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Rajeev Ranjan Roy द्वारा लिखितstaff writerPratik Bhuyan द्वारा समीक्षितstaff editor

भूटान ने फिर घटाया डिजिटल मुद्रा भंडार, सरकारी कोष से की $22 Mn मूल्य की बिटकॉइन बिक्री

ताजा खबरेंप्रकाशितFeb 6, 2026

हिमालयी देश भूटान ने गिरते डिजिटल मुद्रा बाजार और बढ़ती खनन लागत के बीच अपने सरकारी बिटकॉइन भंडार से 22 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य की बिक्री की है।

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दक्षिण एशिया का छोटा लेकिन रणनीतिक दृष्टि से सजग देश भूटान एक बार फिर अपने डिजिटल मुद्रा भंडार को लेकर चर्चा में है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार भूटान सरकार ने अपने राष्ट्रीय बिटकॉइन कोष से लगभग 284.8 बिटकॉइन, यानी करीब $22.3 Mn (लगभग 185 करोड़ रुपये) मूल्य की डिजिटल मुद्रा बाजार में उतार दी है। यह बिक्री ऐसे समय हुई है जब वैश्विक डिजिटल मुद्रा बाजार लगातार दबाव में है और निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है।

ब्लॉकचेन लेन-देन पर नजर रखने वाली विश्लेषण संस्था आर्कहम इंटेलिजेंस के आंकड़ों के मुताबिक यह बिटकॉइन दो चरणों में स्थानांतरित किए गए। पहला लेन-देन 30 जनवरी को हुआ, जब 100.8 बिटकॉइन भेजे गए, जबकि दूसरा बड़ा स्थानांतरण 4 फरवरी को किया गया, जिसमें 184 बिटकॉइन शामिल थे। ये डिजिटल संपत्तियां एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संस्था को भेजी गई, जिसे आम तौर पर बड़े पैमाने पर क्रिप्टो लेन-देन और बाजार में तरलता उपलब्ध कराने के लिए जाना जाता है।

गिरते भाव और बढ़ता दबाव

भूटान का यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब बिटकॉइन अपने हालिया सर्वोच्च स्तर से लगभग 40 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है। वर्ष 2024 के दौरान जिस तेजी ने डिजिटल मुद्रा समर्थकों को उत्साहित किया था, वह अब काफी हद तक ठंडी पड़ चुकी है। इसके साथ ही बिटकॉइन नेटवर्क में हाल में हुई तकनीकी प्रक्रिया, जिसे इनाम कटौती कहा जाता है, ने खनन की लागत को भी काफी बढ़ा दिया है।

भूटान ने वर्ष 2019 से ही अपने प्रचुर जलविद्युत संसाधनों का उपयोग कर डिजिटल मुद्रा खनन की शुरुआत की थी। स्वच्छ ऊर्जा के बल पर यह मॉडल लंबे समय तक लाभकारी साबित हुआ और देश ने धीरे-धीरे एक बड़ा बिटकॉइन भंडार तैयार कर लिया। एक समय ऐसा भी आया जब भूटान की डिजिटल मुद्रा होल्डिंग उसके सकल घरेलू उत्पाद के बड़े हिस्से के बराबर आंकी जाने लगी।

हालांकि हालिया परिस्थितियों ने इस रणनीति की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इनाम कटौती के बाद एक बिटकॉइन निकालने की लागत लगभग दोगुनी हो गई है, जिससे खनन का लाभ घटा है और सरकारों के लिए भंडारण बनाए रखना पहले जितना आसान नहीं रहा।

भूटान की बदलती स्थिति

ताज़ा बिक्री के बाद भूटान के पास मौजूद कुल बिटकॉइन भंडार घटकर लगभग 5,700 बिटकॉइन के आसपास रह गया है। इससे पहले यह आंकड़ा इससे कहीं अधिक था और भूटान दुनिया के शीर्ष सरकारी बिटकॉइन धारकों में गिना जाता था। अब अंतरराष्ट्रीय सूची में उसका स्थान नीचे खिसक गया है और अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, यूक्रेन, अल सल्वाडोर तथा संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश उससे आगे निकल चुके हैं।

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डिजिटल मुद्रा मामलों के जानकारों का मानना है कि भूटान की यह बिक्री कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। बीते कुछ वर्षों में भी देश समय-समय पर अपने भंडार का एक हिस्सा बेचता रहा है, खासकर तब जब बाजार में अस्थिरता बढ़ जाती है या घरेलू वित्तीय जरूरतें सामने आती हैं।

बाजार में हलचल, निवेशकों में चर्चा

भूटान जैसे अपेक्षाकृत छोटे देश द्वारा की गई यह बिक्री वैश्विक डिजिटल मुद्रा बाजार में इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह संकेत देती है कि अब केवल निजी निवेशक ही नहीं, बल्कि सरकारें भी डिजिटल संपत्तियों को लेकर अधिक व्यावहारिक रुख अपना रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम जोखिम प्रबंधन और वित्तीय संतुलन की दिशा में उठाया गया हो सकता है।

हालांकि भूटान सरकार की ओर से इस बिक्री पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक माहौल, गिरती कीमतें और बढ़ती लागतें किसी भी जिम्मेदार सरकार को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार के लिए मजबूर कर सकती हैं।

निष्कर्ष

भूटान द्वारा अपने बिटकॉइन भंडार से 22 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य की बिक्री यह साफ दर्शाती है कि डिजिटल मुद्रा अब केवल तकनीकी प्रयोग नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक नीतियों का अहम हिस्सा बन चुकी है। बदलते बाजार हालात में भूटान का यह कदम आने वाले समय में अन्य देशों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है - जहां लाभ और जोखिम के बीच संतुलन साधना ही सबसे बड़ी चुनौती है।

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