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लेखक: Pratik Bhuyanस्टाफ संपादक
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भूटान ने $37 मिलियन के और बिटकॉइन बेचे, सरकारी क्रिप्टो वॉलेट का आकार घटा

भूटान ने अपने सरकारी क्रिप्टो वॉलेट से 519 बिटकॉइन ट्रांसफर किए हैं। इस कदम से क्रिप्टो बाजार में चर्चा तेज हो गई है और विशेषज्ञ संभावित बिक्री या वॉलेट प्रबंधन रणनीति पर नजर रख रहे हैं।

भूटान ने $37 मिलियन के और बिटकॉइन बेचे, सरकारी क्रिप्टो वॉलेट का आकार घटा
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भूटान सरकार ने अपने संप्रभु क्रिप्टो वॉलेट से 519 BTC ट्रांसफर किए हैं। ब्लॉकचेन डेटा के सामने आने के बाद यह कदम क्रिप्टो बाजार में चर्चा का विषय बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रांसफर देश की डिजिटल संपत्तियों के प्रबंधन या संभावित बिक्री की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

ब्लॉकचेन एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा ट्रैक किए गए ऑनचेन डेटा के अनुसार, यह ट्रांसफर सरकार से जुड़े वॉलेट से किया गया है। यह गतिविधि ऐसे समय में सामने आई है जब कई बड़े संस्थागत निवेशक और सरकारें अपनी क्रिप्टो होल्डिंग्स में बदलाव कर रही हैं।

भूटान उन कुछ देशों में शामिल है जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में चुपचाप बड़ी मात्रा में बिटकॉइन जमा किया है। इस छोटे हिमालयी देश ने अपनी अतिरिक्त जलविद्युत ऊर्जा का उपयोग करके बिटकॉइन माइनिंग शुरू की थी, जिससे सरकार ने डिजिटल संपत्तियों का बड़ा भंडार तैयार किया।

सरकारी निवेश फंड करता है क्रिप्टो प्रबंधन

भूटान की डिजिटल संपत्तियों का प्रबंधन मुख्य रूप से उसके सरकारी निवेश फंड Druk Holding and Investments (DHI) द्वारा किया जाता है। यही संस्था देश के बिटकॉइन माइनिंग प्रोजेक्ट्स और क्रिप्टो रिजर्व को संभालती है।

हाल के वर्षों में यह फंड समय-समय पर अपने वॉलेट से बिटकॉइन ट्रांसफर करता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रांसफर अक्सर छोटे-छोटे हिस्सों में किए जाते हैं ताकि बाजार पर अचानक बड़ा प्रभाव न पड़े। कई बार ऐसे ट्रांसफर संभावित ओटीसी ट्रेड या एक्सचेंज पर बिक्री से पहले भी किए जाते हैं।

ताजा ट्रांसफर भी उसी पैटर्न का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

भूटान की बिटकॉइन होल्डिंग में गिरावट

डेटा से यह भी संकेत मिलता है कि पिछले कुछ समय में भूटान की बिटकॉइन होल्डिंग धीरे-धीरे कम हुई है। एक समय पर देश के पास लगभग 13,000 बिटकॉइन थे, लेकिन नियमित ट्रांसफर और संभावित बिक्री के कारण यह संख्या घटकर लगभग 4,000 से 5,000 बिटकॉइन के बीच रह गई है।

इसके बावजूद भूटान अभी भी दुनिया के उन देशों में शामिल है जिनके पास बड़ी सरकारी बिटकॉइन होल्डिंग है। मौजूदा बाजार कीमतों के आधार पर इसकी कुल कीमत सैकड़ों मिलियन डॉलर आंकी जाती है।

बाजार पर संभावित असर

क्रिप्टो बाजार में बड़े निवेशकों या सरकारों द्वारा किए गए ट्रांसफर को अक्सर ध्यान से देखा जाता है। अगर इतनी बड़ी मात्रा में बिटकॉइन एक्सचेंजों तक पहुंचती है तो इससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

विश्लेषकों के अनुसार, भूटान आमतौर पर $5 से $10 मिलियन के छोटे बैच में बिटकॉइन बेचता है। इससे बाजार पर अचानक दबाव नहीं पड़ता और कीमतों में तेज गिरावट से बचाव होता है।

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हालांकि 519 बिटकॉइन का ट्रांसफर अपेक्षाकृत बड़ा माना जा रहा है। इस कारण कुछ बाजार पर्यवेक्षक यह देख रहे हैं कि क्या आने वाले दिनों में और ट्रांसफर होते हैं या यह सिर्फ वॉलेट मैनेजमेंट से जुड़ी गतिविधि है।

जलविद्युत से माइनिंग की अनोखी रणनीति

भूटान की क्रिप्टो रणनीति काफी अलग मानी जाती है। देश ने अपनी प्रचुर जलविद्युत ऊर्जा का उपयोग करके बिटकॉइन माइनिंग शुरू की थी। इससे ऊर्जा का अतिरिक्त उत्पादन उपयोग में आया और सरकार को डिजिटल संपत्तियों के रूप में अतिरिक्त राजस्व मिला।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉडल पर्यावरण के लिहाज से अपेक्षाकृत टिकाऊ माना जाता है क्योंकि इसमें नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल होता है।

आगे क्या हो सकता है

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि 519 बिटकॉइन का ट्रांसफर बिक्री के लिए किया गया है या यह सिर्फ वॉलेट पुनर्गठन का हिस्सा है।

लेकिन इतना तय है कि भूटान की क्रिप्टो गतिविधियां अब वैश्विक बाजार की नजर में हैं। आने वाले समय में यदि सरकार अपनी बिटकॉइन होल्डिंग्स को और कम करती है तो इसका असर बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।

क्रिप्टो विशेषज्ञों का मानना है कि भूटान का उदाहरण दिखाता है कि छोटे देश भी डिजिटल संपत्तियों का उपयोग अपनी आर्थिक रणनीति में कर सकते हैं। हालांकि ऐसी नीतियों के साथ बाजार जोखिम भी जुड़े रहते हैं।

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