
₹7 करोड़ Digital Arrest Case में बड़ा Crypto Link, ED ने खोला मनी ट्रेल
₹7 करोड़ के SP Oswal डिजिटल अरेस्ट मामले में ED ने Binance से जुड़े क्रिप्टो ट्रांसफर, म्यूल बैंक खातों और विदेशी नेटवर्क की कड़ियां सामने आने का दावा किया है। कोलकाता से सोहेल अख्तर गिरफ्तार हुआ है।

मैंने ED के आधिकारिक दावों और आज की अन्य रिपोर्टों से मामले की जानकारी cross-check की है। जांच में कथित म्यूल बैंक खातों, Binance से जुड़े क्रिप्टो ट्रांसफर और विदेश में बैठे सहयोगियों तक रकम पहुंचाने की कड़ियां सामने आई हैं। आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं और अदालत में साबित होना बाकी है।
₹7 करोड़ Digital Arrest Case में Crypto Connection, ED ने खोली मनी लॉन्ड्रिंग की परतें
लुधियाना के कारोबारी एसपी ओसवाल से कथित तौर पर ₹7 करोड़ की ठगी वाले डिजिटल अरेस्ट मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम को इधर-उधर करने के सबूत मिले हैं। एजेंसी ने 28 सितंबर को कोलकाता से सोहेल अख्तर उर्फ राजू को गिरफ्तार किया है। ED के मुताबिक, वह कथित तौर पर म्यूल बैंक खातों का इंतजाम करता था और बदले में उसे क्रिप्टोकरेंसी के रूप में कमीशन मिलता था।
मामले की जांच में कथित तौर पर कई बैंक खाते, फर्जी कंपनियां, विदेशी सहयोगी और डिजिटल संपत्तियों के लेनदेन सामने आए हैं। ED ने यह भी आरोप लगाया है कि नेटवर्क में बैंक खातों के OTP और SMS तक विदेश में बैठे लोगों की पहुंच बनाने के लिए विशेष मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया गया।
CBI और जज बनकर ऐंठे गए ₹7 करोड़
यह मामला अगस्त 2023 में सामने आया था, जब Vardhman Group के चेयरमैन एसपी ओसवाल को साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट किया। आरोप है कि ठगों ने खुद को CBI अधिकारी और न्यायिक अधिकारी बताकर ओसवाल को कई वीडियो कॉल के जरिए डराया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने की बात कही। इसके बाद उनसे करीब ₹7 करोड़ अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए गए।
ED ने लुधियाना साइबर क्राइम पुलिस की FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। बाद में इसी समूह से जुड़े नौ अन्य कथित डिजिटल अरेस्ट मामलों को भी जांच में शामिल किया गया। इससे एजेंसी को शक हुआ कि यह केवल एक व्यक्ति से ठगी का मामला नहीं, बल्कि कई स्तरों पर काम करने वाला नेटवर्क हो सकता है।
म्यूल अकाउंट से Crypto तक पहुंची रकम
ED के अनुसार, ठगी से हासिल रकम शुरुआत में Rigglo Ventures Private Limited और Frozenman Warehousing & Logistics से जुड़े बैंक खातों में पहुंची। इन खातों को कथित तौर पर नेटवर्क के अलग-अलग सदस्यों द्वारा नियंत्रित किया जाता था।
जांच में सामने आया कि कम आमदनी वाले लोगों को लोन या नौकरी दिलाने का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों को म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। रकम को कई खातों में छोटी-छोटी किश्तों में भेजने के बाद तुरंत नकद निकाला जाता था।
ED का आरोप है कि इस नकदी का एक हिस्सा वर्चुअल डिजिटल एसेट यानी क्रिप्टो खरीदने में लगाया गया। इसके बाद कमीशन काटकर क्रिप्टो विदेशी नागरिकों से जुड़े खातों में ट्रांसफर की जाती थी।
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जांच में Binance से जुड़े खातों का भी जिक्र आया है। ED के मुताबिक, सोहेल अख्तर और एक अन्य आरोपी अर्पित राठौर को कथित तौर पर क्रिप्टो के रूप में कमीशन मिलता था। इससे जांच एजेंसी अब बैंकिंग लेनदेन के साथ क्रिप्टो ट्रांसफर की कड़ियों को भी जोड़कर देख रही है।
OTP और SMS तक विदेश से पहुंच का आरोप
इस मामले में सबसे अहम तकनीकी कड़ी एक APK एप्लिकेशन से जुड़ी बताई गई है। ED के मुताबिक, जांच के दौरान कुछ मोबाइल फोन में AMMFORWARD नाम की APK फाइलें मिलीं। इन फोन में संबंधित बैंक खातों से जुड़े SIM कार्ड भी इस्तेमाल किए गए थे।
एजेंसी का आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए नेपाल में बैठे सहयोगियों को बैंक खातों से जुड़े OTP और SMS अपने डिवाइस पर मिल सकते थे। इससे बैंक खातों को सीधे खाताधारकों की निगरानी के बिना संचालित करना आसान हो जाता था। विदेशी सहयोगियों के साथ बैंक खातों की जानकारी साझा करने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल का भी आरोप है।
ED का कहना है कि रकम को कई म्यूल खातों और कंपनियों के जरिए घुमाने के बाद उसका कुछ हिस्सा विदेश भेजा गया। एजेंसी अब इन लेनदेन और क्रिप्टो ट्रांसफर के जरिए कथित तौर पर छिपाई गई रकम का पूरा रास्ता पता लगाने की कोशिश कर रही है।
अब तक तीन गिरफ्तारियां, जांच जारी
सोहेल अख्तर की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ED के अनुसार, रूमी कलिता को दिसंबर 2025 में और अर्पित राठौर को उसी महीने गिरफ्तार किया गया था। सोहेल अख्तर को 28 सितंबर 2026 को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया और विशेष PMLA अदालत ने उसे 6 अक्टूबर तक सात दिन की ED हिरासत में भेजा है।
ED ने फरवरी 2026 में ₹1.76 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच करने का आदेश भी जारी किया था। एजेंसी ने कुछ आरोपियों और Frozenman Warehousing & Logistics के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है।
फिलहाल जांच का फोकस बैंक खातों, विदेशी नेटवर्क और Binance से जुड़े क्रिप्टो लेनदेन के बीच संबंधों पर है। यह मामला दिखाता है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों में ठगी गई रकम को छिपाने और सीमा पार भेजने के लिए पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था के साथ क्रिप्टो का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, ED द्वारा लगाए गए आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं और इनकी अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली कार्यवाही के बाद ही होगी।
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