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दक्षिण भारत में क्रिप्टो निवेश के मामले में तेलंगाना सबसे पीछे, नई रिपोर्ट में खुलासा

Giottus की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण भारत में क्रिप्टो निवेश के मामले में तेलंगाना सबसे कम सक्रिय बाजार है, जबकि तमिलनाडु इस क्षेत्र में सबसे आगे है।

दक्षिण भारत में क्रिप्टो निवेश के मामले में तेलंगाना सबसे पीछे, नई रिपोर्ट में खुलासा
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क्रिप्टोकरेंसी निवेश को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना इस क्षेत्र का सबसे कम सक्रिय क्रिप्टो बाजार बनकर उभरा है। यह जानकारी क्रिप्टो एक्सचेंज Giottus के आंकड़ों के आधार पर सामने आई है, जिसमें दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों में निवेश और ट्रेडिंग गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में क्रिप्टो ट्रेडिंग और निवेश काफी सक्रिय है, जबकि तेलंगाना में अपेक्षाकृत कम भागीदारी देखने को मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतर निवेशकों के व्यवहार, बाजार की पहुंच और ट्रेडिंग की आदतों से जुड़ा हो सकता है।

दक्षिण भारत में तमिलनाडु सबसे आगे

रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिण भारत के पांच राज्यों में तमिलनाडु क्रिप्टो गतिविधि के मामले में सबसे आगे है। यहां निवेशकों की संख्या और कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम दोनों सबसे अधिक हैं। आंकड़ों के अनुसार, इन पांच राज्यों के कुल ट्रेडरों में लगभग 70% हिस्सा तमिलनाडु का है, जो बाकी चार राज्यों के संयुक्त हिस्से से भी अधिक है।

विशेषज्ञों के अनुसार, तमिलनाडु में उच्च शहरीकरण, बेहतर डिजिटल पहुंच और निवेश के प्रति सक्रिय रवैया इस बढ़त की प्रमुख वजह हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग नियमित रूप से क्रिप्टो ट्रेडिंग करते हैं, जिससे बाजार की गतिविधि मजबूत बनी रहती है।

तेलंगाना में अपेक्षाकृत कम सक्रियता

इसके विपरीत तेलंगाना में क्रिप्टो निवेश का स्तर अपेक्षाकृत कम पाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां निवेशकों की भागीदारी सीमित है और ट्रेडिंग गतिविधियां भी अन्य राज्यों की तुलना में कम दिखाई देती हैं।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि राज्य में क्रिप्टो निवेश पूरी तरह कम है। हैदराबाद जैसे शहरों में डिजिटल तकनीक और वित्तीय सेवाओं की मजबूत उपस्थिति के बावजूद निवेशकों का व्यवहार अपेक्षाकृत सतर्क माना जाता है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यहां निवेशक अक्सर लंबी अवधि की रणनीति अपनाते हैं और बार-बार ट्रेडिंग करने के बजाय सीमित निवेश करते हैं। इसी वजह से कुल ट्रेडिंग गतिविधि कम दिखाई दे सकती है।

हैदराबाद फिर भी महत्वपूर्ण क्रिप्टो केंद्र

दिलचस्प बात यह है कि देश के स्तर पर हैदराबाद अभी भी क्रिप्टो निवेश के बड़े शहरों में गिना जाता है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार यह शहर भारत में क्रिप्टो निवेश के मामले में चौथे स्थान पर है और यहां से कुल निवेश का लगभग 5.1% हिस्सा आता है।

हैदराबाद की एक खास बात यह भी है कि यहां महिला निवेशकों की संख्या काफी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार शहर में करीब 45% क्रिप्टो निवेशक महिलाएं हैं, जो देश के अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में सबसे अधिक अनुपात है।

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भारत में क्रिप्टो निवेश का बदलता रुझान

भारत में क्रिप्टो बाजार तेजी से बदल रहा है। कई रिपोर्टें बताती हैं कि अब बड़ी संख्या में निवेशक छोटे शहरों से भी इस क्षेत्र में आ रहे हैं। हाल के वर्षों में टियर-2 और टियर-3 शहरों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है और कुल क्रिप्टो गतिविधि का बड़ा हिस्सा अब इन्हीं क्षेत्रों से आता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म की उपलब्धता ने इस बदलाव को संभव बनाया है।

निवेश व्यवहार भी बन रहा बड़ा कारण

क्रिप्टो बाजार में अलग-अलग राज्यों के निवेशकों का व्यवहार भी काफी अलग देखा जा रहा है। कुछ जगहों पर लोग सक्रिय ट्रेडिंग करते हैं, जबकि कुछ जगहों पर निवेशक ज्यादा सावधानी बरतते हुए लंबे समय तक होल्ड करने की रणनीति अपनाते हैं।

तेलंगाना के मामले में यही प्रवृत्ति देखने को मिलती है। यहां के कई निवेशक तेजी से खरीद-फरोख्त करने के बजाय सीमित और सोच-समझकर निवेश करना पसंद करते हैं। इससे ट्रेडिंग वॉल्यूम कम दिखाई देता है, लेकिन यह निवेशकों की सतर्क रणनीति को भी दर्शाता है।

भविष्य में बदल सकता है परिदृश्य

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में तेलंगाना का क्रिप्टो बाजार भी तेजी से बढ़ सकता है। राज्य में मजबूत आईटी उद्योग, तकनीकी जागरूकता और स्टार्टअप इकोसिस्टम मौजूद है, जो डिजिटल निवेश को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

यदि निवेशकों की भागीदारी और ट्रेडिंग गतिविधि बढ़ती है, तो तेलंगाना भी दक्षिण भारत के प्रमुख क्रिप्टो बाजारों में शामिल हो सकता है। फिलहाल रिपोर्ट यह संकेत देती है कि क्षेत्रीय स्तर पर क्रिप्टो निवेश का स्वरूप अभी भी काफी असमान है और अलग-अलग राज्यों में इसका विकास अलग गति से हो रहा है।

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