तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में एक क्रिप्टोकरेंसी निवेश योजना से जुड़े कथित बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एक स्थानीय कंपनी और उसके निदेशक के खिलाफ लगभग 30 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप में मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि कंपनी ने निवेशकों को ऊंचे मासिक रिटर्न का लालच देकर बड़ी रकम इकट्ठा की, लेकिन बाद में न तो वादा किया गया लाभ दिया और न ही मूल धन वापस किया।
पुलिस के अनुसार, यह मामला TFT Block Chain Services Private Limited नामक कंपनी से जुड़ा है, जो “Tycoon Fintech” के नाम से भी काम कर रही थी। जांच में सामने आया है कि कंपनी ने लोगों को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कराने के नाम पर 15% से 20% तक मासिक रिटर्न देने का वादा किया था। इस आकर्षक प्रस्ताव के कारण कई निवेशकों ने बड़ी रकम कंपनी में लगा दी।
निवेशकों की शिकायत के बाद खुला मामला
मामले की शुरुआत तब हुई जब कुछ निवेशकों ने 2023 में इस कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी लंबे समय से वादा किए गए रिटर्न का भुगतान नहीं कर रही थी और निवेश की गई रकम भी वापस नहीं की जा रही थी। इसके बाद मामला भारतीय रिजर्व बैंक तक पहुंचा और नियामक ने इस संबंध में नोटिस जारी किया।
रिपोर्ट के अनुसार, नोटिस जारी होने के बाद कंपनी के संचालक और जिम्मेदार लोग सामने नहीं आए। कई बार संपर्क करने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। बाद में इस मामले की जानकारी कंपनी मामलों के रजिस्ट्रार को भी दी गई, लेकिन वहां से भेजे गए नोटिसों का भी कोई जवाब नहीं मिला।
जांच में सामने आई अनियमितताएं
प्राथमिक जांच में यह भी पता चला कि कंपनी ने बिना आवश्यक अनुमति के बड़े स्तर पर निवेश स्वीकार किए थे। अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड भी सही तरीके से नहीं रखे गए थे। यह भी संदेह है कि कंपनी की निवेश योजना नियामकीय नियमों के अनुरूप नहीं थी।
इसी आधार पर कंपनी मामलों के विभाग ने कंपनी पर जुर्माना लगाया। इसके बाद तमिलनाडु पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने औपचारिक रूप से मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया और क्या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका रही है।
कंपनी के कार्यालय और गतिविधियों की जांच
अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी चेन्नई के अन्ना सलाई इलाके में स्थित एक निजी व्यावसायिक परिसर से संचालित हो रही थी। बताया जा रहा है कि कंपनी ने शहर के कई इलाकों में निवेशकों से संपर्क कर उन्हें क्रिप्टो निवेश योजनाओं के बारे में बताया। कई लोगों ने इसे एक भरोसेमंद अवसर मानकर पैसा लगाया।
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हालांकि, समय बीतने के साथ जब रिटर्न मिलना बंद हुआ तो निवेशकों को शक हुआ। कुछ लोगों ने कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद कई पीड़ितों ने मिलकर अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने पीड़ितों से आगे आने की अपील की
आर्थिक अपराध शाखा ने कहा है कि जिन लोगों ने इस कंपनी में निवेश किया है और नुकसान उठाया है, वे आगे आकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस ने इसके लिए चेन्नई के अशोक नगर स्थित आर्थिक अपराध शाखा कार्यालय में शिकायत देने की व्यवस्था की है।
क्रिप्टो निवेश में बढ़ते जोखिम
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े निवेश तेजी से लोकप्रिय हुए हैं, लेकिन इनके साथ जोखिम भी बढ़े हैं। कई मामलों में कंपनियां या व्यक्ति असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न का वादा करके निवेशकों को आकर्षित करते हैं।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी योजना में बहुत कम समय में बहुत अधिक लाभ का दावा किया जाए तो निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। ऐसे मामलों में निवेश करने से पहले कंपनी की वैधता, पंजीकरण और नियामकीय स्थिति की जांच करना जरूरी है।
फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस कथित घोटाले के पीछे और कौन लोग शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निवेशकों की रकम कहां गई और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
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