पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने साफ किया है कि उसके किसी भी जहाज ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को न तो नकद और न ही क्रिप्टो में कोई भुगतान किया है। सरकार ने ऐसे सभी दावों को गलत और भ्रामक बताया है।
हाल के दिनों में यह खबरें सामने आई थीं कि जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के बदले ईरान भुगतान मांग रहा है। इनमें क्रिप्टो के इस्तेमाल की भी बात कही गई थी। लेकिन भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उसके जहाज बिना किसी शुल्क के ही इस अहम समुद्री मार्ग से गुजर रहे हैं।
जहाजों पर हमले के बाद बढ़ा विवाद
यह विवाद उस घटना के बाद और बढ़ गया जब 18 अप्रैल को ईरानी बलों ने दो भारतीय झंडे वाले जहाजों पर गोलीबारी की। इस घटना के बाद दोनों जहाजों को वापस लौटना पड़ा।
इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने कहा कि इस स्थिति में कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं, जिनमें भुगतान से जुड़े दावे भी शामिल हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन दावों का कोई प्रमाण नहीं है और इन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब तक जितने भी भारतीय जहाज इस मार्ग से गुजरे हैं, उन्होंने किसी को कोई पैसा नहीं दिया। यह बयान उन रिपोर्ट्स के जवाब में आया है जिनमें कहा गया था कि सुरक्षित रास्ते के लिए भुगतान जरूरी है।
क्रिप्टो भुगतान की खबरें क्यों फैलीं
दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों में ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई थीं कि ईरान जहाजों से गुजरने के लिए शुल्क लेने की योजना बना रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि यह शुल्क क्रिप्टोकरेंसी में लिया जा सकता है।
इसके अलावा, समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि कुछ धोखेबाज खुद को अधिकारी बताकर जहाजों से क्रिप्टो में भुगतान मांग रहे हैं।
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इन्हीं खबरों के चलते भ्रम की स्थिति बनी और कई जगह यह मान लिया गया कि भारत ने भी ऐसा भुगतान किया है। सरकार ने अब इन सभी बातों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मार्ग
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। भारत के लिए यह और भी अहम है क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा तेल और गैस इसी मार्ग से आता है। अगर इस रास्ते पर कोई रुकावट आती है, तो इसका असर सीधे ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। इसलिए भारत लगातार इस क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
रक्षा मंत्री ने भी हाल ही में कहा था कि इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा भारत के लिए सीधा असर डालती है। यही वजह है कि सरकार इस मामले में सतर्क है और हर कदम सोच समझकर उठा रही है।
आगे की स्थिति पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में अफवाहें तेजी से फैल सकती हैं, खासकर जब सुरक्षा स्थिति स्पष्ट न हो। ऐसे में आधिकारिक बयानों को ही आधार मानना जरूरी है।
भारत ने यह भी संकेत दिया है कि वह अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर बातचीत जारी है।
फिलहाल सरकार का रुख साफ है कि न तो कोई नकद भुगतान हुआ है और न ही क्रिप्टो का इस्तेमाल किया गया है। आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति पर निर्भर करेगा कि जहाजों की आवाजाही कितनी सामान्य हो पाती है।
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