
Bitcoin $63,000 पर फिसला, फेड के फैसले का इंतजार, Clarity Act की उम्मीदें कमजोर
फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले और अमेरिकी क्लैरिटी एक्ट को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच Bitcoin $63,000 तक फिसल गया।

क्रिप्टो बाजार में एक बार फिर बिकवाली का दबाव देखने को मिला है। दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल मुद्रा Bitcoin मंगलवार को 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर $63,000 के करीब पहुंच गई, जो पिछले 10 दिनों का सबसे निचला स्तर है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का आगामी ब्याज दर फैसला और दूसरा, अमेरिका के बहुचर्चित क्लैरिटी एक्ट को लेकर बढ़ती अनिश्चितता।
हाल के सप्ताहों में Bitcoin ने $64,000 से ऊपर टिके रहने की कोशिश की थी, लेकिन निवेशकों ने फेड की बैठक से पहले जोखिम कम करना शुरू कर दिया। इसके साथ ही अमेरिकी शेयर बाजार में कमजोरी और क्रिप्टो से जुड़े शेयरों में गिरावट ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशक नए निवेश के बजाय फेड की टिप्पणी और अमेरिकी संसद में लंबित क्रिप्टो कानून की दिशा का इंतजार कर रहे हैं।
फेड के फैसले पर टिकी बाजार की नजर
क्रिप्टो बाजार लंबे समय से अमेरिकी मौद्रिक नीति से प्रभावित होता रहा है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तब जोखिम वाली परिसंपत्तियों में निवेश कम हो जाता है। यही वजह है कि फेडरल रिजर्व की प्रत्येक बैठक से पहले बाजार में सतर्कता बढ़ जाती है।
इस बार भी निवेशकों की नजर इस बात पर है कि फेड भविष्य में ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत देता है। यदि केंद्रीय बैंक सख्त रुख बनाए रखता है, तो जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बना रह सकता है। वहीं यदि भविष्य में नरमी के संकेत मिलते हैं, तो बाजार में राहत देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल अधिकांश बड़े निवेशक कोई बड़ा दांव लगाने से बच रहे हैं और फेड की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।
क्लैरिटी एक्ट को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
बाजार पर असर डालने वाला दूसरा बड़ा कारण अमेरिका का डिजिटल परिसंपत्ति बाजार से जुड़ा क्लैरिटी एक्ट है। इस विधेयक का उद्देश्य क्रिप्टो बाजार के लिए स्पष्ट नियामकीय ढांचा तैयार करना है। उद्योग जगत लंबे समय से इसकी मांग करता रहा है क्योंकि इससे कंपनियों और निवेशकों को नियमों को लेकर स्पष्टता मिल सकती है।
हालांकि हाल के दिनों में संकेत मिले हैं कि अमेरिकी सीनेट में अन्य विधायी प्राथमिकताओं के कारण इस विधेयक पर फैसला फिलहाल टल सकता है। इससे निवेशकों की उम्मीदों को झटका लगा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह कानून जल्द पारित नहीं होता, तो क्रिप्टो बाजार में अनिश्चितता कुछ समय और बनी रह सकती है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि स्पष्ट नियमों की कमी संस्थागत निवेशकों के लिए अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
क्या यह केवल अस्थायी गिरावट है?
बाजार विश्लेषकों की राय इस मुद्दे पर अलग अलग है। कुछ का मानना है कि मौजूदा गिरावट मुख्य रूप से अल्पकालिक अनिश्चितता का परिणाम है। यदि फेड से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और क्लैरिटी एक्ट पर आगे प्रगति होती है, तो Bitcoin में दोबारा खरीदारी लौट सकती है।
दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक व्यापक आर्थिक माहौल और नियामकीय स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक कीमतों में उतार चढ़ाव बना रह सकता है।
हालांकि यह भी देखा गया है कि हाल के महीनों में स्पॉट Bitcoin निवेश उत्पादों के जरिए संस्थागत निवेशकों की रुचि पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसलिए कई जानकार मौजूदा गिरावट को दीर्घकालिक कमजोरी के बजाय अस्थायी दबाव मान रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार दो बड़े घटनाक्रमों का इंतजार कर रहा है। पहला, फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों पर रुख और दूसरा, अमेरिका में क्रिप्टो नियमन से जुड़े विधेयकों की प्रगति।
यदि दोनों मोर्चों पर सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो Bitcoin में फिर से तेजी लौट सकती है। लेकिन यदि अनिश्चितता बनी रहती है, तो अल्पकाल में कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।
फिलहाल $63,000 के आसपास पहुंची Bitcoin की कीमत यह दिखाती है कि निवेशक सतर्क हैं और बड़े फैसलों से पहले जोखिम कम करने की रणनीति अपना रहे हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह गिरावट केवल अस्थायी है या बाजार को नई दिशा देने वाला बड़ा मोड़ साबित होगी।
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