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Pratik Bhuyan द्वारा लिखितस्टाफ संपादकJai Singla द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

NIFTY से आगे: भारतीय सूचकांकों को ऑनचेन लाने में क्या बदल सकता है Hyperliquid का HIP-3?

ताजा खबरेंप्रकाशित2 नव॰ 2026

Hyperliquid का HIP-3 भारतीय सूचकांकों पर ऑनचेन परपेचुअल बाजार बनाने की संभावना खोलता है। लेकिन विश्वसनीय मूल्य डेटा, लिक्विडिटी, इंडेक्स लाइसेंसिंग और नियमन इसकी सफलता तय करेंगे।

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Hyperliquid का HIP-3 स्वतंत्र डेवलपर्स को नए परपेचुअल बाजार बनाने की सुविधा देता है। भारतीय सूचकांकों के लिए यह नई संभावनाएं खोलता है, लेकिन भरोसेमंद मूल्य डेटा, लिक्विडिटी, इंडेक्स लाइसेंसिंग और नियामकीय सवाल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

भारतीय शेयर बाजारों से जुड़े डेरिवेटिव अब ऑनचेन वित्त की चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं। Hyperliquid पर trade.xyz के NIFTY 50 से जुड़े परपेचुअल बाजार ने एक बड़े सवाल को सामने रखा है: क्या भारतीय सूचकांकों पर आधारित ऑनचेन बाजार वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बना सकते हैं?

संभावना केवल किसी परिचित नाम को ट्रेडिंग स्क्रीन पर जोड़ने तक सीमित नहीं है। ऐसे बाजारों को उपयोगी बनाने के लिए कीमतों का विश्वसनीय आधार, पर्याप्त खरीदार और विक्रेता, स्पष्ट कॉन्ट्रैक्ट नियम और आवश्यक अनुमतियां भी चाहिए।

Hyperliquid का HIP-3 इस दिशा में तकनीकी ढांचा उपलब्ध कराता है। हालांकि, तकनीकी रूप से बाजार बनाना और उसे लंबे समय तक भरोसेमंद तरीके से चलाना अलग चुनौतियां हैं।

HIP-3 क्या है और कैसे काम करता है?

HIP-3, Hyperliquid का ऐसा ढांचा है जिसके जरिए स्वतंत्र डेवलपर्स अपने परपेचुअल फ्यूचर्स बाजार बना और संचालित कर सकते हैं।

परपेचुअल फ्यूचर्स ऐसे डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट होते हैं जिनकी कोई निर्धारित एक्सपायरी नहीं होती। ट्रेडर इनके जरिए किसी परिसंपत्ति या सूचकांक की कीमत में बदलाव पर पोजिशन ले सकते हैं।

Hyperliquid के दस्तावेजों के अनुसार, बाजार बनाने वाली टीम कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों, ओरेकल व्यवस्था, मूल्य अपडेट और लीवरेज सीमाओं की जिम्मेदारी संभालती है। इसका मतलब है कि अलग-अलग बाजारों के संचालन और जोखिम को अलग से समझना जरूरी है।

किसी सूचकांक पर आधारित परपेचुअल खरीदने से उस सूचकांक में शामिल कंपनियों के शेयरों का स्वामित्व नहीं मिलता।

भारतीय सूचकांकों के लिए क्या है संभावना?

NIFTY 50 और BANK NIFTY जैसे सूचकांक भारतीय शेयर बाजार के अलग-अलग हिस्सों के प्रदर्शन को दर्शाते हैं। इनसे जुड़े ऑनचेन डेरिवेटिव वैश्विक ट्रेडर्स को भारतीय बाजारों की दिशा पर पोजिशन लेने का एक अतिरिक्त माध्यम दे सकते हैं। साथ ही, ऐसे उत्पाद क्रिप्टो आधारित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर पारंपरिक वित्तीय बाजारों से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट की उपलब्धता बढ़ा सकते हैं।

Hyperliquid India के लीड Uddalak Das ने साझा किए गए बयान में कहा:

“भारत में ट्रेडर्स की एक विशाल कम्युनिटी है और Hyperliquid भारतीय बाजारों को ऑनचेन लाने के नए अवसर खोल रहा है। NIFTY 50 और JIO परपेचुअल्स पहले से लाइव हैं। हमारा ध्यान ट्रेडर्स को शिक्षित करने, इकोसिस्टम को बढ़ाने और इन बाजारों को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने पर है।”

मूल अंग्रेजी बयान का हिंदी अनुवाद।

हालांकि, NIFTY 50 से जुड़े बाजार की शुरुआत का अर्थ यह नहीं है कि भारतीय सूचकांकों पर आधारित सभी संभावित उत्पाद लॉन्च हो चुके हैं। BANK NIFTY यहां संभावित विस्तार का उदाहरण है, किसी नए उत्पाद की पुष्टि नहीं। किसी भी नए बाजार की स्थिति जानने के लिए संबंधित संचालक की आधिकारिक घोषणा और उत्पाद की शर्तों की अलग से जांच जरूरी है।

बाजार बंद होने पर कीमत कैसे तय होगी?

ऑनचेन बाजार चौबीसों घंटे (24/7) ट्रेडिंग की सुविधा दे सकता है, जबकि उसके आधार वाला पारंपरिक शेयर बाजार निर्धारित कारोबारी सत्रों में ही खुलता है। इस अंतर से मूल्य निर्धारण की चुनौती पैदा होती है।

उदाहरण के लिए, भारतीय शेयर बाजार बंद होने के बाद कोई बड़ा आर्थिक या राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है, तो ऑनचेन ट्रेडर्स अपनी अपेक्षाओं के आधार पर पोजिशन बदल सकते हैं। उस समय NIFTY 50 का नया आधिकारिक कारोबारी स्तर उपलब्ध नहीं हो सकता। नतीजतन, ऑनचेन कॉन्ट्रैक्ट की कीमत और सूचकांक के अंतिम उपलब्ध स्तर के बीच अंतर बढ़ सकता है।

ऐसी स्थिति में ओरेकल की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ओरेकल वह व्यवस्था है जो ब्लॉकचेन आधारित उत्पादों तक बाहरी डेटा पहुंचाती है। किसी इंडेक्स परपेचुअल के लिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि मूल्य डेटा कहां से आता है, बाजार बंद होने पर कीमत कैसे तय होती है और डेटा उपलब्ध न होने या असामान्य उतार-चढ़ाव की स्थिति में बाजार किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

RedStone के सह-संस्थापक और COO Marcin Kazmierczak ने कहा:

“जब NIFTY जैसे पारंपरिक वित्तीय बाजार Hyperliquid HIP-3 के जरिए ऑनचेन आते हैं, तो कोई ओरेकल केवल क्रिप्टो कीमतों का मध्य मान निकालने वाला तरीका ज्यों का त्यों नहीं अपना सकता। हर पारंपरिक परिसंपत्ति कारोबारी घंटों के बाहर, सप्ताहांत में या लिस्टिंग से पहले अलग व्यवहार करती है। RedStone में हम हर परिसंपत्ति के अनुरूप चौबीसों घंटे काम करने वाली विशेष पद्धतियां विकसित कर रहे हैं। इनमें Anthropic जैसी कंपनियों के लिए प्री-IPO मूल्य निर्धारण भी शामिल है, ताकि पारंपरिक कारोबारी मंच बंद होने पर भी परपेचुअल बाजारों का मूल्य निर्धारण सटीक बना रहे।”

मूल अंग्रेजी बयान का हिंदी अनुवाद।

यह बयान RedStone के दृष्टिकोण को दर्शाता है। इससे किसी विशेष NIFTY कॉन्ट्रैक्ट में RedStone के ओरेकल के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं होती।

केवल लिस्टिंग से लिक्विडिटी नहीं आती

किसी कॉन्ट्रैक्ट का ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होना और उसमें आसानी से कारोबार कर पाना अलग बातें हैं। बाजार को प्रभावी बनाने के लिए पर्याप्त खरीद और बिक्री ऑर्डर, सक्रिय प्रतिभागी तथा अलग-अलग बाजार परिस्थितियों में उपलब्ध लिक्विडिटी की जरूरत होती है।

कम लिक्विडिटी में बड़े ऑर्डर अपेक्षा से खराब कीमत पर पूरे हो सकते हैं। खरीद और बिक्री के भाव के बीच अंतर यानी स्प्रेड भी बढ़ सकता है। इससे ट्रेडिंग की लागत बढ़ती है और तेजी से बदलते बाजार में पोजिशन बंद करना मुश्किल हो सकता है।

लीवरेज इन जोखिमों को और बढ़ा सकता है। यदि ट्रेडर अपनी जमा पूंजी से बड़ी पोजिशन लेता है, तो कीमत में अपेक्षाकृत छोटा बदलाव भी उसकी पूंजी पर बड़ा असर डाल सकता है।

इसलिए किसी ऑनचेन इंडेक्स बाजार का मूल्यांकन केवल ट्रेडिंग वॉल्यूम के आधार पर नहीं करना चाहिए। ऑर्डर बुक की गहराई, स्प्रेड, ओपन इंटरेस्ट और अलग-अलग समय पर उपलब्ध लिक्विडिटी भी महत्वपूर्ण संकेतक हैं।

इंडेक्स लाइसेंसिंग और नियमन क्यों महत्वपूर्ण हैं?

ब्लॉकचेन पर कॉन्ट्रैक्ट बनाने की तकनीकी सुविधा मिलने से किसी इंडेक्स के नाम, डेटा या अन्य बौद्धिक संपदा का इस्तेमाल करने की अनुमति अपने आप नहीं मिल जाती।

NSE Indices के प्रकाशित लाइसेंसिंग नियमों के अनुसार, उसके सूचकांकों पर आधारित या उनसे जुड़े वित्तीय उत्पाद बनाने के लिए लाइसेंस आवश्यक है। इसलिए किसी विशेष ऑनचेन उत्पाद की लाइसेंसिंग स्थिति की पुष्टि संबंधित पक्षों के दस्तावेजों से अलग से करनी होगी। केवल किसी इंडेक्स का नाम इस्तेमाल होने या उसके स्तर को ट्रैक करने से लाइसेंस मिलने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

नियामकीय स्थिति भी एक अलग मुद्दा है। किसी वेबसाइट या वॉलेट से उत्पाद तक पहुंच उपलब्ध होना, भारतीय निवासियों के लिए उस उत्पाद की नियामकीय स्वीकृति का प्रमाण नहीं है।

SEBI ने 30 अक्टूबर 2018 को विदेशी ट्रेडिंग पोर्टल के संबंध में जारी एडवाइजरी में ऐसे विदेशी मंचों पर प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव का कारोबार करने से जुड़े जोखिमों के बारे में निवेशकों को आगाह किया था। इसमें भारतीय नियामकीय निगरानी, मान्यता प्राप्त एक्सचेंजों की निवेशक सुरक्षा और शिकायत निवारण व्यवस्था की अनुपलब्धता से जुड़े जोखिमों का उल्लेख था।

यह एक सामान्य एडवाइजरी है, Hyperliquid या उसके किसी विशिष्ट कॉन्ट्रैक्ट पर SEBI के निर्णय का प्रमाण नहीं। किसी उत्पाद की कानूनी स्थिति का आकलन उसके वास्तविक ढांचे, उपलब्धता, संबंधित पक्षों और लागू नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए।

आगे क्या देखना होगा?

HIP-3 भारतीय सूचकांकों से जुड़े ऑनचेन बाजारों के लिए तकनीकी रास्ता उपलब्ध कराता है। लेकिन किसी बाजार की दीर्घकालिक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसका मूल्य डेटा कितना विश्वसनीय है, लिक्विडिटी कितनी गहरी है, कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें कितनी पारदर्शी हैं और आवश्यक लाइसेंस तथा नियामकीय सवालों का समाधान हुआ है या नहीं।

इस चर्चा की पृष्ठभूमि में Hyperliquid India और Bitget Wallet 3 नवंबर को मुंबई में House of HYPE आयोजित कर रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक होने वाली बैठक में ट्रेडर्स, डेवलपर्स और इकोसिस्टम टीमें शामिल होंगी। RedStone आयोजन के साझेदारों में शामिल है।

आयोजन की जानकारी और पंजीकरण यहां उपलब्ध है।

भारतीय सूचकांकों के ऑनचेन विस्तार का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कौन-सा नया कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च हुआ है। अधिक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बाजार किस मूल्य डेटा पर निर्भर करता है, ट्रेडर्स को किस तरह के जोखिम उठाने पड़ते हैं और उत्पाद की कानूनी तथा परिचालन संबंधी स्थिति कितनी स्पष्ट है।

प्रकटीकरण: Cointelegraph India, House of HYPE का मीडिया पार्टनर है। इस लेख में शामिल प्रतिनिधियों के बयान इस कवरेज के लिए साझा किए गए हैं।


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