देश में थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर मापी जाने वाली महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 2.13% दर्ज की गई है। यह पिछले महीने जनवरी में दर्ज 1.81% से अधिक है और लगभग 11 महीनों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार थोक स्तर पर कीमतों में यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं तथा विनिर्मित उत्पादों के महंगे होने के कारण हुई है।आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में थोक महंगाई लगातार चौथे महीने बढ़ी है। इससे पहले जनवरी में यह दर 1.81% और दिसंबर में 0.83% रही थी, जिससे स्पष्ट है कि हाल के महीनों में थोक स्तर पर कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी का रुझान बना हुआ है।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि उछाल का प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि इस उछाल का प्रमुख कारण रही। फरवरी में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर बढ़कर लगभग 1.85% हो गई, जबकि जनवरी में यह लगभग 1.41% थी।
सब्जियों की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई और इनकी महंगाई दर 4.73% दर्ज की गई। हालांकि यह जनवरी के मुकाबले कुछ कम है, फिर भी थोक बाजार में खाद्य कीमतों पर इसका प्रभाव बना हुआ है।
इसी तरह विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में भी हल्की बढ़ोतरी हुई है। फरवरी में विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई दर लगभग 2.92% दर्ज की गई, जो जनवरी में 2.86% थी। उद्योगों के लिए कच्चे माल और उत्पादन लागत बढ़ने से यह दबाव दिखाई दे रहा है।
ईंधन और ऊर्जा कीमतों में गिरावट जारी
हालांकि ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में कीमतों में गिरावट जारी रही। फरवरी में इस श्रेणी में कीमतें लगभग 3.78% कम रहीं, जबकि जनवरी में भी इनमें गिरावट दर्ज की गई थी। ईंधन कीमतों में गिरावट के कारण कुल महंगाई दर में संभावित बड़ी वृद्धि पर कुछ हद तक अंकुश लगा है।
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अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे माल और ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता का असर भी थोक महंगाई पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल और अन्य जिंसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव से घरेलू उत्पादन लागत प्रभावित हो रही है, जिसका असर थोक बाजारों में दिखाई दे रहा है।
खुदरा महंगाई दर केंद्रीय बैंक के लक्ष्य के भीतर
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि थोक मूल्य सूचकांक उत्पादन और थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है। इसके विपरीत खुदरा स्तर की महंगाई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से मापी जाती है, जो सीधे उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को दर्शाती है
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, थोक महंगाई में लगातार वृद्धि भविष्य में खुदरा महंगाई पर भी असर डाल सकती है, क्योंकि उत्पादन लागत बढ़ने पर कंपनियां उसका कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं तक स्थानांतरित करती हैं। हालांकि फिलहाल खुदरा महंगाई दर अभी भी केंद्रीय बैंक के लक्ष्य दायरे के भीतर बनी हुई है।
निष्कर्ष
फरवरी में थोक महंगाई का 2.13% तक पहुंचना यह संकेत देता है कि उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी लागतों में धीरे-धीरे दबाव बढ़ रहा है। खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि इसके प्रमुख कारण हैं, जबकि ईंधन कीमतों में गिरावट ने महंगाई को कुछ हद तक नियंत्रित रखा है। यदि वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर महंगाई की दिशा पर इसका असर पड़ सकता है।
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