
दो हफ्ते के निचले स्तर पर फिसला Bitcoin, अमेरिकी शेयर बाजार की कमजोरी से बढ़ा दबाव
Bitcoin दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया है। एशियाई बाजारों में सुधार के बावजूद अमेरिकी शेयरों में कमजोरी, फेड की अनिश्चितता और वैश्विक जोखिमों ने क्रिप्टो बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।

क्रिप्टो बाजार में एक बार फिर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई है। दिलचस्प बात यह है कि एशियाई शेयर बाजारों में सुधार देखने के बावजूद अमेरिकी शेयर बाजार उसी राह पर नहीं चल सका, जिसका असर सीधे डिजिटल परिसंपत्तियों पर भी पड़ा।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों के बीच फिलहाल सतर्कता का माहौल है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और तकनीकी शेयरों में कमजोरी ने जोखिम वाली परिसंपत्तियों में निवेश को प्रभावित किया है। इसी वजह से Bitcoin हाल के दिनों में लगातार दबाव में बना हुआ है।
एशियाई बाजार संभले, लेकिन अमेरिका में नहीं लौटा भरोसा
सप्ताह की शुरुआत में एशिया के कुछ प्रमुख शेयर बाजारों में सुधार देखने को मिला। इससे उम्मीद थी कि अमेरिकी बाजार भी तेजी दिखाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विशेष रूप से तकनीकी कंपनियों से जुड़े शेयरों में कमजोरी बनी रही, जिससे निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह कम हो गया।
विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में Bitcoin और अमेरिकी तकनीकी शेयरों के बीच संबंध पहले की तुलना में मजबूत हुआ है। जब निवेशक तकनीकी शेयरों से पैसा निकालते हैं, तो उसका असर अक्सर क्रिप्टो बाजार पर भी दिखाई देता है।
यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में सुधार के बावजूद Bitcoin अपनी गिरावट को रोक नहीं पाया और दो सप्ताह के निचले स्तर तक पहुंच गया।
फेड की नीति पर टिकी बाजार की नजर
इस समय निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर है। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है और बाजार यह समझने की कोशिश कर रहा है कि आने वाले महीनों में फेड किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो जोखिम वाली परिसंपत्तियों में निवेश कम हो सकता है। दूसरी ओर, यदि फेड नरम रुख अपनाता है, तो Bitcoin सहित क्रिप्टो बाजार को राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशक नए निवेश करने के बजाय इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं। इसी कारण बाजार में कारोबार की रफ्तार भी अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।
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तकनीकी संकेत क्या बता रहे हैं?
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, Bitcoin के लिए 63,000 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र बन गया है। हालिया कारोबार में कीमत इस स्तर के आसपास पहुंची और उसके बाद कुछ सुधार भी देखने को मिला। हालांकि अभी तक बाजार में मजबूत खरीदारी के संकेत नहीं मिले हैं।
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यदि Bitcoin 63,000 डॉलर से नीचे टिकता है, तो बिकवाली और बढ़ सकती है। वहीं यदि कीमत फिर से 65,000 डॉलर के ऊपर पहुंचती है, तो बाजार में सकारात्मक धारणा लौट सकती है।
बाजार जानकार यह भी मानते हैं कि फिलहाल संस्थागत निवेशक बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। जब तक व्यापक आर्थिक स्थिति और फेड की नीति स्पष्ट नहीं होती, तब तक Bitcoin सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में तीन प्रमुख कारक Bitcoin की दिशा तय करेंगे। पहला, अमेरिकी शेयर बाजार का प्रदर्शन। दूसरा, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति। तीसरा, वैश्विक आर्थिक और भू राजनीतिक घटनाक्रम।
यदि अमेरिकी शेयर बाजार में स्थिरता लौटती है और निवेशकों का जोखिम लेने का भरोसा बढ़ता है, तो Bitcoin में भी सुधार देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, यदि तकनीकी शेयरों में बिकवाली जारी रहती है और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो क्रिप्टो बाजार पर दबाव बना रह सकता है.
फिलहाल Bitcoin ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां उसकी चाल केवल क्रिप्टो बाजार तक सीमित नहीं है। वैश्विक शेयर बाजार, केंद्रीय बैंक की नीतियां और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता भी उसकी कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। आने वाले कुछ सप्ताह यह स्पष्ट करेंगे कि मौजूदा गिरावट केवल अस्थायी है या बाजार किसी नए रुझान की ओर बढ़ रहा है।
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