ब्लॉकचेन और क्रिप्टो जगत के प्रमुख चेहरों में शामिल विटालिक ब्यूटिरिन ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि वह अब फ्यूचर ऑफ लाइफ इंस्टीट्यूट के वर्तमान रुख से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। यह वही संस्था है जिसे उन्होंने 2021 में बड़ी मात्रा में Shiba Inu टोकन दान किए थे।
ब्यूटिरिन के अनुसार, उन्होंने यह दान उस समय दिया था जब संस्था वैश्विक अस्तित्वगत जोखिमों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जैव-सुरक्षा और परमाणु खतरों पर शोध और जागरूकता बढ़ाने की व्यापक योजना लेकर आई थी। यही दृष्टिकोण उन्हें संस्था का समर्थन करने के लिए प्रेरित करने वाला मुख्य कारण था।
‘समय के साथ संस्था की रणनीति बदल गई है’
अब उनका कहना है कि समय के साथ संस्था की रणनीति बदल गई है। ब्यूटिरिन के मुताबिक, संगठन ने तकनीकी अनुसंधान और शिक्षा पर केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े राजनीतिक और नीतिगत अभियानों पर अधिक जोर देना शुरू कर दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि यह बदलाव उस मूल योजना से अलग है, जिसे देखकर उन्होंने दान देने का फैसला किया था।
$500 मिलियन तक पहुँचा दान
यह पूरा मामला 2021 के ‘मीम-कॉइन बूम’ से जुड़ा है। उस समय Shiba Inu प्रोजेक्ट के संस्थापक ने बड़ी मात्रा में SHIB टोकन ब्यूटिरिन के सार्वजनिक वॉलेट में भेज दिए थे। बाद में ब्यूटिरिन ने इन टोकनों का बड़ा हिस्सा अलग-अलग सामाजिक और शोध संस्थाओं को दान कर दिया।
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उसी दौरान SHIB की कीमत में तेजी से उछाल आया और दान की वास्तविक कीमत उम्मीद से कहीं अधिक बढ़ गई। ब्यूटिरिन को शुरुआत में लगा था कि बाजार की सीमित तरलता के कारण संस्था केवल 1 से 2.5 करोड़ डॉलर के आसपास के टोकन ही बेच पाएगी। लेकिन बाद में यह राशि लगभग $500 मिलियन तक पहुँच गई।
AI नीति पर ब्यूटिरिन की चिंता
ब्यूटिरिन ने खास तौर पर चेतावनी दी कि AI सुरक्षा को लेकर बड़े-पैमाने पर राजनीतिक अभियान चलाने से उल्टा असर भी हो सकता है। उनके अनुसार, यदि सरकारें या बड़ी कंपनियाँ तकनीक पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करें तो इससे वैश्विक तनाव और केंद्रीकरण बढ़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि AI से जुड़े जोखिमों का समाधान केवल राजनीतिक या नियामकीय दबाव से नहीं, बल्कि तकनीकी समाधानों से निकलना चाहिए। उदाहरण के तौर पर उन्होंने साइबर सुरक्षा, सुरक्षित हार्डवेयर और महामारी पहचान प्रणाली जैसी तकनीकों के विकास को अधिक प्रभावी उपाय बताया।
दान और परोपकार के लिए प्रसिद्ध
ब्यूटिरिन क्रिप्टो दुनिया में अपनी परोपकारी गतिविधियों के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने पहले भी विभिन्न शोध और सामाजिक परियोजनाओं को बड़ी मात्रा में क्रिप्टो दान दिया है, जिनमें भारत के कोविड-19 राहत कोष और वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान शामिल हैं।
निष्कर्ष
विटालिक ब्यूटिरिन का यह बयान क्रिप्टो समुदाय में महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रहा है, खासकर इस सवाल पर कि बड़े क्रिप्टो दान का उपयोग कैसे और किस दिशा में होना चाहिए। यह मामला न केवल क्रिप्टो परोपकार की पारदर्शिता पर चर्चा को तेज करेगा, बल्कि AI नीति और तकनीकी नवाचार के बीच संतुलन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
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