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Jai Singla द्वारा लिखितस्टाफ संपादकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

RBI का क्रिप्टो पर सख्त रुख, Blockchain और Tokenization को बढ़ावा देगा India

ताजा खबरेंप्रकाशित5 अक्टू॰ 2026

RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा कि भारत DLT और Tokenization को बढ़ावा देगा, लेकिन Crypto पर सतर्क रहेगा। जानिए Blockchain, Digital Rupee और Tokenization को लेकर भारत की बदलती नीति।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार और रिजर्व बैंक का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ब्लॉकचेन से जुड़ी तकनीक को खारिज कर रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा है कि भारत Distributed Ledger Technology यानी DLT और Tokenization जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने के पक्ष में है, लेकिन निजी क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े जोखिमों को देखते हुए इनके प्रति सावधानी बरतना जरूरी है।

मालहोत्रा ने 3 अक्टूबर को Kautilya Economic Conclave में कहा कि RBI खुद भी ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है और कुछ प्रयोग सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, क्रिप्टोकरेंसी और उसके पीछे काम करने वाली तकनीक को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा।

Blockchain को लेकर RBI का रुख अलग

RBI की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि निजी क्रिप्टोकरेंसी अगर पैसे के समान बड़े स्तर पर इस्तेमाल होने लगती हैं, तो इससे मौद्रिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक संप्रभुता, मौद्रिक नीति और पूंजी के देश से बाहर जाने जैसे जोखिमों का जिक्र किया है। खासकर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में ये मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

RBI गवर्नर ने पैसे की एकरूपता यानी 'singleness of money' के सिद्धांत पर भी जोर दिया। इसका मतलब है कि एक ही मुद्रा में मौजूद अलग-अलग रूपों के पैसे का मूल्य समान और आपस में बदलने योग्य रहना चाहिए। निजी तौर पर जारी डिजिटल मुद्रा इस व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।

इसके विपरीत, DLT का इस्तेमाल वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान और संपत्तियों के डिजिटल रूप में किया जा सकता है, बिना निजी क्रिप्टोकरेंसी को वैकल्पिक मुद्रा का दर्जा दिए। यही अंतर भारत की मौजूदा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

Tokenization में RBI को दिख रहा बड़ा अवसर

टोकनाइजेशन के जरिए पारंपरिक वित्तीय संपत्तियों को डिजिटल टोकन के रूप में पेश किया जा सकता है। इसमें बॉन्ड, बैंक जमा और दूसरी वित्तीय संपत्तियां शामिल हो सकती हैं। इसका उद्देश्य लेनदेन और निपटान को ज्यादा तेज, पारदर्शी और प्रोग्राम करने योग्य बनाना है।

भारत में इसका प्रयोग अब सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं है। RBI और SEBI ने हाल में कॉरपोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन के लिए 'Demat 2.0' पायलट शुरू किया था। इसके तहत DLT और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती चरण में REC, L&T और IIFL Finance ने मिलकर ₹1,025 करोड़ जुटाए।

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RBI ने यह भी कहा है कि टोकनाइजेशन में कानूनी स्पष्टता, डेटा गोपनीयता, तरलता और अलग-अलग प्रणालियों के बीच तालमेल जैसी चुनौतियों पर ध्यान देना जरूरी होगा।

Crypto पर रोक नहीं, लेकिन नियंत्रण जारी

RBI का यह रुख भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर किसी नए पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा नहीं है। भारत में फिलहाल क्रिप्टो खरीदने या रखने पर व्यापक प्रतिबंध लागू नहीं है। हालांकि, VDA क्षेत्र पर टैक्स और मनी लॉन्ड्रिंग रोधी नियम लागू हैं और सरकार व्यापक नियामकीय ढांचे पर अभी विचार कर रही है।

संसदीय वित्त समिति ने भी हाल के महीनों में Virtual Digital Assets पर लंबे समय तक चर्चा की है। समिति ने नियमन, टैक्स, निवेशक सुरक्षा, विदेशी एक्सचेंज और स्टेबलकॉइन जैसे मुद्दों पर सरकार और RBI समेत अलग-अलग पक्षों से जानकारी ली है।

इस बीच RBI निजी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपनी चिंताओं पर कायम है। जुलाई में सामने आए सरकारी दस्तावेजों में भी केंद्रीय बैंक ने क्रिप्टो पर कड़े नियंत्रण और वित्तीय संस्थानों को इससे दूरी रखने की जरूरत बताई थी।

कुल मिलाकर, भारत की नीति अब एक स्पष्ट अंतर की ओर बढ़ती दिख रही है। सरकार और RBI ब्लॉकचेन, DLT, टोकनाइजेशन और डिजिटल रुपया जैसी तकनीकों का इस्तेमाल वित्तीय व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए करना चाहते हैं, लेकिन Bitcoin जैसी निजी क्रिप्टोकरेंसी को समान स्तर की स्वीकृति देने से अभी बच रहे हैं। आने वाले समय में इसी संतुलन के आधार पर भारत का डिजिटल संपत्ति ढांचा तैयार हो सकता है।

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