
Bengaluru Crypto Scam: $93.58 लाख की ठगी से खुला बड़ा राज, पुलिस को मिले 507 म्यूल अकाउंट
बेंगलुरु में $93.58 लाख की ऑनलाइन निवेश ठगी की जांच में 507 से ज्यादा म्यूल बैंक अकाउंट और Binance वॉलेट का कनेक्शन सामने आया है। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

बेंगलुरु में एक ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी की जांच करते हुए पुलिस ने ऐसे नेटवर्क का पता लगाया है, जिसके तार देश के कई राज्यों के साथ विदेशों तक जुड़े होने की आशंका है। बेंगलुरु साइबर पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, एक व्यक्ति को फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग योजना के जरिए $93.58 लाख की रकम गंवानी पड़ी थी। जांच आगे बढ़ी तो आरोपियों के मोबाइल फोन से 507 से ज्यादा ऐसे बैंक खातों की जानकारी मिली, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।
जांच में Binance वॉलेट का इस्तेमाल किए जाने और WhatsApp तथा Telegram के जरिए आरोपियों और दूसरे लोगों के बीच संपर्क के भी संकेत मिले हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
WhatsApp ग्रुप से शुरू हुई ठगी
मामला तब सामने आया जब बेंगलुरु के एक निवासी ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे WhatsApp पर एक लिंक भेजा गया था। लिंक खोलने के बाद उसे "EL Investment Strategies Discussion" नाम के ग्रुप में जोड़ दिया गया। पुलिस के अनुसार, इस ग्रुप में हर दिन ट्रेडिंग और निवेश से जुड़ी जानकारियां साझा की जाती थीं।
इसके बाद पीड़ित को एक डीमैट खाता खोलने और शुरुआत में $50,000 निवेश करने के लिए कहा गया। शुरुआती निवेश के बाद उसे अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी दी गई और किस्तों में और रकम जमा करने के लिए तैयार किया गया। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित ने कुल $93.58 लाख ट्रांसफर किए, लेकिन उसे न तो वादा किया गया रिटर्न मिला और न ही उसकी रकम वापस की गई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी कानून और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
507 म्यूल अकाउंट से खुला बड़ा नेटवर्क
जांच का सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने आरोपियों से जब्त छह मोबाइल फोन की जांच की। पुलिस के मुताबिक, इन फोन से 507 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों की जानकारी मिली। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति की अवैध या धोखाधड़ी से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जाता है।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने अलग-अलग लोगों से व्यक्तिगत, कॉरपोरेट और ट्रस्ट से जुड़े बैंक खाते, नेट बैंकिंग की जानकारी और उनसे जुड़े सिम कार्ड कमीशन के बदले हासिल किए थे। इन खातों के मालिकों को कुछ मामलों में होटल में ठहराया गया और उनके मोबाइल फोन में कथित तौर पर ZNPAY समेत ऐसे APK इंस्टॉल किए गए जो बैंक से आने वाले SMS और OTP को आगे भेज सकते थे।
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पुलिस को जांच में 51 से ज्यादा APK फाइलों के इस्तेमाल के भी संकेत मिले हैं। इनका कथित इस्तेमाल बैंक खातों को दूर से चलाने और साइबर धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया गया।
रकम का रास्ता Crypto तक पहुंचा
पुलिस के अनुसार, इन बैंक खातों के जरिए कई साइबर अपराधों से जुड़ी रकम को आगे भेजा गया। जांच में सामने आया कि कुछ खातों में करीब $13 लाख और एक अन्य खाते में $38 लाख से ज्यादा की साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी रकम ट्रांसफर हुई थी। पुलिस ने यह भी पाया कि इन बैंक खातों के खिलाफ दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक और दूसरे राज्यों में पहले से साइबर अपराध के मामले दर्ज थे।
जांच में Binance वॉलेट का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध से हासिल रकम प्राप्त करने के लिए किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे पुलिस को इस नेटवर्क में क्रिप्टो की भूमिका की भी जांच करनी पड़ रही है। हालांकि, इस स्तर पर यह स्पष्ट नहीं है कि पूरी ठगी की रकम क्रिप्टो में बदली गई थी या सिर्फ नेटवर्क के एक हिस्से में क्रिप्टो वॉलेट का इस्तेमाल हुआ।
Kolkata से Hong Kong और California तक कनेक्शन
डिजिटल जांच में पुलिस को इस नेटवर्क के संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के संकेत भी मिले हैं। पुलिस के अनुसार, WhatsApp और Telegram से जुड़े IP डेटा के शुरुआती विश्लेषण में Kolkata, Hong Kong और California से जुड़े नेटवर्क या IP लोकेशन सामने आए हैं। हालांकि, पुलिस ने साफ किया है कि इन विदेशी कनेक्शनों की अभी और जांच की जा रही है।
इस मामले में गिरफ्तार लोगों की पहचान झारखंड के अमित मिश्रा और बेंगलुरु के तौसीफ अहमद तथा परशुराम सदानंद कन्ननावर के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि कुछ अन्य प्रमुख संदिग्ध अभी फरार हैं और उनके साथ-साथ उन लोगों की पहचान भी की जा रही है जिन्होंने म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराए थे।
फिलहाल जांच का दायरा बढ़ रहा है। पुलिस WhatsApp, Telegram, ईमेल, बैंक लेनदेन और क्रिप्टो वॉलेट से मिले डिजिटल सबूतों को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क ने कितने लोगों को निशाना बनाया और कितनी रकम को अलग-अलग खातों के जरिए घुमाया गया।
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