
हरियाणा में LPNT क्रिप्टो निवेश घोटाले की जांच, 3% से 6% मासिक रिटर्न का दिया था लालच
हरियाणा के पिंजौर में LPNT क्रिप्टो निवेश योजना से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि 3% से 6% मासिक रिटर्न का वादा कर निवेश कराया गया था।

हरियाणा के पंचकूला जिले के पिंजौर में क्रिप्टोकरेंसी निवेश से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें दुबई स्थित कंपनी Luxurious Pro Network Token (LPNT) की निवेश योजना में पैसा लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इस योजना में हर महीने 3% से 6% तक रिटर्न और 12 से 15 महीनों में निवेश दोगुना करने का वादा किया गया था।
Hindustan Times की 13 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ताओं जसविंदर कौर और गुरदीप सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने 2021 से 2022 के बीच इस योजना में निवेश किया था। शुरुआत में उन्हें लाभांश के रूप में भुगतान मिला, लेकिन फरवरी 2025 में भुगतान बंद हो गया। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। हालांकि, अभी तक आरोप अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
कैसे निवेश योजना में फंसने का आरोप लगा?
शिकायत के मुताबिक, पिंजौर के पास करनपुर गांव की निवासी जसविंदर कौर और गुरदीप सिंह को पूजा नाम की महिला ने LPNT की योजना से परिचित कराया था। आरोप है कि पूजा ने खुद को कंपनी की प्रमुख टीम का सदस्य बताया और निवेश पर नियमित कमाई का भरोसा दिलाया।
शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने 2021 और 2022 के दौरान अलग-अलग रकम निवेश की। इसमें चेक के जरिए दिए गए ₹3 लाख भी शामिल थे। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में दोनों की ओर से निवेश की गई कुल रकम या कथित नुकसान का पूरा ब्योरा नहीं दिया गया है।
ऐसी योजनाओं में नियमित और ऊंचे रिटर्न का वादा निवेशकों को आकर्षित कर सकता है। लेकिन केवल शुरुआती भुगतान मिलने से किसी कंपनी या निवेश योजना की विश्वसनीयता साबित नहीं होती। इस मामले में पुलिस को यह जांचना होगा कि निवेश की रकम कहां गई, भुगतान क्यों बंद हुआ और योजना के संचालन में नामजद लोगों की क्या भूमिका थी।
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FIR में चार लोगों के नाम
पुलिस ने पूजा, छत्तर सिंह, उनकी पत्नी कृष्णा राणा और उनके बेटे वीरेंद्र राणा के नाम प्राथमिकी में दर्ज किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी हरियाणा के कालका क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल, आपराधिक धमकी और साजिश से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कुछ धाराएं भी शामिल हैं।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपियों में से किसी को गिरफ्तार किया गया है या नहीं। पुलिस ने कथित लेनदेन की पूरी राशि और पैसों के प्रवाह का भी विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है। LPNT से प्रतिक्रिया मांगे जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है, लेकिन प्रकाशन के समय तक जवाब नहीं मिला था। इसलिए मामले से जुड़े आरोपों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
हरियाणा में क्रिप्टो निवेश धोखाधड़ी के अन्य मामले
पिंजौर का मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में ऊंचे रिटर्न का वादा करने वाली निवेश योजनाओं को लेकर शिकायतें दर्ज हो रही हैं। अक्टूबर में जयपुर में पुलिस ने कथित तौर पर फर्जी क्रिप्टो वेबसाइटों के जरिए करीब ₹100 करोड़ की निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया था।
देहरादून में भी एक कारोबारी ने ऑनलाइन विदेशी मुद्रा और क्रिप्टो निवेश योजना में करीब ₹1.5 करोड़ गंवाने का आरोप लगाया। उस मामले में शिकायतकर्ता ने हर महीने 5% से 8% ब्याज और 15% तक मासिक रिटर्न का वादा किए जाने की बात कही थी। ये अलग-अलग मामले हैं और उपलब्ध रिपोर्टों में इनके LPNT मामले से जुड़े होने का कोई संकेत नहीं है।
निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पिंजौर की घटना निवेशकों के लिए एक अहम चेतावनी है। क्रिप्टो बाजार में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के अलावा धोखाधड़ी का जोखिम भी मौजूद रहता है। किसी योजना में निवेश करने से पहले कंपनी की पहचान, कारोबार का वास्तविक आधार, धन निकालने की शर्तें और संबंधित नियामकीय जानकारी की जांच जरूरी है।
हर महीने तय ऊंचा रिटर्न या कम समय में रकम दोगुनी करने का दावा अपने आप में जोखिम का संकेत हो सकता है। निवेशकों को केवल परिचितों की सिफारिश, शुरुआती भुगतान या आकर्षक प्रचार के आधार पर पैसा नहीं लगाना चाहिए।
फिलहाल पिंजौर मामले में पुलिस की जांच जारी है। आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि जांचकर्ता निवेश की रकम, संबंधित खातों और आरोपियों की कथित भूमिका के बारे में क्या सबूत जुटाते हैं।
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