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Rajeev Ranjan Roy द्वारा लिखितस्टाफ लेखकPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत 1 अक्टूबर से ईएफ़टीए देशों के साथ पहला व्यापार समझौता लागू करेगा

ताजा खबरेंप्रकाशित29 सित॰ 2025

यूरोपीय समूह के साथ भारत का पहला औपचारिक व्यापार करार, आर्थिक कूटनीति में ऐतिहासिक उपलब्धि

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भारत एक अक्टूबर से यूरोपियन फ़्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफ़टीए) के साथ अपना पहला व्यापार समझौता औपचारिक रूप से लागू करने जा रहा है। यह कदम भारत की आर्थिक और व्यापारिक कूटनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि यह यूरोपीय समूह के साथ किया गया देश का पहला औपचारिक व्यापारिक करार है।

ईएफ़टीए में कुल चार देश शामिल हैं — आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्ज़रलैंड। भारत और ईएफ़टीए ने 10 मार्च 2024 को ट्रेड एंड इकॉनमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (टीईपीए) पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, सदस्य देशों की प्रक्रियात्मक मंज़ूरी पूरी होने में समय लगने के कारण इसके क्रियान्वयन में देरी हुई।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को इस ऐतिहासिक विकास की जानकारी देते हुए कहा,

अगले महीने की पहली तारीख से हमारे चार देशों—स्विट्ज़रलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और आइसलैंड—के साथ किया गया व्यापार समझौता प्रभावी हो जाएगा।

गोयल ने आगे बताया कि भारत इस समय 27 देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है। इनमें अमेरिका, यूरोपीय संघ और पेरू जैसे बड़े साझेदार शामिल हैं। साथ ही, यूरेशियाई समूह के साथ करार की रूपरेखा भी अंतिम चरण में है।

उन्होंने कहा, “आज पूरी दुनिया, यहां तक कि विकसित देश भी, भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते करने के इच्छुक हैं। हमने पहले ही संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ करार किए हैं, जो भारत की वैश्विक स्थिति और साख का प्रमाण है।”

भारत की आर्थिक मजबूती का संकेत

केंद्रीय मंत्री ने 2014 के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था में आए बदलावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार अब 700 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच चुका है, जो 2014 की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है।

उन्होंने विश्वास जताया कि अगले दो वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और पाँच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करेगा।

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आर्थिक प्रगति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पिछली तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जबकि हाल ही में मुद्रास्फीति घटकर केवल 2 प्रतिशत रह गई है, जो स्वतंत्रता के बाद से सबसे न्यूनतम स्तर है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की भूमिका

विशेषज्ञों के अनुसार ईएफ़टीए के साथ हुआ यह करार भारत के लिए न केवल व्यापारिक, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। यूरोपीय देशों के साथ बढ़ते आर्थिक रिश्ते भारत को नए बाज़ार, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी तक पहुँच और विदेशी निवेश के नए स्रोत उपलब्ध कराएंगे।

इस समझौते से भारत के निर्यातकों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। वहीं, भारतीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, स्वास्थ्य, शिक्षा, अनुसंधान और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए आयाम खुल सकते हैं।

निष्कर्ष

ईएफ़टीए देशों के साथ भारत का यह पहला व्यापार समझौता देश की आर्थिक कूटनीति की दिशा और प्रभाव को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला कदम है। यह दर्शाता है कि भारत अब केवल वैश्विक व्यापार का भागीदार नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है।

यदि आने वाले वर्षों में अन्य प्रमुख देशों के साथ प्रस्तावित करार भी सफलतापूर्वक लागू होते हैं, तो भारत न केवल एशिया, बल्कि वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भी एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर सकता है।

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