
ड्रग तस्करी पर शिकंजा कसने की तैयारी, भारत ने बनाया डार्कनेट-क्रिप्टो सेल
भारत सरकार ने ड्रग तस्करी में इस्तेमाल होने वाले डार्कनेट और क्रिप्टो भुगतान की जांच के लिए विशेष सेल बनाया है। अमित शाह ने 2029 तक नशामुक्त भारत के लक्ष्य की जानकारी दी।

भारत सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने के लिए डार्कनेट और क्रिप्टो लेनदेन की निगरानी करने वाली एक विशेष इकाई बनाने का फैसला किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 6 सितंबर को गोवा में बताया कि सरकार ने उच्चस्तरीय मादक पदार्थ रोधी कार्यबल के भीतर एक समर्पित डार्कनेट-क्रिप्टो सेल गठित किया है।
यह इकाई ऑनलाइन नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री, क्रिप्टो भुगतान, एन्क्रिप्टेड बातचीत और छिपाकर की जाने वाली डिलीवरी की जांच करेगी। सरकार का उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों की खेप पकड़ना नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद पूरे वित्तीय नेटवर्क और तस्करी के बड़े गिरोह तक पहुंचना है।
क्रिप्टो भुगतान और एन्क्रिप्टेड संदेशों पर नजर
डार्कनेट इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे सामान्य सर्च इंजन के जरिए आसानी से नहीं देखा जा सकता। इसका इस्तेमाल कई बार अवैध बाजारों, गुप्त बातचीत और गैरकानूनी लेनदेन के लिए किया जाता है। मादक पदार्थों के तस्कर अब पारंपरिक नकद भुगतान और हवाला के साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
गृह मंत्रालय के अनुसार, नई इकाई ब्लॉकचेन पर होने वाले लेनदेन का विश्लेषण करेगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी वॉलेट में पैसा कहां से आया, किन खातों में भेजा गया और अंत में किस व्यक्ति या गिरोह तक पहुंचा।
जांच एजेंसियां एन्क्रिप्टेड संदेशों, डिजिटल सबूतों और ऑनलाइन गतिविधियों को भी आपस में जोड़ेंगी। इस काम में मशीन लर्निंग और दूसरे तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारियों को डार्कनेट जांच, क्रिप्टो ट्रेसिंग और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
सड़क से बड़े गिरोह तक पहुंचेगी जांच
अमित शाह ने जांच के लिए दोतरफा तरीका अपनाने की बात कही है। एक दिशा में छोटी मात्रा में पकड़े गए नशीले पदार्थों से पीछे की ओर जांच की जाएगी, ताकि स्थानीय विक्रेता, आपूर्तिकर्ता और वित्तपोषक तक पहुंचा जा सके। दूसरी दिशा में सीमा पर पकड़ी गई बड़ी खेप से आगे की कड़ी खोजी जाएगी, जिससे पता लगाया जा सके कि माल किन इलाकों और ग्राहकों तक पहुंचना था।
इसका मकसद केवल छोटे स्तर के आरोपियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि तस्करी के पूरे ढांचे को तोड़ना है। सरकार का मानना है कि नशीले पदार्थों से मिलने वाला पैसा कई बार संगठित अपराध और आतंकवादी गतिविधियों में भी इस्तेमाल होता है। इसलिए वित्तीय जांच को मादक पदार्थों की बरामदगी के साथ जोड़ना जरूरी है।
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पहले भी सामने आए हैं क्रिप्टो से जुड़े मामले
भारत में डार्कनेट और क्रिप्टो के जरिए ड्रग तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। इस साल नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने कथित तौर पर “Team Kalki” नाम के एक अखिल भारतीय नेटवर्क को तोड़ा था। आरोप है कि इस नेटवर्क में एन्क्रिप्टेड संदेश सेवा, डार्कनेट मंच और छिपाकर सामान पहुंचाने की व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता था।
एक अन्य मामले में अधिकारियों ने क्रिप्टो वॉलेट की गतिविधियों का पता लगाकर करीब ₹226.54 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन की जांच की। इस मामले में Monero और Tether जैसी डिजिटल मुद्राओं के इस्तेमाल की बात सामने आई थी। Binance की जांच टीम ने भी भारतीय एजेंसियों को ब्लॉकचेन विश्लेषण और वॉलेट ट्रैकिंग में सहायता दी थी।
राजस्व खुफिया निदेशालय ने अपनी 2024-25 की रिपोर्ट में भी कहा था कि कुछ तस्करी गिरोह पारंपरिक हवाला व्यवस्था के बजाय क्रिप्टो और स्थिर मुद्रा का इस्तेमाल करने लगे हैं। इसकी वजह तेज भुगतान और अलग-अलग देशों में कमजोर निगरानी व्यवस्था बताई गई थी।
2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य
डार्कनेट-क्रिप्टो सेल का गठन सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। गृह मंत्री ने बताया कि 2026 से 2029 के लिए समयबद्ध योजना तैयार की गई है, जिसमें 200 से अधिक कार्रवाई बिंदु शामिल हैं।
हालांकि, नई इकाई क्रिप्टो बाजार की नियामक संस्था नहीं होगी। इसका काम मादक पदार्थों से जुड़े अवैध लेनदेन और डिजिटल नेटवर्क की जांच करना होगा। क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं को पहले से ही वित्तीय खुफिया इकाई के साथ पंजीकरण और संदिग्ध लेनदेन की जानकारी देने जैसी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, नई व्यवस्था से जांच एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ सकता है। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि एजेंसियों को कितनी तकनीकी क्षमता, प्रशिक्षित कर्मचारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिलता है। डार्कनेट और क्रिप्टो नेटवर्क सीमा पार काम करते हैं, इसलिए केवल घरेलू कार्रवाई से इनका पूरी तरह मुकाबला करना मुश्किल होगा।
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