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Rajeev Ranjan Roy द्वारा लिखितस्टाफ लेखकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल बने IMF के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर

ताजा खबरेंप्रकाशित29 अग॰ 2025

भारत की आर्थिक आवाज़ को वैश्विक मंच पर मिलेगा नया नेतृत्व; तीन साल के कार्यकाल के लिए नियुक्ति

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आरबीआई के पूर्व गवर्नर, अर्थशास्त्री और मौद्रिक नीति विशेषज्ञ डॉ उर्जित पटेल को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत का एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। नियुक्ति को केंद्र की नियुक्ति समिति (ACC) ने मंजूरी दे दी है, और तीन वर्ष की अवधि के लिए यह भूमिका सौंपी गई है।

डॉ उर्जित पटेल का यह नया पद सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि उनके समृद्ध अनुभव और भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी की गहराई का प्रतीक है। आईएमएफ में यह जिम्मेदारी उन्हें नीति-निर्माण की वैश्विक प्रक्रिया में सीधे भागीदार बनाने वाली है, जहां वह भारत के साथ-साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं की आवाज़ को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करेंगे।

उनकी शैक्षणिक यात्रा भी बेहद प्रेरणादायक रही है। 1963 में नैरोबी, केन्या में जन्मे उर्जित पटेल ने London School of Economics से B.Sc., ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से M.Phil., और Yale University से अर्थशास्त्र में Ph.D. हासिल की। Ph.D. के तुरंत बाद, 1990 में उन्होंने IMF में अपनी पहली भूमिका निभाई और अमेरिका, भारत, बहामास और म्यांमार जैसे देशों के डेस्क पर काम किया।

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वापसी भारत में हुई, जहां उन्होंने RBI में डिप्टी गवर्नर (2013-2016) और फिर गवर्नर (2016-2018) के रूप में कार्य किया। गवर्नरी के दौरान उनका मार्गदर्शन महत्त्वपूर्ण मौद्रिक निर्णयों और नीति सुधारों, विशेषकर इन्फ्लेशन-टार्गेटिंग फ्रेमवर्क और नोटबंदी जैसी महत्वपूर्ण पहलुओं में केंद्रित रहा। हालांकि, दिसंबर 2018 में “व्यक्तिगत कारणों” का हवाला देते हुए उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया, और अपनी अवधि से पहले इस्तीफा देने वाले पहले RBI गवर्नर बन गए।

इसके बाद उनका मार्ग NIPFP (National Institute of Public Finance and Policy) के अध्यक्षत्व और AIIB (Asian Infrastructure Investment Bank) में उपाध्यक्ष के रूप में देखा गया। यह काल उनके सार्वजनिक नीति और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सक्रिय योगदान का प्रमाण था।

अब IMF में उनके आगमन से भारत की अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक भागीदारी को नई दिशा मिलेगी। एक तरह से उनका करियर “फुल सर्कल” की तरह पूरा हो गया – जहाँ उन्होंने 1990 में IMF में शुरुआत की थी, वहीं अब एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में वे फिर उसी संस्थान में लौट आए हैं।

इस नियुक्ति से यह स्पष्ट होता है कि भारत न केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है, बल्कि वैश्विक वित्तीय फैसलों के केंद्र में अपनी जगह बना रहा है। और Dr Patel, जिन्होंने भारत में और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है, इस भूमिका में पूरी तरह सक्षम हैं।

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