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Rajeev Ranjan Roy द्वारा लिखितstaff writerPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितstaff editor

AI आधारित ग्रोकिपीडिया के ज़रिए एलोन मस्क ने विकिपीडिया की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

ताजा खबरेंप्रकाशितNov 4, 2025

मस्क का यह प्रयोग न केवल तकनीकी दृष्टि से दिलचस्प है, बल्कि ज्ञान-सत्ता की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

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एलोन मस्क एक बार फिर तकनीकी और वैचारिक बहस के केंद्र में है। इस बार कारण है उनका नया उद्यम ग्रोकिपीडिया, एक ओपन-सोर्स, एआई-संचालित ऑनलाइन विश्वकोश जो खुद को विकिपीडिया का “सत्य-केंद्रित” विकल्प बताता है।

मस्क ने सोमवार को एक्स पर इसे लॉन्च करते हुए घोषणा की कि यह मंच “सत्य, पूरा सत्य और सत्य के अलावा कुछ भी नहीं” प्रस्तुत करेगा। यह बयान जितना सरल लगता है, इसके पीछे उतनी ही गहरी जटिलता छिपी है, खासकर जब “सत्य” का निर्णायक अब एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) होगा।

लॉन्च के साथ ही ग्रोकिपीडिया चर्चा में आ गया। मस्क ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह से ओपन-सोर्स है यानी कोई भी इसे मुफ़्त में इस्तेमाल कर सकता है और एआई द्वारा उत्पन्न या मॉडरेट की गई सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगी। उनका दावा है कि इसका उद्देश्य तथ्यों को “प्रोपेगैंडा” से अलग करना है।

लॉन्च से पहले, मस्क ने कुछ दिनों तक इसे रोके रखा ताकि प्रोपेगैंडा को साफ किया जा सके, एक शब्दावली जो पहले से ही संकेत देती है कि यह मंच वैचारिक संतुलन की नई परिभाषा देने जा रहा है।

हालांकि, लॉन्च के कुछ ही घंटों में प्लेटफॉर्म क्रैश हो गया और फिर जल्द ही बहाल भी। अब तक इस पर करीब 8.85 लाख से अधिक लेख उपलब्ध हैं। परंतु इसके संचालन का तरीका विकिपीडिया से काफी अलग है। विकिपीडिया पर हजारों स्वयंसेवक संपादकीय प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जबकि ग्रोकिपीडिया में “ग्रोक एआई” नामक प्रणाली ही अंतिम निर्णायक की भूमिका निभाती है।

मस्क के अनुसार, उपयोगकर्ता किसी लेख में बदलाव या नई प्रविष्टि का अनुरोध कर सकते हैं, लेकिन यह एआई ही तय करेगा कि बदलाव उचित है या नहीं, और यदि अस्वीकार किया, तो वह कारण भी बताएगा।

यहां से एक अहम प्रश्न जन्म लेता है कि क्या सत्य का निर्धारण अब मशीन के विवेक पर छोड़ा जा सकता है? मस्क के समर्थक मानते हैं कि एआई, यदि सही डेटा पर प्रशिक्षित हो, तो मानवीय पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर तथ्यपरक निर्णय ले सकता है।

पर आलोचक तर्क देते हैं कि एआई अपने प्रशिक्षण डेटा का दास होता है और यदि वही डेटा वैचारिक रूप से झुका हुआ है, तो निष्कर्ष भी तटस्थ नहीं हो सकते।

पहले ही उदाहरण के तौर पर, एक एक्स यूजर ने नोट किया कि जॉर्ज फ्लॉयड पर ग्रोकिपीडिया का लेख विकिपीडिया से काफी अलग है। ग्रोकिपीडिया का पहला पैराग्राफ फ्लॉयड के आपराधिक रिकॉर्ड को प्रमुखता से बताता है, जबकि विकिपीडिया उसके पुलिस हिरासत में मारे जाने पर केंद्रित है। यह अंतर सिर्फ शब्दों का नहीं, बल्कि दृष्टिकोण का भी है और यही इस नए मंच की सबसे बड़ी बहस बन सकती है।

मस्क लंबे समय से विकिपीडिया की आलोचना करते रहे हैं, उन्हें यह मंच “राजनीतिक रूप से बाएं झुका हुआ” लगता है। उन्होंने कई बार आरोप लगाया कि विकिपीडिया के संपादक वैचारिक पक्षपात से ग्रस्त हैं और दक्षिणपंथी या विवादास्पद विचारों को दबा दिया जाता है।

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दिलचस्प बात यह है कि ग्रोकिपीडिया के अपने लेखों में भी इस धारणा को समर्थन देने वाले अध्ययन उद्धृत किए गए हैं, जैसे कि एक अध्ययन जिसमें कहा गया कि विकिपीडिया के लेखों की भाषा और टोन दक्षिणपंथी हस्तियों के प्रति अधिक नकारात्मक होती है।

लेकिन समीकरण का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विकिपीडिया पर “ग्रोकिपीडिया” के पृष्ठ में आलोचकों की यह आशंका दर्ज है कि मस्क का नया मंच “अत्यधिक दक्षिणपंथी दृष्टिकोण” को बढ़ावा दे सकता है।

एनबीसी न्यूज के हवाले से यह भी उल्लेख किया गया है कि मस्क के विवादास्पद “हाथ उठाने” वाले क्षण, जिसे कई लोगों ने नाजी सलामी के रूप में देखा, ग्रोकिपीडिया की प्रविष्टि में नहीं है, जबकि विकिपीडिया इसे दर्ज करता है।

इस तरह, दोनों मंच एक-दूसरे पर वैचारिक झुकाव के आरोप लगा रहे हैं और “सत्य” की परिभाषा बीच में उलझी हुई है। ग्रोकिपीडिया की सबसे बड़ी ताकत, एआई-आधारित निर्णय तंत्र, उसकी सबसे बड़ी चुनौती भी बन सकता है।

क्योंकि जहां विकिपीडिया में मानवीय संपादक बहस और सहमति से निष्कर्ष निकालते हैं, वहीं यहां एल्गोरिदम यह निर्णय लेगा कि कौन-सी जानकारी प्रामाणिक है और कौन-सी नहीं।

मस्क का यह प्रयोग न केवल तकनीकी दृष्टि से दिलचस्प है, बल्कि ज्ञान-सत्ता की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। यह सवाल खड़ा करता है कि भविष्य में सूचना के नियंत्रण का केंद्र किसके पास होगा, मनुष्यों के सामूहिक विवेक में या मशीनों के प्रोग्राम किए गए तर्क में?

फिलहाल, ग्रोकिपीडिया ने विकिपीडिया जैसी जड़ों को हिला तो दिया है, लेकिन यह साबित करना बाकी है कि क्या एआई वास्तव में निष्पक्ष “सत्य” का संरक्षक बन सकता है या फिर यह भी एक और डिजिटल मंच होगा जहां “सत्य” उसी दिशा में झुकेगा जिस दिशा में उसके निर्माता की विचारधारा उसे ले जाएगी।

अंततः, एलोन मस्क का यह नया विश्वकोश केवल ज्ञान का नहीं, बल्कि वैचारिक स्वतंत्रता का भी परीक्षण है, यह देखने के लिए कि क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता ‘सत्य’ की नई परिभाषा लिख सकती हैया वही पुराने पूर्वाग्रहों को नए कोड में ढाल देगी।

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