Cointelegraph
DOGE$0.08476 4.54%
TRX$0.3445 1.96%
LINK$12.03 3.44%
ZEC$1,444.81 5.75%
ADA$0.2205 2.95%
XRP$1.37 4.25%
ETH$2,576.91 2.26%
BTC$80,462.22 0.99%
XMR$534.94 7.54%
BNB$750.67 2.65%
XLM$0.1899 4.96%
SOL$108.00 3.15%
HYPE$90.75 1.88%
Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

Breaking: भारत में सोने से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा क्रिप्टो का चलन

बाजारप्रकाशित4 सित॰ 2026

भारत में करीब 9.75 करोड़ लोग क्रिप्टोकरेंसी रखते हैं, जबकि लगभग 70 करोड़ वयस्कों के पास सोना है। जानिए कैसे स्मार्टफोन, यूपीआई और युवा निवेशक भारत के निवेश बाजार को बदल रहे हैं।

in-volatile-markets-rwas-like-gold-are-a-lifeline

भारत में सोना लंबे समय से निवेश और बचत का सबसे भरोसेमंद साधन माना जाता है। देश के करोड़ों परिवारों के पास किसी न किसी रूप में सोना मौजूद है। हालांकि, अब डिजिटल संपत्तियों की बढ़ती लोकप्रियता इस पारंपरिक निवेश व्यवस्था को नई चुनौती दे रही है। भारत में क्रिप्टो रखने वालों की संख्या करीब 9.75 करोड़ तक पहुंच गई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि देश के निवेशकों की पसंद में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार से जुड़ी वेबसाइट CryptoRank पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 70 करोड़ वयस्कों के पास सोना है। यह संख्या देश के वयस्कों की लगभग 75% आबादी के बराबर है। इसके मुकाबले करीब 9.75 करोड़ लोग क्रिप्टोकरेंसी रखते हैं, जो वयस्क आबादी का लगभग 10.2% है। आंकड़ों से साफ है कि सोने की पहुंच अब भी क्रिप्टो से कई गुना ज्यादा है, लेकिन डिजिटल संपत्तियों का विस्तार तेजी से हो रहा है।

सोने की पकड़ अब भी मजबूत

भारत में सोना केवल निवेश का साधन नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक परंपरा, सामाजिक सुरक्षा और जरूरत के समय काम आने वाली संपत्ति भी माना जाता है। शादी, त्योहार और धार्मिक अवसरों पर सोने की खरीदारी आज भी आम है। इसके अलावा, कई परिवार सोने को महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता से बचाव के तौर पर देखते हैं।

सोने की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसे लोग लंबे समय से समझते और इस्तेमाल करते आए हैं। ग्रामीण और छोटे शहरों में भी सोना आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर इसके बदले कर्ज भी लिया जा सकता है। इसी वजह से क्रिप्टोकरेंसी की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद सोने की स्थिति फिलहाल कमजोर नहीं हुई है।

हालांकि, सोने में निवेश का तरीका भी बदल रहा है। कई निवेशक अब आभूषणों के अलावा सोना आधारित योजनाओं और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि भारतीय निवेशक परंपरा और नई तकनीक के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

स्मार्टफोन और यूपीआई से बढ़ा क्रिप्टो का इस्तेमाल

भारत में क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते चलन के पीछे कई कारण हैं। इनमें स्मार्टफोन का तेजी से प्रसार, सस्ते इंटरनेट की उपलब्धता और डिजिटल भुगतान का बढ़ता इस्तेमाल प्रमुख हैं। यूपीआई के कारण करोड़ों लोग पहले ही मोबाइल के जरिए पैसे भेजने और भुगतान करने के आदी हो चुके हैं।

यही डिजिटल आदत अब निवेश के क्षेत्र में भी दिखाई दे रही है। युवा निवेशक मोबाइल ऐप के जरिए शेयर, म्यूचुअल फंड और क्रिप्टोकरेंसी खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। क्रिप्टो एक्सचेंजों तक आसान पहुंच ने भी इस प्रक्रिया को तेज किया है।

क्रिप्टो बाजार में कम रकम से निवेश शुरू करने की सुविधा भी नए निवेशकों को आकर्षित करती है। कई लोग इसे पारंपरिक निवेश विकल्पों के मुकाबले ज्यादा तेज और वैश्विक बाजार से जुड़ा हुआ मानते हैं। हालांकि, इसकी कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बना रहता है।

क्या आप जानते हैं: 38% गिरने के बाद क्या ये क्रिप्टोकरेंसी कर सकती है सबसे बड़ी तेजी?

युवा निवेशकों की पसंद में बदलाव

क्रिप्टोकरेंसी का सबसे ज्यादा प्रभाव युवा निवेशकों के बीच देखा जा रहा है। नई पीढ़ी डिजिटल संपत्तियों को केवल भुगतान के साधन के रूप में नहीं, बल्कि निवेश और तकनीकी बदलाव के हिस्से के तौर पर भी देखती है।

Bitcoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी को कुछ निवेशक डिजिटल सोने के रूप में देखते हैं। वहीं, Ethereum और अन्य ब्लॉकचेन आधारित संपत्तियों को नई तकनीक, विकेंद्रीकृत वित्त और डिजिटल सेवाओं से जोड़कर देखा जाता है। इससे क्रिप्टो की चर्चा केवल कीमतों तक सीमित नहीं रह गई है।

फिर भी, विशेषज्ञों के अनुसार क्रिप्टो में निवेश करने वालों को जोखिमों को समझना जरूरी है। बाजार में अचानक बड़ी गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, नियमों में बदलाव, साइबर धोखाधड़ी और गलत जानकारी के कारण निवेशकों को नुकसान हो सकता है।

क्या क्रिप्टो सोने की जगह ले पाएगा?

भारत में क्रिप्टो रखने वालों की संख्या करीब 10 करोड़ के आसपास पहुंचना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण बदलाव है। लेकिन फिलहाल इसके आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि क्रिप्टो सोने की जगह ले रहा है। सोने की सामाजिक और आर्थिक भूमिका बहुत गहरी है, जबकि क्रिप्टो अभी अपेक्षाकृत नया निवेश विकल्प है।

आने वाले वर्षों में दोनों संपत्तियां अलग-अलग जरूरतों को पूरा कर सकती हैं। सोना स्थिरता, परंपरा और सुरक्षा से जुड़ा रह सकता है, जबकि क्रिप्टो डिजिटल अर्थव्यवस्था और नई तकनीक में भागीदारी का माध्यम बन सकता है।

इस तरह भारत में निवेश का भविष्य केवल सोने या क्रिप्टो में से किसी एक को चुनने तक सीमित नहीं होगा। संभव है कि आने वाले समय में भारतीय निवेशक अपने पोर्टफोलियो में दोनों को अलग-अलग भूमिका के साथ शामिल करें। फिलहाल आंकड़े यही बताते हैं कि सोने का दबदबा कायम है, लेकिन क्रिप्टो की पहुंच तेजी से बढ़ रही है।

ऐसी ही और ख़बरों और क्रिप्टो विश्लेषण के लिए हमें X और LinkedIn पर फ़ॉलो करें, ताकि कोई भी अपडेट आपसे न छूटे!

यह लेख Cointelegraph की Editorial Policy के अनुसार तैयार किया गया है और केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह निवेश सलाह या अनुशंसाएं नहीं है। सभी निवेश और व्यापार में जोखिम होता है; पाठकों को स्वतंत्र शोध करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

इस विषय पर अधिक