
भारत में $585 मिलियन के क्रिप्टो लेनदेन की जांच, Binance और Bybit का भी नाम
भारत का ED करीब $585 मिलियन के कथित क्रिप्टो सीमा पार लेनदेन की जांच कर रहा है। Mudrex, Saber.money, Instadapp और Binance व Bybit से जुड़ी जांच के प्रमुख पहलू जानें।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए कथित तौर पर नियमों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण किए जाने का मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) करीब $585 मिलियन यानी लगभग ₹5,000 करोड़ के लेनदेन की जांच कर रहा है। इस मामले में क्रिप्टो निवेश मंच Mudrex, भुगतान सेवा Saber.money और विकेंद्रीकृत वित्त प्रोटोकॉल Instadapp से जुड़ी गतिविधियां जांच के दायरे में हैं।
एजेंसी ने 27 अक्टूबर को बेंगलुरु में तीन और मध्य प्रदेश में एक ठिकाने पर तलाशी ली। जांच में Binance और Bybit जैसे विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों का नाम भी सामने आया है। ED को संदेह है कि कुछ कंपनियों ने स्थिर मूल्य वाली क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अधिकृत बैंकिंग माध्यमों से बाहर अंतरराष्ट्रीय लेनदेन किए।
हालांकि, यह मामला अभी जांच के चरण में है। किसी कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप अपने आप में अपराध साबित नहीं करते।
Mudrex और Saber.money पर क्या हैं आरोप?
जांच का एक प्रमुख हिस्सा बेंगलुरु की RPFAS Technologies Private Limited से जुड़ा है, जो Mudrex और Saber.money मंचों का संचालन करती है। ED के अनुसार, कंपनी कथित तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अनुमति के बिना क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से सीमा पार धन हस्तांतरण की सेवाएं दे रही थी।
एजेंसी का आरोप है कि ग्राहक पहले कंपनी के बैंक खातों में पारंपरिक मुद्रा जमा करते थे। इसके बाद इस रकम को USDT और USDC जैसी स्थिर मूल्य वाली क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। इन डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल दूसरे देशों में धन भेजने के लिए किया जाता था।
स्थिर मूल्य वाली क्रिप्टोकरेंसी ऐसी डिजिटल संपत्तियां होती हैं, जिनकी कीमत आमतौर पर अमेरिकी डॉलर जैसी किसी मुद्रा से जुड़ी रहती है। इनका इस्तेमाल क्रिप्टो बाजार में कारोबार के अलावा रकम स्थानांतरित करने के लिए भी किया जाता है।
ED के शुरुआती आकलन के मुताबिक, इस मामले में विदेशी मंचों पर मौजूद कथित अनधिकृत क्रिप्टो बैलेंस और सीमा पार लेनदेन की राशि ₹4,600 करोड़ से अधिक हो सकती है। जांच में अमेरिका, कनाडा और अन्य देशों में पंजीकृत कंपनियों तथा बड़े स्तर पर सीधे खरीदार और विक्रेता के बीच होने वाले क्रिप्टो सौदों की भी पड़ताल की जा रही है।
Binance और Bybit की भूमिका की जांच
इस मामले में Binance और Bybit का नाम विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों के रूप में आया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित लेनदेन में इन मंचों का इस्तेमाल किस तरह हुआ और विदेशों में रखी गई डिजिटल संपत्तियों का संबंध किन कंपनियों से था।
हालांकि, किसी एक्सचेंज का जांच में नाम आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसने कानून तोड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों में Binance और Bybit के खिलाफ इस मामले में किसी अंतिम कानूनी निष्कर्ष की जानकारी नहीं दी गई है।
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भारत में विदेशी क्रिप्टो मंच पहले भी नियामकीय जांच के दायरे में रहे हैं। दिसंबर 2023 में वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) ने कई विदेशी मंचों को नियमों के पालन को लेकर नोटिस दिए थे। Binance ने बाद में भारत में पंजीकरण कराया और 2024 में उस पर धनशोधन रोधी नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर ₹18.82 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। यह पिछला मामला है और इसे मौजूदा जांच से अलग समझना जरूरी है।
Instadapp और Fluid की भी पड़ताल
जांच का दूसरा हिस्सा Instadapp से संबंधित है, जो एथेरियम ब्लॉकचेन पर आधारित विकेंद्रीकृत वित्त मंच है और अब मुख्य रूप से Fluid नाम से काम करता है। ऐसे मंचों पर उपयोगकर्ता डिजिटल संपत्तियां उधार दे सकते हैं, कर्ज ले सकते हैं या अलग-अलग टोकन का लेनदेन कर सकते हैं।
ED का आरोप है कि इस मंच के संस्थापक Sowmay Jain और विकास टीम भारत से काम कर रहे थे, जबकि कारोबार को अमेरिका में पंजीकृत कंपनी के माध्यम से संचालित दिखाया गया। एजेंसी यह भी जांच रही है कि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, सिंगापुर और दुबई में पंजीकृत कंपनियों के जरिए आय को किस तरह स्थानांतरित किया गया।
जांच एजेंसी के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, Instadapp से जुड़ी गतिविधियों में करीब $40 मिलियन यानी लगभग ₹380 करोड़ के कथित विदेशी मुद्रा नियम उल्लंघन शामिल हो सकते हैं। ED का आरोप है कि विदेशों में अर्जित रकम को भारत में सॉफ्टवेयर विकास और परामर्श सेवाओं के भुगतान के रूप में भेजा गया। इन भुगतानों की वास्तविक प्रकृति की जांच की जा रही है।
क्रिप्टो से अंतरराष्ट्रीय भुगतान पर बढ़ेगी निगरानी?
यह जांच भारत में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल और विदेशी मुद्रा नियमों के बीच बढ़ते नियामकीय तनाव को दिखाती है। क्रिप्टो संपत्तियां तेजी से रकम भेजने का माध्यम बन सकती हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल करते समय विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) और लागू वित्तीय नियमों का पालन करना भी जरूरी है।
फिलहाल ED ने अपनी जांच के अंतिम नतीजे घोषित नहीं किए हैं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि मामले में आगे कितनी कंपनियों या व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। आने वाले समय में जांच से यह पता चल सकता है कि कथित लेनदेन कैसे किए गए, विदेशी एक्सचेंजों की भूमिका क्या थी और संबंधित कंपनियों ने नियमों का उल्लंघन किया या नहीं।
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