप्टो वॉलेट से डिजिटल संपत्तियों के जरिए रकम जोड़ सकते हैं। इन कार्ड का इस्तेमाल Visa और Mastercard जैसे अंतरराष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है।

जब कोई ग्राहक दुकान, वेबसाइट या किसी दूसरी सेवा पर कार्ड से भुगतान करता है, तो उसके क्रिप्टो बैलेंस का जरूरी हिस्सा रुपये में बदल दिया जाता है। इसके बाद दुकानदार को सामान्य कार्ड भुगतान की तरह रकम मिलती है। यानी ग्राहक के पास बैंक खाते में रुपये होना जरूरी नहीं होता, क्योंकि भुगतान के समय क्रिप्टो को स्थानीय मुद्रा में बदला जा सकता है।

इन कार्ड का इस्तेमाल ऑनलाइन खरीदारी, मोबाइल रिचार्ज, हवाई टिकट बुक करने और एटीएम से नकदी निकालने के लिए किए जाने की खबरें हैं। Economic Times के अनुसार, कुछ कार्ड की कीमत करीब $40 से $50 होती है और उनकी वैधता लगभग तीन साल रहती है।

इस व्यवस्था में सबसे बड़ी चिंता यह है कि भुगतान के पीछे मौजूद क्रिप्टो लेनदेन भारतीय बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की सामान्य निगरानी से बाहर रह सकता है।

Digital South Trust की जांच के बाद बढ़ी निगरानी

इस मामले में बेंगलुरु स्थित ब्लॉकचेन शोध संस्था Digital South Trust की भूमिका भी सामने आई है। संस्था के संस्थापक Sudhakar Lakshmanaraja के मुताबिक, उनकी टीम ने अगस्त में RedotPay का Visa समर्थित वर्चुअल कार्ड हासिल किया और उससे भारत में कई ऑनलाइन भुगतान किए।

संस्था ने कार्ड और इन लेनदेन से जुड़ी जानकारी भारतीय अधिकारियों के साथ साझा की। Lakshmanaraja ने कहा कि उनकी जांच में ऐसे विदेशी कार्ड कार्यक्रम भी सामने आए, जो बहुत कम या बिना ग्राहक पहचान प्रक्रिया के सेवाएं देने का दावा करते हैं।

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रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में कई उपयोगकर्ताओं ने कार्ड बंद होने की शिकायत की है। यह भी आशंका जताई गई है कि Visa या दूसरे भुगतान नेटवर्क ने भारत से जुड़े कुछ लेनदेन रोकने शुरू किए हों। हालांकि, Visa, Mastercard और RBI ने इस संबंध में Economic Times के सवालों का जवाब नहीं दिया। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कार्ड बंद होने के पीछे किस संस्था का फैसला है और क्या यह रोक सभी विदेशी क्रिप्टो कार्ड पर लागू है।

FEMA और भुगतान नियमों को लेकर क्यों उठे सवाल?

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी FEMA भारत में विदेशी मुद्रा और सीमा पार होने वाले वित्तीय लेनदेन को नियंत्रित करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशी कंपनी के पास रखे क्रिप्टो वॉलेट से भारत में भुगतान करने की व्यवस्था इस कानून के तहत कई सवाल खड़े कर सकती है।

Khaitan & Co के वकील Manavendra Mishra ने Economic Times को बताया कि कई उपयोगकर्ताओं को ऐसे कार्ड इस्तेमाल करने से जुड़े FEMA नियमों की जानकारी नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि कम ग्राहक पहचान प्रक्रिया वाले कार्ड से धन के स्रोत और असली मालिक की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।

Ascentium India के Harshal Bhuta के मुताबिक, विदेशी क्रिप्टो कार्ड भारतीय प्रीपेड भुगतान साधनों और भुगतान निपटान व्यवस्था से जुड़े नियमों के पालन पर सवाल खड़े कर सकते हैं। इसकी वजह यह है कि ग्राहक की संपत्ति विदेशी सेवा प्रदाता के पास रहती है और भुगतान के समय उसे रुपये में बदला जाता है।

हालांकि, किसी खास कार्ड या लेनदेन को कानून का उल्लंघन मानने के लिए उसकी वास्तविक व्यवस्था और लागू नियमों की जांच जरूरी होगी। फिलहाल नियामकों की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।

भारतीय क्रिप्टो उपयोगकर्ताओं के लिए क्या मायने?

विदेशी क्रिप्टो कार्ड की जांच ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया भर में स्थिर मुद्रा यानी Stablecoin के जरिए भुगतान का चलन बढ़ रहा है। ये ऐसी डिजिटल मुद्राएं होती हैं, जिनकी कीमत आमतौर पर अमेरिकी डॉलर जैसी पारंपरिक मुद्रा से जुड़ी रहती है।

Visa के आंकड़ों का हवाला देते हुए Hashtag Web3 के संस्थापक Vedang Ratan Vatsa ने बताया कि स्थिर मुद्रा से जुड़े कार्ड भुगतान में तेजी आई है। उनके मुताबिक, यह व्यवस्था अलग भुगतान नेटवर्क बनाने के बजाय मौजूदा कार्ड नेटवर्क में क्रिप्टो को भुगतान के स्रोत के रूप में जोड़ रही है।

भारत में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि विदेशी कार्ड से भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए आगे क्या नियम लागू होंगे। यदि भुगतान नेटवर्क ने भारत में इन कार्ड का इस्तेमाल सीमित किया, तो कुछ उपयोगकर्ताओं को अपने कार्ड बैलेंस और उपलब्ध सेवाओं तक पहुंच में परेशानी हो सकती है।

इसलिए ग्राहकों को किसी भी विदेशी क्रिप्टो कार्ड का इस्तेमाल करने से पहले उसकी शर्तें, पहचान प्रक्रिया और भारत में लागू वित्तीय नियमों को समझना जरूरी है। नियामकों की जांच का अंतिम नतीजा आने तक इसे RedotPay या किसी अन्य कंपनी पर लगाए गए साबित उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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